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कारोबारी उदय देसाई, बेटा सुजय और विक्रम कोठारी गिरफ्तार, एसएफआईओ ने की कार्रवाई
Fri, 20 Mar 2020 01:12 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Fri, 20 Mar 2020 01:12 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) के अफसरों ने 6500 करोड़ रुपये के बैंकिंग फ्रॉड मामले में फ्रॉस्ट इंटरनेशनल के मालिक उदय देसाई, उसके बेटे सुजय और रोटोमैक ग्रुप के मालिक विक्रम कोठारी को गिरफ्तार कर लिया है। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने तीनों को गुरुवार को एसएफआईओ की हिरासत में भेज दिया है।
कारपोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाला एसएफआईओ फ्रॉस्ट इंटरनेशनल लिमिटेड और रोटोमैक ग्रुप ऑफ कंपनीज के खिलाफ जांच कर रहा है। सूत्रों ने बताया कि उदय देसाई और उनके बेटे सुजय को पूछताछ के लिए मुंबई तलब किया गया था।
जवाब से संतुष्ट न होने पर दोनों को मुंबई में ही, जबकि विक्रम कोठारी को कानपुर से गिरफ्तार किया गया। फ्रास्ट इंटरनेशनल पर विभिन्न सरकारी बैंकों की 3595 करोड़ से ज्यादा और रोटोमैक ग्रुप पर 14 सरकारी बैंकों की 4000 करोड़ की देनदारी है।
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सूत्रों के मुताबिक, जांच में पता चला कि कंपनियां मर्चेंटिंग ट्रेड स्कीम का दुरुपयोग कर पैसों के राउंड ट्रिपिंग में शामिल थीं। स्कीम में आवश्यक बैंक धनराशि हासिल करने के लिए उन्होंने अपने वित्तीय विवरणों में फेरबदल किया और कई विदेशी संस्थाओं को काल्पनिक डेबिट नोट जारी किए, जो कि उनके नियंत्रण में थी। इस तरह रोटोमैक ग्रुप ने 3000 करोड़ और फ्रॉस्ट इंटरनेशनल लिमिटेड ने 3500 करोड़ की धोखाधड़ी की।
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कारपोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाला एसएफआईओ फ्रॉस्ट इंटरनेशनल लिमिटेड और रोटोमैक ग्रुप ऑफ कंपनीज के खिलाफ जांच कर रहा है। सूत्रों ने बताया कि उदय देसाई और उनके बेटे सुजय को पूछताछ के लिए मुंबई तलब किया गया था।
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जवाब से संतुष्ट न होने पर दोनों को मुंबई में ही, जबकि विक्रम कोठारी को कानपुर से गिरफ्तार किया गया। फ्रास्ट इंटरनेशनल पर विभिन्न सरकारी बैंकों की 3595 करोड़ से ज्यादा और रोटोमैक ग्रुप पर 14 सरकारी बैंकों की 4000 करोड़ की देनदारी है।
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सूत्रों के मुताबिक, जांच में पता चला कि कंपनियां मर्चेंटिंग ट्रेड स्कीम का दुरुपयोग कर पैसों के राउंड ट्रिपिंग में शामिल थीं। स्कीम में आवश्यक बैंक धनराशि हासिल करने के लिए उन्होंने अपने वित्तीय विवरणों में फेरबदल किया और कई विदेशी संस्थाओं को काल्पनिक डेबिट नोट जारी किए, जो कि उनके नियंत्रण में थी। इस तरह रोटोमैक ग्रुप ने 3000 करोड़ और फ्रॉस्ट इंटरनेशनल लिमिटेड ने 3500 करोड़ की धोखाधड़ी की।