यहां बुद्ध के नाम पर मरने-मारने को तैयार रहते हैं लोग, ये है बड़ी वजह
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संकिसा बुद्ध के जीवन से जुड़ा एक धार्मिक स्थल है। यह उत्तर प्रदेश में फर्रुखाबाद जिले के बॉर्डर पर है। इस छोटे से गांव से कुछ दूर कंपिल है। एक और छोटा-मोटा बाबरी-रामजन्मभूमि जैसा मुद्दा बना हुआ है। एक तरफ से बुद्ध के नाम पर खून बहाने और करारा जवाब देने की बातें होती हैं। दूसरा पक्ष भी सनातन धर्म की सहिष्णुता की कसमें खाकर तोड़फोड़ और गाली गलौज करता है।
बुधवार को संकिसा में दोनों समुदायों के लोग यहां जमा हुए हैं। हर साल देशभर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी इसी तरीके से यहां लोग आते है और इस विवादित जगह पर पूजा पाठ करते हैं।
ये है संकिसा का इतिहास...
रामायण में संकिसा का जिक्र महाराज जनक के छोटे भाई कुशध्वज के राज्य के रूप में आता है। वहीं महाभारत और महाजनपद काल में इसे पांचाल का हिस्सा माना गया था। इस क्षेत्र को महाभारत में द्रौपदी के मायके के बतौर जाना जाता था।
बौद्ध इतिहास में संकिसा का जिक्र अलग-अलग तरीके से आता है। बुद्ध साहित्य में इसकी गणना 20 महान शहरों में की गई है और गांव के 6 किलोमीटर की परिधि तक मिलने वाले अवशेष इसके उस काल में बड़े स्तर पर फैले होने की तस्दीक करते हैं।
बौद्ध मत के अनुसार, भगवान बुद्ध अपने शिष्य आनंद के कहने पर यहां आए थे। यहीं उन्होंने बौद्ध धर्म का द्वार स्त्रियों के लिए खोल दिया था। एक और कहानी की मानें तो मरने के बाद बुद्ध स्वर्ग से सीढ़ी के जरिए यहां उतरे थे। मगर जीवित रहते बुद्ध के संकिसा आने का जिक्र त्रिपिटक में नहीं है।
बुद्ध के खुद संकिसा आने या न आने की बात से इतर इस बात के पर्याप्त प्रमाण हैं कि संकिसा बौद्ध धर्म का बड़ा शहर रहा है।फाह्यान यहां आया था और उसने यहां हजार भिक्षुओं के रहने की बात कही थी। यहां स्कंदगुप्त के शासनकाल से जुड़े प्रमाण भी मिलते हैं।सबसे बड़ी बात ये है कि अशोक का बनवाया एक स्तूप और स्तंभ भी यहां है। ये स्तंभ सारनाथ के शेर वाले स्तंभ जैसा ही है बस शेर की जगह यहां पर हाथी है।
सनातन धर्मियों का ये दावा
खुद को सनातन धर्म का मानने वाले लोग कहते हैं कि ये बिसारी देवी का मंदिर है। बिसारी देवी की पौराणिक या ऐतिहासिक मान्यता क्या है, कब से है, इसकी कोई ठोस जानकारी कम से कम इंटरनेट पर तो नहीं मिलती। मगर अशोक के बनवाए स्तूप पर एक छोटा सा 4-5 फीट का मंदिर बना हुआ है। हर साल बिसारी देवी के नाम पर एक मेला भी लगाया जाता है।
हर साल बुद्ध पूर्णिमा और शरद पूर्णिमा जैसे मौकों पर बिसारी देवी के भक्त और बौद्ध अनुयायी आमने-सामने हो जाते हैं। दोनों तरफ से भड़काऊ भाषणबाजी होती है। नारे लगते हैं। कुछ साल पहले तक पत्थरबाजी भी हो जाती थी। मगर फिलहाल मामले के अदालत में होने के कारण पुलिस ज़बरन शांति बनाए रखती है।2014 में इस मामले ने खूब तूल पकड़ा था। दोनों तरफ से धर्म की खातिर जान देने की बातें भी हुई थी। स्थानीय दलितों के बड़ी संख्या में बौद्ध धर्म अपना लेने के चलते घर वापसी, और अस्मिता के संकट जैसे ऐंगल भी आ गए थे।
विवाद के चलते दुनिया के 8 महत्वपूर्ण बौद्ध धार्मिक स्थानों में सबसे पिछड़ा
इस विवाद का सबसे बड़ा नुकसान ये है कि दुनिया के 8 महत्वपूर्ण बौद्ध धार्मिक स्थानों में शामिल ये जगह पूरी तरह से पिछड़ी हुई है। जापान, म्यांमार, चीन, कंबोडिया जैसे देशों के मठ इस छोटे से गांव में बने हुए हैं।
आज की तारीख में संकिसा के आस-पास लोगों के पास रोजगार नहीं है, अच्छी पढ़ाई की कोई व्यवस्था नहीं है। मगर हर कोई धर्म के नाम पर लड़ने और जान देने के लिए तैयार है।
बौद्ध धर्म में अहिंसा के सोपान