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Chaitra Navratri 2024: अमृत और सर्वार्थ सिद्धि योग से नवरात्र की शुरुआत, शुभ मुहूर्त पर करें कलश स्थापना
Mon, 08 Apr 2024 10:36 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 08 Apr 2024 10:36 AM IST
सार
Chaitra Navratri 2024: चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा तिथि आठ अप्रैल को देर रात 11:50 बजे से शुरू होगी। ये तिथि अगले दिन यानी 09 अप्रैल को संध्याकाल 08:30 बजे समाप्त होगी। हिंदू धर्म में उदया तिथि मान है, इसलिए 09 अप्रैल को घट स्थापना होगी। इस बार नौ दिन के नवरात्र होंगे।
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Chaitra Navratri 2024
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चैत्र नवरात्र की शुरुआत मंगलवार से हो रही है। इस बार नौ दिन के नवरात्र होंगे। इस बार चैत्र नवरात्र पर वर्षों बाद दुर्लभ योग बन रहा है। नवरात्र की शुरुआत सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग में हो रही है। योग का निर्माण सुबह 07:32 बजे से हो रहा है। इससे पहले रेवती नक्षत्र रहेगा। अश्विनी नक्षत्र सुबह 07:32 बजे से अगले दिन 10 अप्रैल को सुबह 05.06 बजे तक रहेगा। इन योगों में मां दुर्गा की पूजा करने से साधक को अनंत फल की प्राप्ति होगी। 17 अप्रैल को श्री रामनवमी के उत्सव के साथ इसका समापन होगा।
पंडित पीएन द्विवेदी ने बताया कि इस साल चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा तिथि आठ अप्रैल को देर रात 11:50 बजे से शुरू होगी। ये तिथि अगले दिन यानी 09 अप्रैल को संध्याकाल 08:30 बजे समाप्त होगी। हिंदू धर्म में उदया तिथि मान है, इसलिए 09 अप्रैल को घट स्थापना होगी।
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पंडित पीएन द्विवेदी ने बताया कि इस साल चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा तिथि आठ अप्रैल को देर रात 11:50 बजे से शुरू होगी। ये तिथि अगले दिन यानी 09 अप्रैल को संध्याकाल 08:30 बजे समाप्त होगी। हिंदू धर्म में उदया तिथि मान है, इसलिए 09 अप्रैल को घट स्थापना होगी।
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घटस्थापना विधि
- सबसे पहले प्रतिपदा तिथि पर सुबह जल्दी स्नान करके पूजा का संकल्प लें।
- पूजा स्थल की सजावट करें और चौकी और कलश में जल भरकर रखें। इसके बाद कलश कलावा से लपेट दें।
- फिर कलश के ऊपर आम और अशोक के पत्ते रखें।
- इसके बाद नारियल को लाल कपड़े से लपेटकर कलश के ऊपर रख दें।
- धूप-दीप जलाकर मां दुर्गा का आह्वान करें और शास्त्रों में मां दुर्गा के पूजा-उपासना की बताई गई विधि से पूजा प्रारंभ करें।
- सबसे पहले प्रतिपदा तिथि पर सुबह जल्दी स्नान करके पूजा का संकल्प लें।
- पूजा स्थल की सजावट करें और चौकी और कलश में जल भरकर रखें। इसके बाद कलश कलावा से लपेट दें।
- फिर कलश के ऊपर आम और अशोक के पत्ते रखें।
- इसके बाद नारियल को लाल कपड़े से लपेटकर कलश के ऊपर रख दें।
- धूप-दीप जलाकर मां दुर्गा का आह्वान करें और शास्त्रों में मां दुर्गा के पूजा-उपासना की बताई गई विधि से पूजा प्रारंभ करें।
ऐसे करें पूजन
पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि नवरात्र के पहले दिन घर के मुख्य द्वार के दोनों तरफ स्वास्तिक बनाएं और दरवाजे पर आम के पत्ते का तोरण लगाएं, क्योंकि माता इस दिन भक्तों के घर में आती हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और आपके घर में निवास करती हैं। नवरात्र में माता की मूर्ति को लकड़ी की चौकी या आसन पर स्थापित करना चाहिए। जहां मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें वहां पहले स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। उसके बाद रोली और अक्षत से टीका कर माता की मूर्ति को स्थापित करें। उसके बाद विधिविधान से माता की पूजा करें।
पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि नवरात्र के पहले दिन घर के मुख्य द्वार के दोनों तरफ स्वास्तिक बनाएं और दरवाजे पर आम के पत्ते का तोरण लगाएं, क्योंकि माता इस दिन भक्तों के घर में आती हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और आपके घर में निवास करती हैं। नवरात्र में माता की मूर्ति को लकड़ी की चौकी या आसन पर स्थापित करना चाहिए। जहां मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें वहां पहले स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। उसके बाद रोली और अक्षत से टीका कर माता की मूर्ति को स्थापित करें। उसके बाद विधिविधान से माता की पूजा करें।