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Kanpur News: दुखवा मिटाई छठी मईया रउवे असरा हमार, सबके पुरावेली मनसा हमरों सुन लीं पुकार

Mon, 27 Oct 2025 01:08 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर Updated Mon, 27 Oct 2025 01:08 AM IST
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Chhathi Maiya, please remove my sorrow, you have heard my call for the past wishes of all.
कानपुर देहात। छठ महापर्व पर रविवार को खरना में उपासकों ने दिनभर निर्जला व्रत के बाद शाम के समय बखीर तैयार कर पूजा अर्चना कर इसका भोग लगाया। नगर में रह रहे बिहार और पूर्वांचल के परिवारों में सोमवार की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पूजन सामग्री बनाने की तैयारियां चल रही हैं। मंगलवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रती जल ग्रहण करेंगे। साथ ही सुख-समृद्धि के लिए व्रती महिलाएं सरोवर के तट पर कोसी भरेंगी। कुछ तट पर रात व्यतीत करेंगी।
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नगर के नवीपुर, मैथा व रनियां स्थित पातालेश्वर मंदिर में छठ पूजा की धूम है। सरोवरों व मंदिरों को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। यहां दुखवा मिटाई छठी मईया रउवे असरा अहार जैसे मंगल गीत गूंज रहे हैं। महिलाओं ने फलों की डलियां सजा ली हैं। साथ ही अन्य सामग्री की खरीदारी की जा रही है। जय बाबा पातालेश्वर छठ पूजा समिति के अध्यक्ष राजीव कुमार ने बताया कि रनियां में सभी सामग्री न मिलने की वजह से कानपुर नगर के विजय नगर से खरीदारी की जा रही है। घरों में महिलाएं शुद्धता के साथ ठेकुआ आदि बनाकर तैयार कर रही हैं।
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प्रसाद के लिए बनाया ठेकुआ
डाला छठ पूजा का सबसे खास प्रसाद ठेकुआ है। व्रती महिलाओं ने गेहूं के आटे में देशी घी और चीनी मिलाकर ठेकुआ बनाया। सोमवार को उसे छठी मइया को अर्पित करेंगी। अगले दिन उसे ग्रहण करके व्रत का पारण करेंगी। छठी मइया को नींबू, नारंगी, गन्ना, नारियल, सिंघाड़ा व ठेकुआ अर्पित किया जाता है। नींबू व नारंगी का रंग पीला होता है। यह रंग शुभ होता है। गन्ना का मंडप बनाकर उसी के अंदर पूजा की जाती है। गन्ना समृद्धि का प्रतीक है, जबकि सिंघाड़ा रोगनाशक होता है। इसी प्रकार केला, सुपाड़ी, पान, अमरूद व नारियल भी पवित्र होते हैं। सूर्य आराधना से शांत होते हैं।
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संतान की समृद्धि के लिए होती है छठ माता की आराधना
छठ पूजा समिति के अध्यक्ष राजीव बताते हैं कि छठ माता को सूर्यदेव की बहन बताया जाता है। छठ माता को संतान की सुरक्षा करने वाली देवी के रूप में भी पूजा जाता है। संतान सुख प्राप्ति, दीर्घायु व उनकी सुख समृद्धि के लिए श्रद्धालु छठ माता का पूजन करते हैं। वैदिक ज्योतिष में सूर्य आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है, सूर्य को मान, सम्मान, स्वास्थ्य सुख, जीवन शक्ति और समृद्धि प्रदान करने वाला ग्रह माना गया है। सूर्य की पूजा करने से व्यक्ति शारीरिक व मानसिक शांति तथा जीवन में सफलता प्राप्त करता है। छठ महापर्व की बड़ी महत्ता है।
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जात-पात, ऊंच-नीच का नहीं होता भेदभाव
छठ पूजा में जात-पात और ऊंच-नीच का कोई भेदभाव नहीं होता है। सभी वर्ग के लोग एक साथ मिलकर घाटों पर पूजा करते हैंं। चार दिन तक चलने वाले इस व्रत में अनुशासन, स्वच्छता और पवित्रता का पालन किया जाता है। जो सादगी का महत्व सिखाता है। छठ के दौरान सरोवरों, नदियों और घाटों की सफाई की जाती है, जो पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है। - मीना देवा, रनियां।

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घर की चकिया में गेंहू पीस बनता है ठेकुआ
तकनीकी बदल गई है, लेकिन अभी भी हमारे घर में ठेकुआ के लिए गेंहू घर की चकिया में पीसा जाता है। सारी सब्जियां पास के गांव से मंगवाई जाती हैं। गांव में रहने के दौरान मिट्टी के बर्तन और चूल्हा पर पकवान बनाते थे। अब गैस-चूल्हे पर ही घर की महिलाएं शुद्धता के साथ पूरे पकवान बनाते हैं। सभी को इस त्योहार का इंतजार पूरे साल रहता है। - किरन देवी, रनियां।
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