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इस बच्चे ने केवल आठ साल की उम्र में पूरा किया कुरान-ए-पाक
सुहेल खान, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 13 Feb 2017 10:40 PM IST
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आठ साल की उम्र में पूरा कुरान पाक पढ़ने वाला बच्चा
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आठ साल की उम्र में कानपुर के मोहम्मद अरमान सोलंकी ने कुरान-ए-पाक का पाठ मुकम्मल कर लिया। कुरान के सभी तीस पारों (अध्याय) को उच्चारण सहित पूरा कराने में उनके उस्ताद हाफिज मोहम्मद मुकीम का सहयोग रहा।
कुरान का पाठ पूरा करने पर कानपुर के पेंचबाग में दुआ का कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें अरमान को बुजुर्गों और परिजनों ने दुआओं से नवाजा। वहीं, बच्चे ने कुरान की सूरह फातिहा पढ़कर सुनाया। उनके पिता हाजी मेराज सोलंकी ने बताया कि यह उनके और उनकी बीवी और खानदान व रिश्तेदारों के लिए खुशी का मौका है। कुरान को किरत के साथ मुकम्मल कराने मे हाफिज मोहम्मद मुकीम का भी सहयोग रहा। फिलहाल अरमान अभी सिविल लाइंस के कंगारू किड्स स्कूल में कक्षा दो का छात्र है। वह अपने बेटे को दीनी और दुनियावी दोनों तालीम दिलाएंगे। उनके उस्ताद हाफिज मोहम्मद मुकीम ने बताया कि कुरान की तालीम हर मुसलमान के लिए जरूरी है क्योंकि कुरान एक किताब नहीं बल्कि दुनिया में जीने का तरीका है। अल्लाहताला ने अपनी उम्मत को कुरान को उठाने की वह ताकत दी है, जो बड़े बड़े पहाड़ों को भी नहीं मिली। जब कुरान नाजिल हुआ था तो पहाड़ भी लरज गए थे।
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कुरान का पाठ पूरा करने पर कानपुर के पेंचबाग में दुआ का कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें अरमान को बुजुर्गों और परिजनों ने दुआओं से नवाजा। वहीं, बच्चे ने कुरान की सूरह फातिहा पढ़कर सुनाया। उनके पिता हाजी मेराज सोलंकी ने बताया कि यह उनके और उनकी बीवी और खानदान व रिश्तेदारों के लिए खुशी का मौका है। कुरान को किरत के साथ मुकम्मल कराने मे हाफिज मोहम्मद मुकीम का भी सहयोग रहा। फिलहाल अरमान अभी सिविल लाइंस के कंगारू किड्स स्कूल में कक्षा दो का छात्र है। वह अपने बेटे को दीनी और दुनियावी दोनों तालीम दिलाएंगे। उनके उस्ताद हाफिज मोहम्मद मुकीम ने बताया कि कुरान की तालीम हर मुसलमान के लिए जरूरी है क्योंकि कुरान एक किताब नहीं बल्कि दुनिया में जीने का तरीका है। अल्लाहताला ने अपनी उम्मत को कुरान को उठाने की वह ताकत दी है, जो बड़े बड़े पहाड़ों को भी नहीं मिली। जब कुरान नाजिल हुआ था तो पहाड़ भी लरज गए थे।
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