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चीनी सरहदों के लिए कानपुर में फिर बनेंगी तोपें, आयुध निर्माणी ने अत्याधुनिक गन कैरिज सिस्टम बनाया
Fri, 26 Jun 2020 03:17 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 26 Jun 2020 03:17 PM IST
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लाइट फील्ड गन
- फोटो : amar ujala
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चीन के साथ चल रहे तनाव के बीच आयुध निर्माणी कानपुर (ओएफसी) से अच्छी खबर आई है। चीनी सीमाओं पर तैनात होने वाली लाइट फील्ड गन (एलएफजी) का अब निर्माणी में परीक्षण (फायरिंग) किया जा सकेगा। ऐसे में बेहद कम समय में ही सेना को इस तरह की तोप उपलब्ध कराई जा सकेगी।
इस तोप को ऊंचे पहाड़ों पर सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है। हल्की होने के कारण सैन्य हवाई जहाज से इसे कहीं पर भी आसानी ले जाया जा सकता है। पिछले साल अप्रैल में एक दुघर्टना के बाद निर्माणी में एलएफजी की फायरिंग का परीक्षण रोक दिया गया था।
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इस तोप को ऊंचे पहाड़ों पर सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है। हल्की होने के कारण सैन्य हवाई जहाज से इसे कहीं पर भी आसानी ले जाया जा सकता है। पिछले साल अप्रैल में एक दुघर्टना के बाद निर्माणी में एलएफजी की फायरिंग का परीक्षण रोक दिया गया था।
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परीक्षण के लिए बैरलों को जबलपुर भेजा जाता था। इस प्रक्रिया में लंबा समय लगता था। अब आयुध निर्माणी कानपुर के विकास केंद्र ने अत्याधुनिक नया गन कैरिज सिस्टम तैयार किया है जिसके बाद यहीं पर फिर से बैरलों का परीक्षण किया जाने लगा है।
130 एमएम कैलिबर वाली गन की मारक क्षमता 18-25 किलोमीटर तक होती है। इसका इस्तेमाल माइनस पांच डिग्री से लेकर 73 डिग्री तापमान पर किया जा सकता है। इसका भार 716 किलो है। एक मिनट में चार राउंड फायर किया जा सकता है।
क्या होता है गन कैरिज सिस्टम
किसी भी तोप निर्माण में बैरल की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। निर्माणी में बनने वाली बैरलों का परीक्षण गन कैरिज पर किया जाता है। इस दौरान उसके दगने, दबाव पड़ने और खिंचने के बाद की स्थिति का परीक्षण होता है। यहां से परीक्षण सफल होने के बाद गोलों को लगाकर कानपुर प्रूफ रेंज में परीक्षण किया जाता है।
130 एमएम कैलिबर वाली गन की मारक क्षमता 18-25 किलोमीटर तक होती है। इसका इस्तेमाल माइनस पांच डिग्री से लेकर 73 डिग्री तापमान पर किया जा सकता है। इसका भार 716 किलो है। एक मिनट में चार राउंड फायर किया जा सकता है।
क्या होता है गन कैरिज सिस्टम
किसी भी तोप निर्माण में बैरल की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। निर्माणी में बनने वाली बैरलों का परीक्षण गन कैरिज पर किया जाता है। इस दौरान उसके दगने, दबाव पड़ने और खिंचने के बाद की स्थिति का परीक्षण होता है। यहां से परीक्षण सफल होने के बाद गोलों को लगाकर कानपुर प्रूफ रेंज में परीक्षण किया जाता है।