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जानजोखिम में डाल बेहमई के टूटे पीपा पुल से आवागमन चालू
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टूटे पीपा पुल से निकलता बाइक सवार।
- फोटो : AKBARPUR
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राजपुर (कानपुर देहात)। गौरीरतन बांगर गांव से निकली यमुना नदी पर बने बेहमई पीपा पुल की मरम्मत तीसरे दिन शुक्रवार को भी नहीं हो सकी। लोग जान जोखिम में डालकर जलधारा पर रखी लोहे की चादर से यमुना नदी पार करने को मजबूर हैं। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
बेहमई गांव से डेढ़ किलोमीटर दूर गौरीरतन बांगर गांव के पास यमुना नदी पर पीपे के पुल की चहली ओवरलोड बालू लदे ट्रैक्टर निकलने के दौरान बुधवार रात टूट गई थी। बाद में लोहे के गाटर नदी में डूब गए व लकड़ी की चहली नदी की तेज धारा में बह गए। पुल क्षतिग्रस्त होने से आवागमन ठप हो गया। ग्रामीणों की सूचना के बाद भी विभागीय अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। क्षेत्र के लोगों ने पीपे के ऊपर लोहे की गाटर रखकर निकलना शुरू कर दिया। जिससे कभी भी हादसा हो सकता है। लोग 40-50 किलोमीटर का चक्कर बचाने के कारण जान जोखिम में डालकर वहां से निकलने को मजबूर हैं।
बुधवार को चहली टूटने से क्षतिग्रस्त हुआ पीपा पुल रविवार तक चालू होने की उम्मीद है। पीडब्ल्यूडी के जेई राधेश्याम यादव ने बताया कि चहली टूटने से लोहे के गाटर नदी में डूब गए हैं, जबकि चहली बह गई है। जिनकी तलाश के लिए मजदूरों को लगाया गया है। शनिवार से मरम्मत कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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बेहमई गांव से डेढ़ किलोमीटर दूर गौरीरतन बांगर गांव के पास यमुना नदी पर पीपे के पुल की चहली ओवरलोड बालू लदे ट्रैक्टर निकलने के दौरान बुधवार रात टूट गई थी। बाद में लोहे के गाटर नदी में डूब गए व लकड़ी की चहली नदी की तेज धारा में बह गए। पुल क्षतिग्रस्त होने से आवागमन ठप हो गया। ग्रामीणों की सूचना के बाद भी विभागीय अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। क्षेत्र के लोगों ने पीपे के ऊपर लोहे की गाटर रखकर निकलना शुरू कर दिया। जिससे कभी भी हादसा हो सकता है। लोग 40-50 किलोमीटर का चक्कर बचाने के कारण जान जोखिम में डालकर वहां से निकलने को मजबूर हैं।
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बुधवार को चहली टूटने से क्षतिग्रस्त हुआ पीपा पुल रविवार तक चालू होने की उम्मीद है। पीडब्ल्यूडी के जेई राधेश्याम यादव ने बताया कि चहली टूटने से लोहे के गाटर नदी में डूब गए हैं, जबकि चहली बह गई है। जिनकी तलाश के लिए मजदूरों को लगाया गया है। शनिवार से मरम्मत कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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