Orai: सपा सांसद के दफ्तर पर भाजपा महिला मोर्चा का प्रदर्शन, पुलिस के सामने फोड़ीं मटकियां; फाड़े पोस्टर
Orai News: जालौन जिले के उरई में सोमवार को भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने समाजवादी पार्टी के सांसद नारायण दास अहिरवार के कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन कर राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया। आक्रोशित महिला कार्यकर्ताओं ने सांसद कार्यालय के बाहर एकत्र होकर नारेबाजी की और विरोध स्वरूप कार्यालय गेट पर मटकी फोड़कर प्रदर्शन किया।
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जालौन जिले में राजनीतिक पारा उस समय सातवें आसमान पर पहुंच गया, जब भाजपा महिला मोर्चा की सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने समाजवादी पार्टी के सांसद नारायण दास अहिरवार के कार्यालय का घेराव कर दिया। 'हल्ला बोल' के इरादे से पहुंचीं महिला कार्यकर्ताओं ने न केवल जमकर नारेबाजी की, बल्कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यालय के बाहर लगे सांसद के पोस्टर और बैनर तक फाड़ डाले।
मटकी फोड़कर जताया अनूठा विरोध
मंगलवार को हुए इस प्रदर्शन का नजारा बेहद आक्रामक था। भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ता अपने साथ मटकियाँ लेकर पहुंची थीं। आक्रोशित महिलाओं ने सांसद कार्यालय के मुख्य गेट पर एक-एक कर कई मटकियाँ पटकीं। मटकियों के टूटने की आवाज और सरकार विरोधी नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना था कि यह मटकियाँ जनता की उन उम्मीदों के टूटने का प्रतीक हैं, जिन्हें सपा सांसद ने नजरअंदाज किया है।
पुलिस के सामने चलता रहा हंगामा
हैरानी की बात यह रही कि जब यह पूरा घटनाक्रम चल रहा था, मौके पर भारी पुलिस बल तैनात था। हालांकि, पुलिस की मौजूदगी के बावजूद भाजपा कार्यकर्ताओं का जोश कम नहीं हुआ। पुलिसकर्मियों के घेरे के बीच ही महिलाएं गेट तक पहुंचीं और मटकियाँ फेंकती रहीं। काफी देर तक पुलिस मूकदर्शक बनी रही, लेकिन जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी और धक्का-मुक्की की नौबत आई, तब जाकर पुलिस ने हस्तक्षेप किया और प्रदर्शनकारियों को गेट से पीछे हटाया।
पोस्टर-बैनर फाड़े, सपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी
प्रदर्शन के दौरान आक्रोश इतना ज्यादा था कि कार्यालय के बाहर लगे सांसद नारायण दास अहिरवार के होर्डिंग्स और बैनरों को फाड़ दिया गया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने सांसद के खिलाफ 'वादाखिलाफी' और 'क्षेत्र से गायब रहने' के गंभीर आरोप लगाए। दूसरी ओर, इस घटना की जानकारी मिलते ही समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेताओं में भी भारी रोष देखा जा रहा है। सपा ने इसे 'लोकतंत्र की हत्या' और 'सत्ता के संरक्षण में गुंडागर्दी' करार दिया है।