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बांदा: जो दस्यु ददुआ और ठोकिया करते थे वो अब पुलिस कर रही, इंद्रकांत हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग

Sun, 20 Sep 2020 07:12 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा Published by: शिखा पांडेय Updated Sun, 20 Sep 2020 07:12 PM IST
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CBI investigation demand for Indrakant murder
क्रशर व्यवसाय, रामेंद्र गौतम - फोटो : अमर उजाला
‘जो काम दस्यु सरगना ददुआ और ठोकिया करते थे, वह अब कुछ पुलिस अधिकारी और कर्मचारी कर रहे हैं।’ इस रवैये से यहां जीना दूभर हो जाएगा। क्रशर हो या कोई अन्य कारोबार कैसे चल पाएगा? गुस्से से भरा यह गुबार चित्रकूट क्रशर एसोसिएशन अध्यक्ष रामेंद्र गौतम के मुख से फूटा।
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उन्होंने कबरई क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी की मौत की जांच सीबीआई से कराने की मांग की। चित्रकूटधाम मंडल में लंबे अर्से से पुलिस और कई अन्य विभागों की कार्रवाइयों का सामना कर रहे क्रशर व्यवसायियों का कबरई के इंद्रकांत त्रिपाठी की मौत के बाद धैर्य टूटता नजर आ रहा है।
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इनमें गम और गुस्सा है। साथी की मौत के बाद व्यवसाय में पुलिस और अन्य विभागों की उगाही पर दम से बोल रहे हैं। एसोसिएशन अध्यक्ष रामेंद्र गौतम ने कहा कि जो काम दस्यु सरगना ददुआ और ठोकिया करते थे वो अब पुलिस के कुछ अफसर करने लगे हैं।
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ऐसे में व्यापारी और आम आदमी कैसे सुरक्षित रहेगा? उन्होंने इंद्रकांत की मौत की जांच सीबीआई से कराने की मांग की। उन्होंने चित्रकूटधाम मंडल में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा तमाम क्रशरों को सील करने और उन पर करोड़ों रुपये जुर्माना लगाने को अन्यायपूर्ण बताया।

कहा कि जुर्माना लॉकडाउन के पहले का भराया जा रहा है। नोटिस आने के बाद सभी मानक पूरे कर लिए गए थे। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन इस बारे में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अध्यक्ष से मिलकर बात करेगा। वरना न्यायालय की शरण लेंगे।

उगाही बंद न हुई तो तबाह हो जाएगा क्रशर व्यवसाय
कबरई (महोबा) के क्रशर व्यवसायी रामकिशोर सिंह का कहना है कि इंद्रकांत त्रिपाठी की मौत का शीघ्र खुलासा होना चाहिए। दोषियों को कड़ा दंड मिलना चाहिए चाहे वो जो भी हों। उन्होंने कहा कि क्रशर व्यवसाय से पुलिस का अनावश्यक उत्पीड़न और वसूली पर सख्ती से रोक लगना जरूरी है, वरना यह व्यवसाय तबाह हो जाएगा।

हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सील और जुर्माना कार्रवाई अपने ही नियमों को ताक पर रखकर की है। क्रशर व्यवसाय से शासन को बड़े पैमाने पर राजस्व मिलता है। जिन क्रशर में कोई कमी है, बोर्ड को नोटिस आदि देकर उसे सुधारने का मौका देना चाहिए।
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