सर्वे में हुआ खुलासा: फोन और टीवी देखकर ज्यादा खाना खा जाते हैं बच्चे, इनमें हो रही ये घातक बीमारी
शोध में 31 प्रतिशत बच्चे मोटापे से पीड़ित पाए गए। यह संख्या लड़कियों और बड़ी कक्षा में अधिक पाई गई। आठवीं कक्षा की छात्राओं में यह संख्या 42 प्रतिशत तक बढ़ गई थी।
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78 फीसदी स्कूली बच्चे मोबाइल और टीवी स्क्रीन देखते हुए खाना खाते हैं। इस कारण वे ज्यादा खाना खा जाते हैं। इससे उनमें मोटापा बढ़ रहा है। शरीर में वसा का जमाव अधिक होने की वजह से कोलेस्ट्राल और फैटी लिवर की दिक्कत हो रही है। 70 फीसदी बच्चे छुट्टियों में दो घंटे से अधिक स्क्रीन देखते हैं। ये तथ्य ग्रो इंडिया सोसाइटी के सर्वे में सामने आए हैं। सोसाइटी ने 15 विद्यालयों के कक्षा पांच से आठ के 7200 बच्चों के विकास का अध्ययन किया है।
7200 छात्रों के विकास का हुआ अध्ययन
रविवार को ग्रो इंडिया सोसाइटी ने 10वां ग्रो इंडिया दिवस मनाया। इस मौके पर हार्मोन संबंधी रोग से पीड़ित बच्चों पर कार्यक्रम का आयोजन राजेंद्र स्वरूप सभागार सिविल लाइंस में किया गया। डॉ. अनुराग बाजपेई ने बताया कि सोसाइटी 10 हजार स्कूली बच्चों के शारीरिक विकास और उन पर जीवन शैली के प्रभाव का अध्ययन कर रही हैं। अब तक 7200 छात्रों के विकास का अध्ययन किया गया।
शोध में 31 प्रतिशत बच्चे मोटापे से पीड़ित
शोध में 31 प्रतिशत बच्चे मोटापे से पीड़ित पाए गए। यह संख्या लड़कियों और बड़ी कक्षा में अधिक पाई गई। आठवीं कक्षा की छात्राओं में यह संख्या 42 प्रतिशत तक बढ़ गई थी। शोध में मोटापे के मुख्य कारणों में जंक फूड का प्रयोग, टेलीविजन देखते हुए खाना खाना एवं शारीरिक गतिविधियों का अभाव था। इसी से सोसाइटी ने विद्यालयों से मिलकर फैट टू फिट प्रोजेक्ट लॉन्च किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. अतुल कपूर रहे। इस मौके पर डॉ. आरएन चौरसिया, डॉ ऋषि शुक्ला, डॉ. यूथिका बाजपेई, डॉ. विभा, उमेश नरूला, अश्वनी कोहली, शिक्षिकाएं और अभिभावक मौजूद रहे।
बच्चों के विकास के लिए जरूरी खेल
दिल्ली के डॉ. पीएस मैनन ने बताया कि खेल, व्यायाम का बच्चों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान होता है। बच्चों में जीवन शैली से संबंधित रोग तीव्रता से बढ़ रहे हैं। डॉ. रश्मि कपूर ने बताया कि बच्चों में मोटापा एक बड़ी समस्या है। इससे डायबिटीज फैटी लीवर एवं कोलेस्ट्रॉल के रोग बहुत कम समय पर आ जाते हैं।