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Kanpur News: हैलट में बर्न वार्ड चालू नहीं, रोगियों की जान खतरे में
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कानपुर। हैलट का बर्न वार्ड अगर चालू हो गया होता तो मेस्टन रोड विस्फोट में झुलसे गंभीर रोगियों को केजीएमयू लखनऊ रेफर नहीं करना पड़ता। इसके अलावा दीपावली का त्योहार भी नजदीक है। अगर कोई हादसा हुआ तो रोगी को लखनऊ भेजना पड़ेगा। हैलट में दो प्लास्टिक सर्जन हैं, फिर बर्न रोगियों को इलाज नहीं मिल पा रहा। हैलट में बर्न वार्ड का कार्य वर्ष 2021-22 में पूरा होना था। भवन बन गया लेकिन छोटी-छोटी कमियों की वजह से अभी इसे हैंडओवर नहीं किया गया है। इससे बर्न रोगियों को इलाज नहीं मिल पा रहा।
हैलट में 17 जिलों के बर्न रोगी इलाज कराने आते हैं। उन्हें रेफर कर दिया जाता है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्रबंधन कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को पांच बार नोटिस दे चुका है। प्रमुख सचिव और डीएम सभी निरीक्षण करके कार्यदायी संस्था को चेतावनी भी दे चुके हैं। लेकिन भवन के फिनिशिंग का काम पूरा नहीं हुआ। इससे भवन का हैंड ओवर का काम अटका हुआ है। कॉलेज प्रबंधन ने शासन को भी इस संबंध में पत्र लिखे हैं। बर्न वार्ड में महिला और पुरुष वार्ड अलग होंगे। इसके साथ ही बर्न आईसीयू की भी व्यवस्था रहेगी। इसके अलावा प्लास्टिक सर्जरी विभाग और त्वचा बैंक शुरू नहीं हो पा रहा है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि बर्न वार्ड के लिए उपकरण और स्टाफ भी चाहिए। शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया। लेकिन अभी स्टाफ नहीं मिला है।
उर्सला आठ बेड हमेशा रहते फुल
-उर्सला में आठ बेड का बर्न वार्ड बना हुआ है। यह कानपुर मंडल भर के रोगियों को संभालता है। अगर कोई गंभीर रोगी आता है तो उसे लखनऊ के किसी चिकित्सा संस्थान में रेफर करना पड़ता है। हल्के-फुल्के जले रोगियों को इमरजेंसी के वार्ड के अलग कक्ष में रख दिया जाता है। उर्सला में कोई प्लास्टिक सर्जन नहीं है। इससे जनरल सर्जन बर्न रोगियों का इलाज करते हैं।
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हैलट में 17 जिलों के बर्न रोगी इलाज कराने आते हैं। उन्हें रेफर कर दिया जाता है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्रबंधन कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को पांच बार नोटिस दे चुका है। प्रमुख सचिव और डीएम सभी निरीक्षण करके कार्यदायी संस्था को चेतावनी भी दे चुके हैं। लेकिन भवन के फिनिशिंग का काम पूरा नहीं हुआ। इससे भवन का हैंड ओवर का काम अटका हुआ है। कॉलेज प्रबंधन ने शासन को भी इस संबंध में पत्र लिखे हैं। बर्न वार्ड में महिला और पुरुष वार्ड अलग होंगे। इसके साथ ही बर्न आईसीयू की भी व्यवस्था रहेगी। इसके अलावा प्लास्टिक सर्जरी विभाग और त्वचा बैंक शुरू नहीं हो पा रहा है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि बर्न वार्ड के लिए उपकरण और स्टाफ भी चाहिए। शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया। लेकिन अभी स्टाफ नहीं मिला है।
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उर्सला आठ बेड हमेशा रहते फुल
-उर्सला में आठ बेड का बर्न वार्ड बना हुआ है। यह कानपुर मंडल भर के रोगियों को संभालता है। अगर कोई गंभीर रोगी आता है तो उसे लखनऊ के किसी चिकित्सा संस्थान में रेफर करना पड़ता है। हल्के-फुल्के जले रोगियों को इमरजेंसी के वार्ड के अलग कक्ष में रख दिया जाता है। उर्सला में कोई प्लास्टिक सर्जन नहीं है। इससे जनरल सर्जन बर्न रोगियों का इलाज करते हैं।
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