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Kanpur News: अस्पतालों में दलालों का बोलबाला, बिना ड्रेस कोड घूमता स्टॉफ
Wed, 06 Dec 2023 11:55 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Wed, 06 Dec 2023 11:55 PM IST
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कानपुर देहात। जिला अस्पताल में एमआर (मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव) और दलालों का बोलबाला है। इतना ही नहीं यहां से दलाल मरीजों को धोखे से अपने लाभ के लिए निजी अस्पताल लेकर चले जाते हैं। इस वजह से मरीज हर दिन लूट रहा है। अस्पतालों में स्टॉफ और डाॅक्टर बिना ड्रेस कोड के घूमते हुए दिखाई देते हैं, इससे दलाल व स्टाफ की पहचान नहीं हो पाती। व्यवस्था सुधार के लिए विशेष सचिव रंजन कुमार ने कड़े निर्देश दिए। बुधवार को हकीकत जांची गई तो न तो व्यवस्था में सुधार दिखा और न ही निर्देशों का पालन होता नजर आया।
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल की ओपीडी शुरू होते ही दलाल, निजी अस्पतालों के एंबुलेंस चालक, दवा कंपनियों के प्रतिनिधियों का जमघट लग जाता है। बुधवार को भी यही नजारा दिखाई दिया। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक कई बाहरी नजर आए। प्रदेश सरकार के विशेष सचिव के निर्देशों का पालन होता नजर नहीं आया। जिला अस्पताल पुरुष और महिला की पड़ताल की तो एक भी कर्मचारी अपनी ड्रेस में नहीं था। हाल यह था कि दोनों अस्पतालों के सीएमएस भी ड्रेस नहीं पहने थे। शासन के आदेश की अवहेलना जब जिम्मेदार ही करेंगे तो अधीनस्थ कर्मचारी को कैसे पालन करा सकेंगे ? इसके अलावा ओपीडी में निजी पैथालॉजी और मेडिकल स्टोर वाले हावी रहे। यही हाल सीएचसी देवीपुर, रसूलाबाद, झींझक, गजनेर, अकबरपुर सहित अन्य जगहों का रहा। यहां पूरे प्रभारी चिकित्साधिकारी से लेकर स्टॉफ ने ड्रेस कोड नहीं पहना था। बता दें कि 29 नवंबर को विशेष सचिव रंजन कुमार ने सरकारी अस्पतालों के लिए एक आदेश जारी किया है। जिसमें कहा है कि सरकारी अस्पतालों में गरीब जनता लाभांवित होती है। मगर बाहरी लोग (अस्पतालों में प्रशिक्षण प्राप्त कर्मचारी, दवा विक्रेता के प्रतिनिधि, निजी पैथालॉजी सेंटर के प्रतिनिधि अस्पताल में घूमते हुए नजर आते हैं। गरीब जनता का अवैध एंबुलेंस से शोषण किया जा रहा है। इसको लेकर निर्देश दिए हैं कि इस पर अंकुश लगे और अस्पतालों में तैनात प्रभारी चिकित्साधिकारी व अन्य सहयोगी स्टॉफ और कर्मचारी अपनी निर्धारित ड्रेस में रहेंगे। ड्रेस के ऊपर सभी कर्मचारियों के नाम लिखे होंगे, ताकि अस्पताल में आने वाले मरीजों को किसी तरह की दिक्कत न हो। साथ ही अवैध एंबुलेंस पर रोक लगाई जाए। हाल यह है कि जिला अस्पताल पुरुष, महिला और सीएचसी के डॉक्टर व स्टॉफ इस आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं और न ही अधिकारी इसका पालन ही करा पा रहे।
इमरजेंसी गेट से उठा ले गए मरीज
