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Kanpur News: आज बूंदाबांदी के आसार, किसानों की चिंता बढ़ी
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कानपुर। शनिवार को बादलों की आवाजाही के साथ बूंदाबांदी की संभावना जताई जा रही है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार दोपहर के बाद बादलों के आने से बूंदाबांदी हो सकती है जिससे शाम को मौसम सुहावना हो सकता है। यह स्थिति 15 अप्रैल तक बने रहने का अनुमान है। हवाओं की गति एक किलोमीटर प्रति घंटे से लेकर 12 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
वरिष्ठ मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि शनिवार को पारा 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। सुबह तेज धूप के कारण लो प्रेशर क्षेत्र बनता है जिससे नम हवाएं तेजी से उस ओर आकर्षित होती हैं और बादल बनकर बूंदाबांदी शुरू हो जाती है।
फारस की खाड़ी, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली हवाओं के साथ ही पश्चिमी विक्षोभ के कारण भूमध्य सागर और कैस्पियन सागर से नमी आती है। जब विभिन्न स्रोतों से नमी और हवाएं मिलती हैं तो गरज और चमक वाले बादल बनते हैं जिनसे बिजली गिरने और ओलावृष्टि की आशंका बढ़ जाती है। वर्तमान में इसी तरह का मौसम बना हुआ है।
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शुक्रवार को अधिकतम तापमान 35.8 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह हवा में 47 प्रतिशत नमी थी जो दोपहर तक कम होकर 24 प्रतिशत रह गई। हवाओं की गति आठ किलोमीटर प्रति घंटे की औसत गति के साथ चली।
ओलावृष्टि और बारिश से किसानों की फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। यह मौसमी उतार-चढ़ाव न केवल किसानों के लिए बल्कि आम जनजीवन के लिए भी परेशानी का सबब बना हुआ है।
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वरिष्ठ मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि शनिवार को पारा 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। सुबह तेज धूप के कारण लो प्रेशर क्षेत्र बनता है जिससे नम हवाएं तेजी से उस ओर आकर्षित होती हैं और बादल बनकर बूंदाबांदी शुरू हो जाती है।
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फारस की खाड़ी, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली हवाओं के साथ ही पश्चिमी विक्षोभ के कारण भूमध्य सागर और कैस्पियन सागर से नमी आती है। जब विभिन्न स्रोतों से नमी और हवाएं मिलती हैं तो गरज और चमक वाले बादल बनते हैं जिनसे बिजली गिरने और ओलावृष्टि की आशंका बढ़ जाती है। वर्तमान में इसी तरह का मौसम बना हुआ है।
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शुक्रवार को अधिकतम तापमान 35.8 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह हवा में 47 प्रतिशत नमी थी जो दोपहर तक कम होकर 24 प्रतिशत रह गई। हवाओं की गति आठ किलोमीटर प्रति घंटे की औसत गति के साथ चली।
ओलावृष्टि और बारिश से किसानों की फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। यह मौसमी उतार-चढ़ाव न केवल किसानों के लिए बल्कि आम जनजीवन के लिए भी परेशानी का सबब बना हुआ है।