Kannauj: वजीफा के बदले मांगी रिश्वत, सुपरवाइजर भेजा गया जेल, समाज कल्याण राज्यमंत्री ने दर्ज कराई थी रिपोर्ट
Kannauj News: सूत्रों के अनुसार, प्रकरण में छात्र ममतांजय को भी वादी बनाया जा सकता था, लेकिन कोर्ट कचहरी के चक्कर में उसकी पढ़ाई प्रभावित होती। उसकी जान को भी खतरा हो सकता था। ऐसी स्थिति में मंत्री को खुद वादी बनाना बेहतर समझा।
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कन्नौज जिले में डीएलएड छात्र से वजीफा के नाम पर यूपीआई (यूनीफाइड पेमेंंट इंटरफेस) के माध्यम से 8250 रुपये की रिश्वत लेने वाले समाज कल्याण विभाग के सुपरवाइजर को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। छात्र की शिकायत के बाद समाज कल्याण राज्यमंत्री असीम अरुण ने उसके खिलाफ सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
सोमवार को पुलिस कार्यालय में जानकारी देते हुए पुलिस अधीक्षक अमित कुमार आनंद ने बताया कि 19 जुलाई को प्रदेश सरकार के समाज कल्याण मंत्री व सदर सीट से विधायक असीम अरुण से तिर्वागंज निवासी डीएलएड छात्र ममतांजय कुमार ने शिकायत की थी। छात्र ने बताया था कि मार्च माह में छात्रवृत्ति के लिए उसने आवेदन किया था, जो निरस्त हो गया था।
जब वह जानकारी करने के लिए विकास भवन स्थित समाज कल्याण विभाग के दफ्तर गया तो वहां सुपरवाइजर हृदयेश कुमार मिला। उसने छात्रवृत्ति दिलाने का आश्वासन दिया और रिश्वत मांगी। उसी दिन उसने फोनपे के माध्यम से 8250 रुपये अपने खाते में डलवा लिए। इसके बाद आज तक छात्रवृत्ति नहीं दिलवा पाया। मंत्री ने पुलिस को मामले की जांच के लिए कहा।
हृदयेश कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज
प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाई गई, जिस पर मंत्री की तहरीर के आधार पर इटावा, सैफई कोतवाली क्षेत्र के बखईया गांव निवासी सुपरवाइजर हृदयेश कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। सोमवार को सदर कोतवाली के उपनिरीक्षक अजब सिंह की टीम ने हृदयेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया।
इसलिए खुद वादी बने राज्यमंत्री
सूत्रों के अनुसार, प्रकरण में छात्र ममतांजय को भी वादी बनाया जा सकता था, लेकिन कोर्ट कचहरी के चक्कर में उसकी पढ़ाई प्रभावित होती। उसकी जान को भी खतरा हो सकता था। ऐसी स्थिति में मंत्री को खुद वादी बनाना बेहतर समझा।