Kanpur: प्रदूषण से अटक रही सांस...पांच रोगियों की मौत, गंभीर हालत में 40 रोगी भर्ती, लिवर और गुर्दे फेल
Kanpur Health Update: जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सीनियर फिजीशियन डॉ. जेएस कुशवाहा ने बताया कि सांस फूलने, ब्रेन हेमरेज, दमा और अस्थमा अटैक के रोगियों को भर्ती किया गया है। प्रदूषण और वायरल संक्रमण से पुराने रोगियों को जटिलताएं उभर आ रही हैं। रोगियों की हालत बिगड़ जा रही है।
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कानपुर में कोरोना के बाद प्रदूषण और घातक हो गया है। अब डेढ़ सौ से तीन सौ के बीच एक्युआई में ही रोगियों की सांस फूलने लगी है। जिन कोरोना रोगियों के फेफड़ों में संक्रमण में फाइब्रोसिस हुआ है, उन्हें अस्थमा, दमा जैसा अटैक पड़ने के साथ मानसिक स्थिति गड़बड़ हो रही है।
वह बहकी-बहकी बातें कर रहे हैं। पांच रोगियों की सांस में दिक्कत के बाद मौत हो गई है। इसके साथ ही निमोनिया, लिवर, गुर्दा और सांस के रोगी बढ़े हैं। हैलट की मेडिसिन ओपीडी में साढ़े छह सौ रोगियों ने जांच कराई। इसमें डेढ़ सौ रोगियों ने सांस की तकलीफ बताई।
इसके साथ ही अस्थमा और दमा अटैक के रोगी भी गंभीर हालत में आए, उन्हें इमरजेंसी में भर्ती किया गया। दम घुटने से आठ रोगी बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती किए गए। 24 घंटे में पांच रोगियों की मौत हो गई। इनमें गंगा घाट के रामप्रकाश वर्मा, दर्शनपुरवा की कमला देवी, बनिया बाजार के राम नरेश इन रोगियों को गंभीर हालत में उर्सला में भर्ती किया गया।
इन रोगियों को सेप्टीसीमिया की भी दिक्कत थी। इसके अलावा दो रोगियों को ब्रॉट डेड की स्थिति में हैलट लाया गया। इनमें फजलगंज के रहने वाले बाबूलाल (66) की पांच दिन से सांस में दिक्कत थी। सुबह बेहोशी आ गई। क्षेत्रीय डॉक्टर ने हैलट रेफर किया। रास्ते में ही मौत हो गई।
कोरोना के बाद फेफड़ों में फाइब्रोसिस हुई थी
इसी तरह लखनपुर के देवेंद्र (52) को सांस में दिक्कत थी। कोरोना के बाद उनके फेफड़ों में फाइब्रोसिस हुई थी। इलाज चेस्ट हॉस्पिटल में ओपीडी स्तर पर चल रहा था। उनके छोटे भाई रामेंद्र ने बताया कि सुबह तेज-तेज सांस लेने के बाद बेहोश गए। अस्पताल पहुंचने के पहले ही मौत हुई है।
पुराने रोगियों को जटिलताएं उभर आ रही हैं
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सीनियर फिजीशियन डॉ. जेएस कुशवाहा ने बताया कि सांस फूलने, ब्रेन हेमरेज, दमा और अस्थमा अटैक के रोगियों को भर्ती किया गया है। प्रदूषण और वायरल संक्रमण से पुराने रोगियों को जटिलताएं उभर आ रही हैं। रोगियों की हालत बिगड़ जा रही है।
डॉ. राजीव कक्कड़, सीनियर चेस्ट फिजीशियन, फेलो आफ अमेरिकन थोरेसिक सोसाइटी ने बताया कि कोविड और वायरल संक्रमण से जिसका फेफड़े पर असर आया है। उनके फेफड़ों में आक्सीजन एक्सचेंज वाले स्थान की पर्त मोटी हो जाती है। इससे आक्सीजन शरीर को कम मिलती है।
हेमोग्लोबिन से चिपक कर शरीर में नहीं जा पाती
प्रदूषण, धुंध होने पर नाइट्रिक आक्साइड शरीर में पहुंचता है जिससे आक्सीजन हेमोग्लोबिन से चिपक कर शरीर में नहीं जा पाती। आक्सीजन की कमी होती है और फूलने लगती है। इसके अलावा प्रदूषण के 2.5 माइक्रोग्राम से अति सूक्ष्म कण सीधे ब्लड में चले जाते हैं, जिससे नसों में सिकुड़न आती है।
यह रखें ख्याल
- मास्क लगाकर बाहर निकलें।
- धुंध वाले स्थान पर व्यायाम न करें।
- धुंध हो तो मॉर्निंग वॉक करने न जाएं।
- घर के अंदर हवादार कमरे योग प्राणायाम करें।
- सादा खानपान रखें, देर रात की पार्टियों से बचें।