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खास खबर: पाकिस्तान से आए और बसा दी नेत्रदानियों की बस्ती, 214 लोग 428 की जिंदगी में कर चुके हैं उजाला

Tue, 06 Aug 2024 05:11 PM IST
हिमांशु अवस्थी मनीष वर्मा, अमर उजाला, कानपुर
मनीष वर्मा, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Tue, 06 Aug 2024 05:11 PM IST
सार

Kanpur News: समाजसेवी मदन लाल भाटिया की प्रेरणा से कृष्णनगर के लोग नेत्रदान कर रहे हैं। यहां के 214 लोग अब तक 428 की जिंदगी में उजाला कर चुके हैं। इनमें पाकिस्तान की महिला भी शामिल है।
 

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Came from Pakistan and established colony of eye donors, 214 people brought light into the lives of 428 people
सांकेतिक - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बंटवारे का दर्द लेकर पाकिस्तान से कानपुर आए लोगों ने यहां नेत्रदानियों की पूरी बस्ती ही बसा दी। कृष्णानगर में रहने वाले मदन लाल भाटिया की प्रेरणा से 18 साल में 214 लोग नेत्रदान कर चुके हैं। इन नेत्रदानियों से करीब 428 लोगों को रोशनी मिल चुकी है। पाकिस्तान के कराची की महिला की जिंदगी में भी 10 साल पहले उजाला किया गया।

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मदन लाल भाटिया बताते हैं कि बंटवारे के वक्त 1947 में पाकिस्तान के कंधार बार्डर स्थित डेरा इस्माइल खां से उनके साथ करीब 350 परिवार भारत आए थे।  कृष्णानगर में सभी रहते हैं। सेवानिवृत्त एयरफोर्स कर्मी कुंदन लाल भाटिया के नेतृत्व में वर्ष 1987 में श्री नागर जी सेवा दल बनाया गया। उस वक्त संस्था से 50 लोग जुड़े थे। कुंदन लाल की प्रेरणा से 2006 में परचून दुकानदार अमित की मां सीता भाटिया का पहला नेत्रदान कराया गया।
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उस वक्त डॉ. रहमानी ने नेत्रदान कराया। इसके सफल होने के बाद कृष्णानगर के लोग अपनों के निधन के बाद उनके कार्निया दान करने के लिए आगे आने लगे। सीता के पति बलदेव राज भाटिया का निधन 2014 में होने के बाद उनका भी नेत्रदान किया गया। कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके रिश्तेदारों ने बाहर से कृष्णानगर आकर उनसे संपर्क कर कार्निया दान किए। इसमें मदन लाल के सहयोगी सुदेश कुमार भाटिया अंतिम संस्कार, गुलशन कुमार अस्थियां प्रवाहित और मनीष कुमार श्मशान घाट की व्यवस्था देखते हैं।

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सबसे ज्यादा नेत्रदान कृष्णनगर से
मदन लाल बताते हैं कि पूर्व में डॉ. रहमानी कार्निया दान कराते थे। उनके निधन के बाद मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग की डॉ. शालिनी मोहन करा रही हैं।

पोस्टमार्टम हाउस में भी किया कार्निया सुरक्षित
छह साल पहले लाल बंगला के एक गोदाम में आग लगने से पूरे परिवार का निधन हो गया था। दो लोगों का कार्निया सुरक्षित था। तब तत्कालीन जिलाधिकारी सुरेंद्र कुमार की संस्तुति पर उनका पोस्टमार्टम हाउस में जाकर कार्निया सुरक्षित किया गया।

दृष्टि बाधित छात्रा को दी रोशनी
बचपन से दृष्टि बाधित केंद्रीय विद्यालय छावनी की कक्षा नौ की छात्रा याशिका तिवारी के जीवन में उजाला किया। छात्रा यशोदानगर की रहने वाली है और उसके पिता राजेश प्राइवेट नौकरी करते हैं। 2 फरवरी 2019 को डॉ. रहमानी ने उसकी आंख प्रत्यारोपित की। अब हरिद्वार व ऋषिकेश में भी लायंस क्लब के सहयोग से नेत्रदान करा रहे हैं। कश्मीर सहित अन्य शहरों के लोगों के जीवन में भी उजाला किया है।

कृष्णानगर से इन्होंने किया नेत्रदान
स्वर्गीय शकुंतला रानी अरोड़ा, गुलशन कुमार भाटिया, सुभाष चंद्र भाटिया, पुष्पा भाटिया, निर्मला रानी भाटिया, श्याम लाल भाटिया, अंजू भाटिया, सरोज भाटिया , गोपाल दास, कृष्ण कुमार भाटिया, मोहनलाल भाटिया, राधाबाई भाटिया, हेमराज भाटिया, संजय कुमार, प्रेम कुमारी भाटिया, प्रेम भाटिया आदि।

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