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चुनावी दंगल: लोकसभा चुनाव में क्यों 'दो बार' कांग्रेस-बीजेपी के टिकट बने जीत की गारंटी, ये रही वजह

Thu, 28 Mar 2019 03:31 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Thu, 28 Mar 2019 03:31 PM IST
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bjp and congress ticket in lok sabha elections 2019
राहुल गांधी-पीएम मोदी (फाइल फोटो) - फोटो : self
लोकसभा चुनाव 2019 में सभी राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव में जीतने के लिए उठापटक शुरु कर दी है। ऐसे में यूपी के बुंदेलखंड क्षेत्र में समस्याओं यानी मुद्दों की कमी नहीं रही है। कभी पानी तो कभी अन्ना पशु और कभी जर्जर सड़कों की तस्वीर बदलने के नाम पर लोकसभा चुनाव में वोट मांगे गए।
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लेकिन अब तक हुए 16 लोकसभा चुनाव में दो चुनाव ऐसे भी रहे, जब विकास के वादे और मुद्दे चुनाव प्रचार में नहीं गूंजे। यह चुनाव थे, 1984 में जब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरागांधी की हत्या हुई थी और 2014 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री का चेहरा बने थे। इन दोनों चुनाव में सहानुभूति और लोकप्रियता की ऐसी लहर चली कि पार्टियों का टिकट ही जीत की गारंटी साबित हुआ। 
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धानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद आई थी कांग्रेस की लहर

जालौन-भोगनीपुर-गरौंठा लोकसभा सीट पर वर्ष 1952 से ज्यादातर जातिगत आंकड़ों के आधार पर ही चुनाव लड़े गए।  बीच-बीच में कभी किसानों का दर्द उकेरते हुए बुंदेलखंड का सूखा तो कभी बाढ़ को भी उम्मीदवारों ने चुनावी मुद्दा बनाया। हाल के कुछ वर्षों में अन्ना मवेशी और खस्ताहाल सड़कें भी चुनावी वादों का हिस्सा बनी।

इन सबके बीच दो चुनाव ऐसे भी हुए, जब मुद्दे हवा हवाई थे और सिर्फ लहरों पर ही चुनाव जीते गए। अक्तूबर 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश भर में कांग्रेस की ऐसी लहर पैदा हुई कि जिले में वर्ष 1980 के कांग्रेस सांसद नाथूराम का टिकट काटकर राजीव गांधी ने गांधी परिवार से जुड़े लच्छीराम को 1984 का उम्मीदवार बनाया।
 

भाजपा ने दिया कांग्रेस मुक्त सरकार का नारा

‘मैं रहूं न रहूं, मेरे खून का एक एक कतरा देश के काम आएगा’ गली-गली में गूंजने वाले इंदिरा गांधी के इस आखिरी भाषण ने चुनाव से मुद्दे ही नदारद कर दिए। वर्ष 1984 के चुनाव के परिणाम आए तो लच्छीराम को 1,70,510 वोट मिले और उनके विरोधी जनता दल (एलकेडी) के प्रत्याशी रामसेवक भाटिया को 1,17,273 वोट मिले। लच्छीराम 53,237 वोटों से चुनाव जीत गए।

कुछ ऐसा ही चुनावी माहौल करीब 30 वर्ष के बाद 2014 में उस वक्त देखने में आया, जब जिला बाढ़ की विभीषिका और अन्ना पशुओं के कहर से जूझ रहा था। लग रहा था कि यही दोनों मुद्दे चुनाव में निर्णायक साबित होंगे, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में एक साफ सुथरी और कांग्रेस मुक्त सरकार का नारा दिया।

 
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जब बुंदेलखंड में भाजपा ही भाजपा नजर आई

लोगों को लगा कि अरसे से कोई बोलने वाला प्रधानमंत्री देश को नहीं मिला, भ्रष्टाचार की समाप्ति के दावे ने भी मतदाताओं को प्रभावित किया। फिर क्या था, 2009 में जिले में सपा का खाता खोलने वाले सांसद घनश्याम अनुरागी 2014 के चुनाव में मोदी लहर के आगे 180921 मत हासिल कर तीसरे नंबर पर पहुंच गए।

दूसरे नंबर पर रहे बसपा के बृजलाल खाबरी को 261429 मत मिले और भाजपा के भानु प्रताप ने 548631 मत हासिल किए। भानु मोदी लहर में करीब तीन लाख मतों से चुनाव जीते। इस तरह 2014 का चुनाव में बिना किसी मुद्दे के सिर्फ मोदी की लोकप्रियता में ही निकल गया और पूरे बुंदेलखंड में भाजपा ही भाजपा नजर आई।
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