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कोरोना संकट: रियल एस्टेट सेक्टर के मन में लड्डू फूटा, कम दरों पर आवासीय लोन को बड़े अवसर के रूप में देख रहे बिल्डर
Sat, 16 May 2020 02:53 PM IST
शिखा पांडेय
आदर्श त्रिपाठी, अमर उजाला, कानपुर
आदर्श त्रिपाठी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 16 May 2020 02:53 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : गूगल
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कोरोना संकट का यह दौर रियल एस्टेट सेक्टर के लिए संजीवनी साबित होने वाला है। शहर के बिल्डरों ने इसकी खास वजह भी बताई है। उनके मुताबिक इस महामारी के कारण लोगों के बीच सामाजिक दूरी रखने की चाहत बढ़ी है। इसके चलते लोग शहर के पुराने, घने बसे क्षेत्रों और गलियों से निकलकर अपार्टमेंट या बाहरी क्षेत्रों में सुरक्षात्मक रिहाइश का विकल्प अमल में लाना चाहते हैं।
इससे बीते दो-तीन वर्षों से मंदी की चपेट में चल रहे रियल एस्टेट सेक्टर में नई उम्मीदें जगी हैं। बिल्डरों के मुताबिक सरकारी प्रोत्साहन पैकेज और बैंकों की ओर से कम दरों पर सहज आवासीय लोन दिए जाने के कारण भी लोग फ्लैट या प्लॉट खरीदेंगे। हालांकि, इस सेक्टर को सुधरने में 6 माह से एक साल का समय लग सकता है।
बिल्डर बोले
कंफरडेशन ऑफ रीयल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) कानपुर चैप्टर के अध्यक्ष कमल चांडक ने कहा कि इस महामारी ने दुनिया भर के लोगों की जीवन शैली व सोच में क्रांतिकारी बदलाव लाने की भूमिका तैयार कर दी है। लॉकडाउन के कारण शहर के घने इलाकों व गलियों में रहने वालों ने तमाम तरह की परेशानियां उठाई हैं। अब बड़ी संख्या में ऐसे लोग अपार्टमेंट या खुली जगह पर बने आवासीय क्षेत्रों में जाने की इच्छा रखते हैं। यही बात रियल एस्टेट सेक्टर के लिए लाभकारी साबित होगी। घने बसे क्षेत्रों में भी निर्माण से जुड़ी गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है। 2020 के अंत तक यह सेक्टर सुधार की राह पर होगा।
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इससे बीते दो-तीन वर्षों से मंदी की चपेट में चल रहे रियल एस्टेट सेक्टर में नई उम्मीदें जगी हैं। बिल्डरों के मुताबिक सरकारी प्रोत्साहन पैकेज और बैंकों की ओर से कम दरों पर सहज आवासीय लोन दिए जाने के कारण भी लोग फ्लैट या प्लॉट खरीदेंगे। हालांकि, इस सेक्टर को सुधरने में 6 माह से एक साल का समय लग सकता है।
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बिल्डर बोले
कंफरडेशन ऑफ रीयल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) कानपुर चैप्टर के अध्यक्ष कमल चांडक ने कहा कि इस महामारी ने दुनिया भर के लोगों की जीवन शैली व सोच में क्रांतिकारी बदलाव लाने की भूमिका तैयार कर दी है। लॉकडाउन के कारण शहर के घने इलाकों व गलियों में रहने वालों ने तमाम तरह की परेशानियां उठाई हैं। अब बड़ी संख्या में ऐसे लोग अपार्टमेंट या खुली जगह पर बने आवासीय क्षेत्रों में जाने की इच्छा रखते हैं। यही बात रियल एस्टेट सेक्टर के लिए लाभकारी साबित होगी। घने बसे क्षेत्रों में भी निर्माण से जुड़ी गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है। 2020 के अंत तक यह सेक्टर सुधार की राह पर होगा।
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कानपुर प्रमोटर्स एंड बिल्डर्स एसोसिएशन के सचिव अनूप अस्थाना ने कहा कि रेरा की ओर से रियल एस्टेट सेक्टर में निर्माण पूरा करने व पजेशन के लिए 6 माह का अतिरिक्त समय दिया गया है। सरकार के आर्थिक पैकेज का भी लाभ मिलेगा। कोरोना संकट से लोगों को प्रॉपर्टी के लिहाज से तमाम विकल्प मिलेंगे। आने वाले समय में संपत्ति बेचने और खरीदने वालाें की संख्या तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में इस सेक्टर में सुधार की उम्मीद है। शहर में हर वर्ग की आर्थिक क्षमता व जरूरत के लिहाज से संपत्तियों की उपलब्धता है। भविष्य में इसमें और बढ़ोत्तरी होगी। हालांकि कीमतों में कमी आने की संभावना निराधार है।
डॉल्फिन डेवलपर्स के निदेशक विश्वनाथ गुप्ता ने बताया कि रियल एस्टेट सबसे बाद की चीज है। जब लोगों की आम जरूरतें पूरी होती हैं, तब वह संपत्ति की ओर ध्यान देते हैं। सरकार के भारी भरकम आर्थिक पैकेज का असर रियल एस्टेट सेक्टर पर भी दिखेगा। वैसे तो परोक्ष रूप से इस सेक्टर को कुछ नहीं मिला है। लेकिन जिस भी सेक्टर को पैकेज का लाभ मिलेगा, उसकी तरक्की होगी। आर्थिक संपन्नता व व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ेंगी तो इसका असर रियल एस्टेट सेक्टर पर खुद-ब-खुद दिखने लगेगा।
शहर में खाली पड़े हैं 10 हजार फ्लैट
बीते तीन वर्षों की मंदी के कारण शहर में बनकर तैयार करीब 10 हजार से अधिक फ्लैट खाली पड़े हैं। इनमें से 5 हजार से अधिक फ्लैट अकेले केडीए के हैं। इसके अलावा आवास विकास परिषद के लगभग 280 फ्लैट बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। शहर के बड़े बिल्डरों के प्रोजेक्ट में भी फ्लैट खाली पड़े हैं। हालांकि मंदी के कारण निर्माण में खासी कमी आई है।
डॉल्फिन डेवलपर्स के निदेशक विश्वनाथ गुप्ता ने बताया कि रियल एस्टेट सबसे बाद की चीज है। जब लोगों की आम जरूरतें पूरी होती हैं, तब वह संपत्ति की ओर ध्यान देते हैं। सरकार के भारी भरकम आर्थिक पैकेज का असर रियल एस्टेट सेक्टर पर भी दिखेगा। वैसे तो परोक्ष रूप से इस सेक्टर को कुछ नहीं मिला है। लेकिन जिस भी सेक्टर को पैकेज का लाभ मिलेगा, उसकी तरक्की होगी। आर्थिक संपन्नता व व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ेंगी तो इसका असर रियल एस्टेट सेक्टर पर खुद-ब-खुद दिखने लगेगा।
शहर में खाली पड़े हैं 10 हजार फ्लैट
बीते तीन वर्षों की मंदी के कारण शहर में बनकर तैयार करीब 10 हजार से अधिक फ्लैट खाली पड़े हैं। इनमें से 5 हजार से अधिक फ्लैट अकेले केडीए के हैं। इसके अलावा आवास विकास परिषद के लगभग 280 फ्लैट बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। शहर के बड़े बिल्डरों के प्रोजेक्ट में भी फ्लैट खाली पड़े हैं। हालांकि मंदी के कारण निर्माण में खासी कमी आई है।