रनियां मंटोरा फैक्टरी के पास तीन दिसंबर को कानपुर नगर के लालपुर नौबस्ता निवासी लकी (16) और विशाल (17) सड़क हादसे में घायल हो गए थे। वहां से प्राथमिक उपचार के बाद दोनों जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। एंबुलेंस जैसे ही वहां पहुंची तो गेट पर ही दलाल दोनों घायलों को निजी अस्पताल ले गए। वहां से उनके मोटी रकम वसूली गई।
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डॉक्टर रूम से लेकर पूरे अस्पताल में सक्रिय रहते दलाल
जिला अस्पताल में शाम छह बजे के बाद इमरजेंसी कक्ष के अंदर निजी अस्पताल के दलाल डॉक्टर की कुर्सी के बगल में बैठकर चाय पीते और वहां से आने वाले मरीजों को गुमराह कर ले जाते हैं। यह दलाल हर दिन सीसीटीवी कैमरे में कैद होते, लेकिन जिम्मेदारों ने अपनी आंख बंद कर रखी है।
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पुलिस भी पड़ गई सुस्त
जिला अस्पताल में बनी चौकी के पुलिस कर्मियों ने दलालों पर कार्रवाई के लिए कुछ दिन तो तेजी दिखाई, लेकिन अब साठगांठ होने की वजह से दलालों पर कार्रवाई नहीं होती और अब दलाल चौकी के अंदर भी आते व जाते हैं। यह सब सीसीटीवी में कैद हो रहा है। इतना ही नहीं परिसर से एंबुलेंस तो हट गईं मगर अस्पताल के मेन रोड पर तहसील के पास इनका जमावड़ा लगने लगा है। दलाल अंदर से ऑटो व निजी वाहनों से यहां तक मरीज लेकर आते हैं। इसके बाद उन्हें झांसा देकर निजी अस्पताल ले जाते हैं।
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जूनियर डॉक्टर ही बन गए स्पेशलिस्ट
जिला अस्पताल के सर्जरी की ओपीडी बुधवार को एक जूनियर रेजिडेंट बैठा मिला। गंभीर रूप बीमार लोगों को वह हैलट के लिए रेफर कर देता, जबकि इसी ओपीडी में तैनात जिम्मेदार अक्सर नदारद रहते हैं।
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सभी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर और स्टॉफ को ड्रेस में रहने के आदेश हैं, लेकिन बहुत सारे लोग इसका पालन नहीं कर रहे हैं। इसको एक बार फिर से आदेश जारी करेंगे। निजी अस्पताल के दलाल और दवा कंपनी के प्रतिनिधि पर रोक के लिए प्रभारी चिकित्साधिकारी को पत्र जारी कर कड़ाई से पालन कराया जाएगा।
-डॉ. एके सिंह, सीएमओ
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मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल की ओपीडी शुरू होते ही दलाल, निजी अस्पतालों के एंबुलेंस चालक, दवा कंपनियों के प्रतिनिधियों का जमघट लग जाता है। बुधवार को भी यही नजारा दिखाई दिया। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक कई बाहरी नजर आए। प्रदेश सरकार के विशेष सचिव के निर्देशों का पालन होता नजर नहीं आया। जिला अस्पताल पुरुष और महिला की पड़ताल की तो एक भी कर्मचारी अपनी ड्रेस में नहीं था। हाल यह था कि दोनों अस्पतालों के सीएमएस भी ड्रेस नहीं पहने थे। शासन के आदेश की अवहेलना जब जिम्मेदार ही करेंगे तो अधीनस्थ कर्मचारी को कैसे पालन करा सकेंगे ? इसके अलावा ओपीडी में निजी पैथालॉजी और मेडिकल स्टोर वाले हावी रहे। यही हाल सीएचसी देवीपुर, रसूलाबाद, झींझक, गजनेर, अकबरपुर सहित अन्य जगहों का रहा। यहां पूरे प्रभारी चिकित्साधिकारी से लेकर स्टॉफ ने ड्रेस कोड नहीं पहना था। बता दें कि 29 नवंबर को विशेष