चुनाव के बाद अब भाजपा के भितरघातियों पर चलेगी संघी लाठी
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इटावा में पहली बार संघ का पथ संचलन हुआ
सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के घर में 2014 के चुनाव में भाजपा को सफलता मिली। इसके बाद विधानसभा चुनाव में भी दो विधायक मिले। इससे संघ की बाछें खिल गईं। इटावा में पहली बार संघ का पथ संचलन हुआ। आसपास के जिलों का सात दिवसीय शिविर भी यहां लगा। सूत्रों की मानें तो संघ का टारगेट था कि नगर निकाय चुनाव में जिले की तीन नगर पालिका और तीन नगर पंचायतों में कम से कम दो-दो सीटों पर भगवाध्वज फहराएंगे।
भाजपा खाता तक नहीं खोल सकी
टिकट बंटवारा भी इसी रणनीति के तहत किया गया। इतना ही नहीं पड़ोसी जिले के कुछ प्रचारक भी इटावा में उतारे गए थे, लेकिन शुक्रवार को घोषित चुनाव परिणाम में भाजपा खाता तक नहीं खोल सकी। दो नगर पालिका पर सपा का कब्जा बरकरार रहा तो एक पर निर्दल विजयी हुआ। इसी तरह नगर पंचायत में तीनोें निर्दल को सफलता मिली। ये सभी निर्दलीय मूलरूप से सपा के हैं।
निकाय चुनाव का नतीजा सिफर रहने से संघ ने सख्ती शुरू कर दी है
जिले में भाजपा का एक सांसद, दो विधायक हैं। संगठनात्मक ढांचा मजबूत होने का दावा किया जाता रहा, लेकिन निकाय चुनाव का नतीजा सिफर रहने से संघ ने सख्ती शुरू कर दी है। इसका खामियाजा आगामी चुनावी समर में उतरने वालों को भी भुगतना पड़ सकता है। संघ का मानना था कि इटावा में बाजी मार लेते तो इसका संदेश पूरे प्रदेश में जाता, लेकिन इस मकसद में कामयाबी नहीं मिली।
माना गया कि संगठन के साथ ही कुछ अन्य वरिष्ठ नेता भी चुनाव से दूरी बनाए रखे
नहीं हुई समन्वय समिति की बैठक