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Kanpur News: आईआईटी में खुला जनगणना डाटा अनुसंधान कार्य केंद्र, यूपी का बना पहला प्रौद्योगिकी संस्थान
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जनगणना डाटा अनुसंधान कार्य केंद्र का शुभारंभ करते अधिकारी।
- फोटो : संस्थान
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कानपुर। शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और छात्रों को जनगणना डाटा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आईआईटी के कंप्यूटर केंद्र में जनगणना डाटा अनुसंधान कार्य केंद्र की स्थापना की गई। इसके लिए आईआईटी में हुए कार्यक्रम में गृह मंत्रालय के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त के कार्यालय के साथ मंगलवार को एमओयू हुआ।
संस्थान के निदेशक प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल और भारत सरकार की जनगणना संचालन और नागरिक पंजीकरण की निदेशक आईएएस शीतल वर्मा ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे आईआईटी केंद्र की स्थापना करने वाला यूपी का पहला प्रौद्योगिकी संस्थान बन गया है।
केंद्र शोधकर्ताओं को डिजिटल प्रारूप में 1991 से 2011 तक प्रकाशित जनगणना तालिकाओं और सूक्ष्म-स्तरीय डेटा प्रदान करेगा। इससे भारत की जनसंख्या के विभिन्न सामाजिक-आर्थिक और जनसांख्यिकीय पहलुओं पर गहन विश्लेषण और अध्ययन हो सकेगा।
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प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने बताया कि केंद्र शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए एक अमूल्य संसाधन के रूप में काम करेगा। यह शोध और नीति विकास में सहायक होगा। शीतल वर्मा ने कहा कि केंद्र ने डेटा-केंद्रित शैक्षणिक अध्ययनों को सक्षम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इस दौरान डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑटोमेशन के डीन प्रोफेसर निशांत नायर, अनुसंधान और विकास के डीन प्रोफेसर तरुण गुप्ता, गणित एवं सांख्यिकी विभाग की प्रो. शुभ्रा शंकर धर, जनगणना संचालन निदेशालय के संयुक्त निदेशक एसएस शर्मा, उप निदेशक डॉ. रितुल कमल मौजूद रहे।
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संस्थान के निदेशक प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल और भारत सरकार की जनगणना संचालन और नागरिक पंजीकरण की निदेशक आईएएस शीतल वर्मा ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे आईआईटी केंद्र की स्थापना करने वाला यूपी का पहला प्रौद्योगिकी संस्थान बन गया है।
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केंद्र शोधकर्ताओं को डिजिटल प्रारूप में 1991 से 2011 तक प्रकाशित जनगणना तालिकाओं और सूक्ष्म-स्तरीय डेटा प्रदान करेगा। इससे भारत की जनसंख्या के विभिन्न सामाजिक-आर्थिक और जनसांख्यिकीय पहलुओं पर गहन विश्लेषण और अध्ययन हो सकेगा।
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प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने बताया कि केंद्र शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए एक अमूल्य संसाधन के रूप में काम करेगा। यह शोध और नीति विकास में सहायक होगा। शीतल वर्मा ने कहा कि केंद्र ने डेटा-केंद्रित शैक्षणिक अध्ययनों को सक्षम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इस दौरान डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑटोमेशन के डीन प्रोफेसर निशांत नायर, अनुसंधान और विकास के डीन प्रोफेसर तरुण गुप्ता, गणित एवं सांख्यिकी विभाग की प्रो. शुभ्रा शंकर धर, जनगणना संचालन निदेशालय के संयुक्त निदेशक एसएस शर्मा, उप निदेशक डॉ. रितुल कमल मौजूद रहे।