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ट्राईसाइकिल से दिव्यांग पति को चंडीगढ़ से लेकर आई पत्नी, सात दिन में तय किया 750 किलोमीटर का सफर
Wed, 10 Jun 2020 08:16 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 10 Jun 2020 08:16 PM IST
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ट्राईसाइकिल से दिव्यांग पति को चंडीगढ़ से लेकर आई पत्नी
- फोटो : अमर उजाला
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पत्नी को ऐसे ही अर्धांगिनी नहीं कहा गया है। वह हर मुसीबत पर पति के साथ डटकर सामना करती है। पति भले ही हार मान ले लेकिन पत्नी उसे टूटने नहीं देती। यह कथन सफीपुर की ऊषा देवी पर बिल्कुल सटीक बैठता है। चंडीगढ़ लॉकडाउन में आर्थिक तंगी होने पर दिव्यांग पति और तीन बच्चों का भरण पोषण मुश्किल हो गया।
बिना काम घर पर रहना मुश्किल और गांव आने के लिए किराया भी नहीं। ऐसे में उसने पति की ट्राईसाइकिल से ही गांव आने का फैसला कर लिया। पति और तीन बच्चों के साथ उसने सात दिनों में 750 किलोमीटर का सफर तय किया। हर कोई उसके जज्बे की सराहना कर रहा है। सफीपुर तहसील क्षेत्र के मुन्नाखेड़ा निवासी हुकुमचंद्र चंडीगढ़ में मजदूरी करके तीन बच्चों व पत्नी का पेट पालता था।
छह माह पहले एक मार्ग दुर्घटना में हुुकुमचंद्र का पैर काटना पड़ा था। पति के दिव्यांग होने के बाद पत्नी ऊषा ने घरों में पोंछा, बर्तन धोकर किसी तरह से गृहस्थी चलाई। इसी बीच लॉकडाउन हो गया तो कामधंधा भी बंद हो गया। दो वक्त की रोटी न मिलने पर चंडीगढ़ से पलायन की नौबत आ गई।
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किराया न होने से पत्नी ने ट्राईसाइकिल से ही घर आने का फैसला किया। दिव्यांग हुकुमचंद्र को ट्राई साइकिल में बैठाकर पत्नी ऊषा व तीन बच्चों अंकित (10), अमित (4) व बेटी रजनी (8) के साथ घर के लिए निकल पड़ी। सभी 7 दिन में 750 किमी का सफर तय करके 4 जून को अपने गांव पहुंचे। एक तरफ जहां गांव पहुंचकर हुकुमचंद्र खुश दिख रहा है वहीं हर कोई उसकी पत्नी की सराहना कर रहा है।
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बिना काम घर पर रहना मुश्किल और गांव आने के लिए किराया भी नहीं। ऐसे में उसने पति की ट्राईसाइकिल से ही गांव आने का फैसला कर लिया। पति और तीन बच्चों के साथ उसने सात दिनों में 750 किलोमीटर का सफर तय किया। हर कोई उसके जज्बे की सराहना कर रहा है। सफीपुर तहसील क्षेत्र के मुन्नाखेड़ा निवासी हुकुमचंद्र चंडीगढ़ में मजदूरी करके तीन बच्चों व पत्नी का पेट पालता था।
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छह माह पहले एक मार्ग दुर्घटना में हुुकुमचंद्र का पैर काटना पड़ा था। पति के दिव्यांग होने के बाद पत्नी ऊषा ने घरों में पोंछा, बर्तन धोकर किसी तरह से गृहस्थी चलाई। इसी बीच लॉकडाउन हो गया तो कामधंधा भी बंद हो गया। दो वक्त की रोटी न मिलने पर चंडीगढ़ से पलायन की नौबत आ गई।
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किराया न होने से पत्नी ने ट्राईसाइकिल से ही घर आने का फैसला किया। दिव्यांग हुकुमचंद्र को ट्राई साइकिल में बैठाकर पत्नी ऊषा व तीन बच्चों अंकित (10), अमित (4) व बेटी रजनी (8) के साथ घर के लिए निकल पड़ी। सभी 7 दिन में 750 किमी का सफर तय करके 4 जून को अपने गांव पहुंचे। एक तरफ जहां गांव पहुंचकर हुकुमचंद्र खुश दिख रहा है वहीं हर कोई उसकी पत्नी की सराहना कर रहा है।
अखिलेश यादव ने की 50 हजार रुपये की मदद
4 जून को हुकुमचंद्र और उसकी पत्नी के गांव पहुंचने की जानकारी जब सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को हुई तो उन्होंने दिव्यांग व उसके परिवार के हौसले को सराहा। साथ ही उसकी 50 हजार रुपये देकर आर्थिक सहायता की। बुधवार को सपा जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह यादव, एमएलसी सुनील सिंह साजन, पूर्व मंत्री सुधीर रावत हुकुमचंद्र ने उसे 50 हजार रुपये की नगद धनराशि दी। प्रतिनिधि मंडल के साथ पूर्व मंत्री बीरपाल यादव, सुरेश पाल जिला महासचिव, मनीष कुरील, रामबरन कुरील, संतोष फौजी, शुजाउर्रहमान सफवी आदि पार्टी के कार्यकर्ता मौजूद रहे।
अब तक पांच मृतक मजदूरों के आश्रितों को दिए जा चुके हैं एक लाख
समाजवादी पार्टी की ओर से लॉकडाउन अवधि में पांच मृतक प्रवासी मजदूरों के आश्रितों को 1-1 लाख रुपये की धनराशि दी जा चुकी है। जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र यादव ने बताया कि दिव्यांग हुकुमचंद्र को 50 हजार की सहायता देकर पार्टी ने लॉकडाउन अवधि में छठे व्यक्ति कीसहायता की है। जिलाध्यक्ष ने बताया कि पार्टी आगे भी जरूरतमंदों व गरीबों की सहायता करती रहेगी।
4 जून को हुकुमचंद्र और उसकी पत्नी के गांव पहुंचने की जानकारी जब सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को हुई तो उन्होंने दिव्यांग व उसके परिवार के हौसले को सराहा। साथ ही उसकी 50 हजार रुपये देकर आर्थिक सहायता की। बुधवार को सपा जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह यादव, एमएलसी सुनील सिंह साजन, पूर्व मंत्री सुधीर रावत हुकुमचंद्र ने उसे 50 हजार रुपये की नगद धनराशि दी। प्रतिनिधि मंडल के साथ पूर्व मंत्री बीरपाल यादव, सुरेश पाल जिला महासचिव, मनीष कुरील, रामबरन कुरील, संतोष फौजी, शुजाउर्रहमान सफवी आदि पार्टी के कार्यकर्ता मौजूद रहे।
अब तक पांच मृतक मजदूरों के आश्रितों को दिए जा चुके हैं एक लाख
समाजवादी पार्टी की ओर से लॉकडाउन अवधि में पांच मृतक प्रवासी मजदूरों के आश्रितों को 1-1 लाख रुपये की धनराशि दी जा चुकी है। जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र यादव ने बताया कि दिव्यांग हुकुमचंद्र को 50 हजार की सहायता देकर पार्टी ने लॉकडाउन अवधि में छठे व्यक्ति कीसहायता की है। जिलाध्यक्ष ने बताया कि पार्टी आगे भी जरूरतमंदों व गरीबों की सहायता करती रहेगी।