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अमेरिका से लौटने के बाद एेसे खड़ी की 15 हजार करोड़ की कंपनी

Sun, 28 Jan 2018 10:29 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sun, 28 Jan 2018 10:29 PM IST
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BVR Mohan Reddy is an Indian business executive
बीवीआर मोहन रेड्डी
स्टार्टअप मास्टर क्लास के दूसरे दिन रविवार को नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज कंपनीज (नैसकॉम) के पूर्व चेयरमैन और साइंट कंपनी के चेयरमैन बीवीआर मोहन रेड्डी ने छात्रों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि अगर व्यापार में अलग मुकाम बनाना है, तो कुछ जोखिम लेना ही पड़ेगा, लेकिन जीवन में मूल्यों से समझौता से नहीं करना चाहिए, वर्ना कभी सफल नहीं होंगे। 


 

अलग मुकाम बनाने के लिए लेना पड़ेगा जोखिम

BVR Mohan Reddy is an Indian business executive
डेमो पिक
बीवीआर मोहन रेड्डी ने कहा कि जिस क्षेत्र में रुचि हो, उसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। व्यापार में जोखिम तो लेना ही पड़ता है, लेकिन उसका आकलन पहले ही कर लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यापार में सबसे अहम ग्राहक होता है। किसी उत्पाद या सेवा के बदले ग्राहक से मिले धन से ही कंपनी के अधिकारियों-कर्मचारियों को वेतन मिलता है। लिहाजा, ग्राहक की संतुष्टि सर्वोपरि है। उन्होंने व्यापार को सफल बनाने के लिए कई टिप्स भी दिए।  


 

अमेरिका से लौटकर की नौकरी

BVR Mohan Reddy is an Indian business executive
छात्राें के साथ बीवीआर मोहन रेड्डी
बीवीआर मोहन रेड्डी ने बताया कि आईआईटी कानपुर से इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग करने के बाद वे 1973 में अमेरिका चले गए थे। वहां से एमएससी की पढ़ाई की। उस वक्त कई बड़ी कंपनियों ने उन्हें जॉब ऑफर दिया, लेकिन वह देश लौट आए। यहां उन्होंने एचसीएल कंपनी में कई पदों पर काम किया। इसके बाद 1982 में कैट कैम नामक कंपनी में बतौर सीईओ नियुक्त हो गए। इस कंपनी में करीब दस साल नौकरी करने के बाद खुद की कंपनी साइंट शुरू की।


 
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खड़ी कर दी 15 हजार करोड़ की कंपनी

BVR Mohan Reddy is an Indian business executive
डेमो पिक
रेड्डी ने बताया कि जब कंपनी शुरू करनी थी तो उनके पास पैसे नहीं थे। किसी तरह 25 लाख रुपये इकट्ठा किए और आईडीबीआई बैंक से 97 लाख रुपये का लोन दिया। कुछ दोस्तों से भी मदद ली। कुल एक करोड़ 22 लाख रुपये इकट्ठा हो गए। कंपनी शुरू करने के 18 महीने के अंदर लोगों को इसमें फायदा दिखने लगा। अब इसमें करीब 300 करोड़ रुपये बाहरी कंपनियों का निवेश है। अब कंपनी की हैसियत 15 हजार करोड़ रुपये की बन चुकी है। 
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