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सीबीएसई 12वीं की परीक्षा रद्द: मेधावी मायूस, बोले बेकार चली गई दो साल की मेहनत

Wed, 02 Jun 2021 12:17 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Wed, 02 Jun 2021 12:17 AM IST
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CBSE Class 12 exams canceled: meritorious despondent, says two years of hard work went in vain
सीबीएसई बोर्ड 12वीं की परीक्षाएं रद्द - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
सीबीएसई और आईएससी बोर्ड की 12वीं की परीक्षाओं को रद्द करने से मेधावी मायूस हो गए हैं। मेधावियों का कहना है कि दो साल की मेहनत बेकार चली गई। औसत अंकों के आधार पर रिजल्ट जारी होने पर उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिला लेने में परेशानी सामने आएगी क्योंकि संस्थान तो मेरिट के हिसाब से ही प्रवेश देते हैं। वहीं अभिभावक सरकार के इस फैसले को बच्चों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से सही बता रहे हैं। शिक्षकों-प्रधानाचार्यों ने फैसले पर मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है। 
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जानिए क्या बोले शिक्षक

सरकार का निर्णय काफी कठोर है। यह छात्रों के लिए अहितकारी होगा। छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रोत्साहित करना मुश्किल भरा रहेगा। पढ़ाई और परीक्षाओं को लेकर छात्रों के मन में अब असमंजस की स्थिति हमेशा रहेगी।
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अमित कुमार निरंजन, कॉमर्स विभागाध्यक्ष, जीडी गोयनका स्कूल

सुरक्षा की दृष्टि से सरकार ने बेहतर निर्णय लिया है, लेकिन यह भी सच है कि परीक्षाएं ही छात्रों का सही आकलन करती हैं। मेधावी छात्र निराश हैं। लेकिन उनको भी समझना होगा कि फैसला उन्हीं के हित के लिए किया गया है।
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अर्चना निगम, प्रिंसिपल, डीपीएस कल्याणपुर

सरकार को कोई न कोई विकल्प अवश्य निकालना चाहिए था। निश्चित ही यह कठिन समय चल रहा है लेकिन यह छात्रों के भविष्य का सवाल है। बिना परीक्षा दिए अगली कक्षा में प्रमोट करना उनके मनोबल को कमजोर करेगा।
अंजू सेठ, शिक्षिका, एचएएल विद्यालय, चकेरी

परिस्थितियों को देखते हुए सरकार का फैसला एकदम सही है। छात्र निराश हैं। उनकी पूरी तैयारी थी। सभी छात्र परीक्षा देना भी चाहते हैं। लेकिन जब सब सुरक्षित रहेंगे, तभी आने वाली परीक्षाओं के लिए तैयार हो सकेंगे।
रुचि सेठ, प्रिंसिपल, एलेन हाउस स्कूल

क्या बोले छात्र

परीक्षाओं का निरस्त होना दुखद है। यह उन छात्रों के लिए परेशानी भरा है जो देश के अच्छे कॉलेज या विदेश में जाकर पढ़ाई करना चाहते थे। दो साल की मेहनत पर पानी फिर गया। 
आशी तोमर, यूही पब्लिक स्कूल, सनिगवां 

दो साल की पूरी मेहनत बेकार चली गई। इस साल बोर्ड की परीक्षा देनी है यह सोच कर केवल पढ़ाई पर फोकस किया। दिन-रात केवल अच्छे अंक आने पर ही जोर देता रहा और आखिर में परीक्षाएं रद्द होना निराशाजनक रहा।
विनायक तिवारी, डीपीएस कल्याणपुर

हम जानते हैं कि सरकार ने छात्रों की सुरक्षा के मद्देनजर ही यह फैसला लिया है। लेकिन अगर परीक्षाएं होतीं तो अलग बात होती, क्योंकि खुद की मेहनत से पाए गए अंकों की बात ही अलग होती है। 
शिवांशी पांडे, जय  नारायण विद्या मंदिर
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