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तीन लाख की रिश्वत लेने का मामला: सहायक आयुक्त से सीबीआई ने की कई घंटे पूछताछ
Wed, 18 May 2022 07:59 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 18 May 2022 07:59 PM IST
सार
पीएफ इंस्पेक्टर ने केवल चार साल में ही करोड़ों की संपत्ति बना ली। एक दूसरे पीएफ इंस्पेक्टर के कार्यक्षेत्र के बारे में भी सवाल पूछे।
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सीबीआई
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
पीएफ इंस्पेक्टर रिश्वतकांड की जांच कर रही सीबीआई ने बुधवार को सहायक आयुक्त भविष्य निधि अक्षय भार्गव को लखनऊ में बुलाकर कई घंटों तक पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार इस दौरान कई ऐसे सवाल पूछे गए जिनमें सहायक आयुक्त असहज दिखे। अक्षय भार्गव ने ही मामले में नोटिस जारी की थी, जिसके बाद पीएफ इंस्पेक्टर रिश्वत लेने पहुंचा था।
25 अप्रैल को सीबीआई की टीम ने सर्वोदय नगर स्थित क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त कार्यालय में छापा मारा था। इस दौरान पीएफ इंस्पेक्टर अमित श्रीवास्तव को तीन लाख रुपये की रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया था। सूत्रों ने बताया कि चौबेपुर स्थित स्कूल संचालक से पीएफ की सेवन ए कार्रवाई को रफा-दफा करने के लिए पीएफ इंस्पेक्टर ने पहले चार लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी, बाद में तीन लाख में सौदा तय हुआ था।
दरअसल, लंबे समय तक अपने कर्मचारियों का पीएफ अंशदान न जमा किए जाने पर विभाग की ओर से सेवन ए की कार्रवाई की जाती है। इस मामले में सहायक आयुक्त भविष्य निधि अक्षय भार्गव ने नोटिस जारी किया था। इसके बाद ही पीएफ इंस्पेक्टर ने भौतिक निरीक्षण किया था।
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25 अप्रैल को सीबीआई की टीम ने सर्वोदय नगर स्थित क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त कार्यालय में छापा मारा था। इस दौरान पीएफ इंस्पेक्टर अमित श्रीवास्तव को तीन लाख रुपये की रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया था। सूत्रों ने बताया कि चौबेपुर स्थित स्कूल संचालक से पीएफ की सेवन ए कार्रवाई को रफा-दफा करने के लिए पीएफ इंस्पेक्टर ने पहले चार लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी, बाद में तीन लाख में सौदा तय हुआ था।
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दरअसल, लंबे समय तक अपने कर्मचारियों का पीएफ अंशदान न जमा किए जाने पर विभाग की ओर से सेवन ए की कार्रवाई की जाती है। इस मामले में सहायक आयुक्त भविष्य निधि अक्षय भार्गव ने नोटिस जारी किया था। इसके बाद ही पीएफ इंस्पेक्टर ने भौतिक निरीक्षण किया था।
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पीएफ इंस्पेक्टर की निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई पर निर्णय होता है। मंगलवार को सीबीआई ने सहायक आयुक्त से लखनऊ में पहले से ही तैयार सवालों की लिस्ट सामने रखने के साथ ही पूछताछ की। यह पूछा कि कार्यक्षेत्र बदले जाने के बाद भी पीएफ इंस्पेक्टर चौबेपुर क्षेत्र के मामले कैसे देख रहा था।
15 दिन पहले ही पीएफ इंस्पेक्टर का कार्यक्षेत्र बदल दिया गया था। छापे के दिन बाद में उसकी आईडी क्यों बदली। ऐसे में किस-किस अफसर की भूमिका है। सूत्रों ने बताया कि पीएफ इंस्पेक्टर ने केवल चार साल में ही करोड़ों की संपत्ति बना ली। एक दूसरे पीएफ इंस्पेक्टर के कार्यक्षेत्र के बारे में भी सवाल पूछे।
15 दिन पहले ही पीएफ इंस्पेक्टर का कार्यक्षेत्र बदल दिया गया था। छापे के दिन बाद में उसकी आईडी क्यों बदली। ऐसे में किस-किस अफसर की भूमिका है। सूत्रों ने बताया कि पीएफ इंस्पेक्टर ने केवल चार साल में ही करोड़ों की संपत्ति बना ली। एक दूसरे पीएफ इंस्पेक्टर के कार्यक्षेत्र के बारे में भी सवाल पूछे।