सचिव रंजन कुमार ने सरकारी अस्पतालों के लिए एक आदेश जारी किया है। जिसमें कहा है कि सरकारी अस्पतालों में गरीब जनता लाभांवित होती है। मगर बाहरी लोग (अस्पतालों में प्रशिक्षण प्राप्त कर्मचारी, दवा विक्रेता के प्रतिनिधि, निजी पैथालॉजी सेंटर के प्रतिनिधि अस्पताल में घूमते हुए नजर आते हैं। गरीब जनता का अवैध एंबुलेंस से शोषण किया जा रहा है। इसको लेकर निर्देश दिए हैं कि इस पर अंकुश लगे और अस्पतालों में तैनात प्रभारी चिकित्साधिकारी व अन्य सहयोगी स्टॉफ और कर्मचारी अपनी निर्धारित ड्रेस में रहेंगे। ड्रेस के ऊपर सभी कर्मचारियों के नाम लिखे होंगे, ताकि अस्पताल में आने वाले मरीजों को किसी तरह की दिक्कत न हो। साथ ही अवैध एंबुलेंस पर रोक लगाई जाए। हाल यह है कि जिला अस्पताल पुरुष, महिला और सीएचसी के डॉक्टर व स्टॉफ इस आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं और न ही अधिकारी इसका पालन ही करा पा रहे।
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इमरजेंसी गेट से उठा ले गए मरीज
रनियां मंटोरा फैक्टरी के पास तीन दिसंबर को कानपुर नगर के लालपुर नौबस्ता निवासी लकी (16) और विशाल (17) सड़क हादसे में घायल हो गए थे। वहां से प्राथमिक उपचार के बाद दोनों जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। एंबुलेंस जैसे ही वहां पहुंची तो गेट पर ही दलाल दोनों घायलों को निजी अस्पताल ले गए। वहां से उनके मोटी रकम वसूली गई।
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डॉक्टर रूम से लेकर पूरे अस्पताल में सक्रिय रहते दलाल
जिला अस्पताल में शाम छह बजे के बाद इमरजेंसी कक्ष के अंदर निजी अस्पताल के दलाल डॉक्टर की कुर्सी के बगल में बैठकर चाय पीते और वहां से आने वाले मरीजों को गुमराह कर ले जाते हैं। यह दलाल हर दिन सीसीटीवी कैमरे में कैद होते, लेकिन जिम्मेदारों ने अपनी आंख बंद कर रखी है।
पुलिस भी पड़ गई सुस्त
जिला अस्पताल में बनी चौकी के पुलिस कर्मियों ने दलालों पर कार्रवाई के लिए कुछ दिन तो तेजी दिखाई, लेकिन अब साठगांठ होने की वजह से दलालों पर कार्रवाई नहीं होती और अब दलाल चौकी के अंदर भी आते व जाते हैं। यह सब सीसीटीवी में कैद हो रहा है। इतना ही नहीं परिसर से एंबुलेंस तो हट गईं मगर अस्पताल के मेन रोड पर तहसील के पास इनका जमावड़ा लगने लगा है। दलाल अंदर से ऑटो व निजी वाहनों से यहां तक मरीज लेकर आते हैं। इसके बाद उन्हें झांसा देकर निजी अस्पताल ले जाते हैं।
जूनियर डॉक्टर ही बन गए स्पेशलिस्ट
जिला अस्पताल के सर्जरी की ओपीडी बुधवार को एक जूनियर रेजिडेंट बैठा मिला। गंभीर रूप बीमार लोगों को वह हैलट के लिए रेफर कर देता, जबकि इसी ओपीडी में तैनात जिम्मेदार अक्सर नदारद रहते हैं।
सभी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर और स्टॉफ को ड्रेस में रहने के आदेश हैं, लेकिन बहुत सारे लोग इसका पालन नहीं कर रहे हैं। इसको एक बार फिर से आदेश जारी करेंगे। निजी अस्पताल के दलाल और दवा कंपनी के प्रतिनिधि पर रोक के लिए प्रभारी चिकित्साधिकारी को पत्र जारी कर कड़ाई से पालन कराया जाएगा।
-डॉ. एके सिंह, सीएमओ