{"_id":"11d13df73d0ecfd629c0206350973b7e","slug":"chartered-accountant-soldier-pen-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘चार्टर्ड एकाउंटेंट हैं कलम के सिपाही’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘चार्टर्ड एकाउंटेंट हैं कलम के सिपाही’
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Mon, 25 Jan 2016 01:39 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देश की आजादी में जिस तरह से लेखकों, पत्रकारों ने कलम के सिपाही का रोल अदा किया था, वही जिम्मेदारी आज के समय में चार्टर्ड एकाउंटेंट को निभानी है।
विज्ञापन
सीए अपनी कलम की ताकत को समझें और देश के आर्थिक विकास में मददगार बनें। कहीं भी हस्ताक्षर करने से पहले विचार करें कि कहीं उनके इस फैसले से देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान तो नहीं पहुंच रहा है। ये बातें सेंट्रल काउंसिल के सदस्य सीए मुकेश सिंह कुशवाहा ने कहीं।
विज्ञापन
वह रविवार को इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट ऑफ इंडिया की रीजनल काउंसिल की ओर से लखनपुर स्थित आईसीएआई भवन में आयोजित स्टूडेंटों के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि और कन्वोकेशन कोआर्डिनेटर शामिल हुए थे।
विज्ञापन
दीक्षांत समारोह में चार्टर्ड एकाउंटेंट संस्थान से जुड़े 250 नए सीए को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। साढ़े चार साल से लेकर छह साल तक की मेहनत के बाद यह तमगा हासिल करने वाले नवागत चार्टर्ड एकाउंटेंटों ने अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाने की शपथ ली।
इससे पहले आईसीएआई के चेयरमैन मनोज फड़नीस ने गूगल हैंडआउट के जरिये सभी को बधाई दी। सीए मनु अग्रवाल ने कहा कि आप से सरकार और समाज की अपेक्षाएं बढ़ जाती हैं। चार्टर्ड एकाउंटेंट का पेशा व्यक्तिगत धनोपार्जन का नहीं है और न ही कुछ साल तक पढ़ाई कर लेने के बाद नौकरी पाने का जरिया।
सीए दीप कुमार मिश्रा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों पर सूक्ष्म दृष्टि रखते हुए राष्ट्र और यहां के नागरिकों के आर्थिक विकास को आगे ले जाना है। इस दौरान अक्षत कुमार गुप्ता, शाहिद कामरान खान आदि मौजूद रहे।
अंतरराष्ट्रीय मार्केट के लिए तैयार कर रहे सीए
सेंट्रल काउंसिल के सदस्य सीए मुकेश कुमार कुशवाह ने बताया कि चार्टर्ड एकाउंटेंट संस्थान ने देश के चार्टर्ड एकाउंटेंटों को अंतरराष्ट्रीय मार्केट के लायक तैयार करने का बीड़ा उठाया है। इस योजना के तहत दुनिया के कई देशों के सीए चैप्टर को एक मंच पर लाया जा रहा है।
इसके जरिए अन्य देशों की आर्थिक स्थिति, वहां का कंपनी लॉ और चार्टर्ड एकाउंटेटों की जरूरत का अध्ययन किया जा रहा है। इसका फायदा होगा कि यहां के चार्टर्ड एकाउंटेंट के लिए विदेशों के द्वार खुल जाएंगे। रोजगार का क्षेत्र और बढ़ जाएगा। इसके अलावा संस्थान ने डिप्लोमा इन इंफॉर्मेशन सिस्टम का नया कोर्स शुरू किया है।
इसे करके सीए आईटी सेक्टर से भी सीधे जुड़ सकेंगे। ऑनलाइन कारोबार के नए विस्तार को देखते हुए ई-कॉमर्स के जानकार भी तैयार किए जा रहे हैं। श्री कुशवाह ने बताया कि सीए करने के बाद कोई भी व्यक्ति बेरोजगार नहीं रह सकता। संस्थान देश की जरूरत के मुताबिक दक्ष आर्थिक जानकार तैयार करता है।
सीए शुभी वर्मा
तिलक नगर निवासी शुभी के लिए यह मुकाम हासिल करना आसान नहीं था। 2007 में पढ़ाई के दौरान शादी हो गई और आगे पढ़ाई में व्यवधान आ गया। दो साल बाद अपनी अधूरी इच्छा पति को बताई तो आगे पढ़ाई का रास्ता खुला। शादी के नौ साल बाद शुभी ने सीए बनकर अपना सपना पूरा किया। आज इनके परिवार को इन पर गर्व है। शुभी के पति सौरभ वर्मा की पनकी में फैक्ट्री है।
सीए साक्षी शुक्ला
साक्षी 12वीं तक साइंस की स्टूडेंट रहीं। अचानक चार्टर्ड एकाउंटेंट पेशे के ग्लैमर ने आकर्षित किया और सीए बनने की ठान ली। साढ़े चार साल की कठिन पढ़ाई के बाद इन्होंने आज सीए का तमगा हासिल कर लिया। कोर्स पूरा होने से पहले ही चेन्नई की सॉफ्टवेयर कंपनी ने इन्हें जॉब दे दी। इनकी ख्वाहिश है कारपोरेट सेक्टर का बड़ा नाम बनें। इनके पिता अनिल शुक्ल रिमझिम इस्पात में एकाउंटेंट हैं और मां विभा शुक्ला गृहिणी।
सीए रितिका जैन
रितिका भी 12वीं तक साइंस की स्टूडेंट रहीं। साक्षी की तरह ही इन्हें भी चार्टर्ड एकाउंटेंट बनना रास आया। दिन-रात मेहनत की और नतीजा सबके सामने हैं। रितिका ने कानपुर में ही एक इनवेस्टमेंट कंपनी ज्वाइन कर ली है। इनकी तमन्ना है कि इनवेस्टमेंट सेक्टर में विशेषज्ञता हासिल करें। इनके पिता निर्मल कुमार जैन व्यवसायी हैं।
सीए मेघना चावला
गोविंद नगर निवासी मेघना चावला ने 12वीं तक कामर्स की पढ़ाई की। इसके बाद ग्रेजुएशन और सीए की तैयारी एक साथ की। पांच साल तक अथक मेहनत के बाद आज इन्हें सीए बनने का गौरव हासिल हुआ। मेघना को भी कोर्स पूरा होने से पहले ही गुडगांव में बैंक ऑफ अमेरिका में जॉब मिल गई। मेघना फाइनेंशियल सेक्टर में अपना नाम रोशन करना चाहती हैं। पिता हरीश चावला प्राइवेट जॉब करते हैं।