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बर्ड फ्लू: कानपुर में पोल्ट्री फार्म संचालकों को लगेगा रोजाना दो करोड़ का झटका

Mon, 11 Jan 2021 01:06 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 11 Jan 2021 01:06 AM IST
सार

- 500 से अधिक पोल्ट्री फाम हैं नगर में
- 50 हजार मुर्गे-मुर्गी की होती थी रोजाना बिक्री
- 90 प्रतिशत चिकन और अंडों की खपत शहर में होती थी

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Bird flu in Kanpur: Poultry farm operators will incur a loss of two crore daily
कानपुर में बर्ड फ्लू: पोल्ट्री फार्म - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना के चलते पहले ही एक हजार करोड़ का नुकसान झेल चुके पोल्ट्री फार्म संचालकों को बर्ड फ्लू ने एक और तगड़ा झटका दे दिया है। जिला प्रशासन से अगले आदेश तक पोल्ट्री फार्मों से किसी भी प्रकार की बिक्री पर रोक से कारोबारियों को प्रतिदिन दो करोड़ का नुकसान होगा।
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वहीं बर्ड फ्लू के चलते रेस्टोरेंट, होटल संचालकों ने भी चिकन को अपने मेन्यू से हटा दिया है। कानपुर नगर में 500 से अधिक पोल्ट्री फार्म हैं। यहां से प्रतिदिन 50 हजार मुर्गी, 20 लाख अंडों की बिक्री होती है। 90 प्रतिशत खपत केवल शहर में है। शेष 10 फीसदी माल चंडीगढ़, हिमाचल आदि जगहों पर भेजा जाता है। 
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वहीं यहां के फार्मों में हरियाणा और प्रयागराज से चूजे मंगाकर यहां तैयार किए जाते हैं। फार्म से किसी भी प्रकार का माल बाहर जाने और बाहर से माल आने पर रोक लगने के बाद कारोबारियों ने अगले आदेशों तक नई खेप तैयार करने से भी किनारा कर लिया है।
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कभी रोजाना 11 लाख मुर्गे-मुर्गी होते थे तैयार
कोरोना के पहले शहर में रोजाना 11 लाख मुर्गी-मुर्गे तैयार होते थे। कोरोना के दौर में खपत कम हुई तो यह संख्या घटकर 8-9 लाख रह गई। वर्तमान में करीब चार लाख मुर्गे या मुर्गी रोज तैयार किए जा रहे हैं। अब इसमें और गिरावट आ सकती है।

15 दिन का होता है ड्राई डे
कारोबारियों के मुताबिक 45 दिन में मुर्गा या मुर्गी तैयार करने के बाद फार्म में 15 दिन का ड्राई डे रखा जाता है। इस दौरान दवाओं का छिड़काव, चूना आदि डाला जाता है। ताकि चूजों में किसी प्रकार का संक्रमण न फैले।

कारोबारियों ने की अपील
फेडरेशन के पदाधिकारियों ने अपील की है कि चिकन या अंडा अच्छी तरह से पकाकर ही खाएं। पानी में उबाला गया चिकर या अंडा 100 डिग्री सेंटीग्रेट पर रहता है। तेल का तापमान 130 डिग्री सेंटीग्रेट होता है। गाइड लाइन के मुताबिक 35 डिग्री तापमान पर उत्पाद को पकाना बताया गया है। ऐसे में उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित हैं।

होटलों में नहीं मिलेगी चिकन बिरयानी, अंडा करी
बर्ड फ्लू की दस्तक देते ही नॉनवेज पकवान देने वाले रेस्टोरेंट पर भी बंदिशें लगा दी गई हैं। मुस्लिम बहुल इलाकों के अलावा जिन होटलों में भी नॉनवेज बिकता है, वहां पर पुलिस ने जाकर निर्देश दिए कि वे चिकन व अंडे से जुड़ी डिश न बनाएं और न बेचें। इसके लिए संबंधित थाना और चौकी से पुलिस टीम ने रेस्टोरेंट संचालकों से संपर्क किया है।

चमनगंज के वारसी होटल, अजमेरी होटल में फिलहाल मटन से बनी डिश बिक रही हैं। तलाक महल के ज्यादातर होटलों में चिकन की बनी डिश बनती हैं, लिहाजा वहां के होटल बंद करा दिए गए हैं। जहां पर मटन-मछली की डिश बिकती हैं, वह कोरोना संक्रमण के तहत जारी गाइडलाइन के तहत ही खाने पीने का सामान बेचने और बैठकर खिला सकते हैं।


आज जिलाधिकारी से मिलेंगे कारोबारियों
बर्ड फ्लू के खतरे के बीच चिकन और अंडों की शहर भर में थोक और फुटकर बाजारों को जिला प्रशासन ने अगले आदेश तक बंद करा दिया है। ऐसे में कारोबार पर पड़ते प्रभाव से निपटने के लिए फेडरेशन के पदाधिकारी सोमवार को जिलाधिकारी से मुलाकात कर चर्चा करेंगे।

बाजार में दोपहर दो बजे के बाद दुकानें बंद हो गईं थी। चिकन के दाम में तेजी देखने को मिली। चिकन थोक में 160 रुपये किलो तक बिका है। पहले इसके दाम 85 रुपये तक थे। लोगों ने अच्छी खरीदारी की है। अब लोग मटन आदि की अधिक मांग कर रहे हैं। - मो. रईस मंसूरी, अध्यक्ष बाकरगंज पोल्ट्री व्यापार मंडल

जिला और पुलिस प्रशासन के निर्देश पर एहतियात के तौर पर बाजार बंद कर दिया गया है। व्यापारी बर्ड फ्लू को लेकर सतर्क हैं। अगले आदेश तक बाजार बंद रहेगा। हालांकि लोगों में किसी प्रकार का डर नहीं है। लोग चिकन खरीद रहे हैं। - इमरान खान अध्यक्ष, परेड व्यापार समिति

होटल, रेस्टोरेंट के मेन्यू से चिकन और इसके उत्पादों को हटा दिया गया है। केक उत्पादक पहले से ही एगलेस केक तैयार कर रहे हैं। जिला प्रशासन के सभी नियमों का पालन करने के निर्देश सभी होटल व रेस्टोरेंट संचालकों को दिए गए हैं। - राजकुमार भगतानी, महामंत्री, कानपुर होटल, गेस्ट हाउस, स्वीट्स एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन

कारोबार को झटका, गलियों में बिक रहा चिकन
कोरोना काल में लंबे समय तक बंद रहे होटल-रेस्टोरेंट कारोबार को बर्ड फ्लू ने दोबारा झटका दिया है। चमनगंज में वारसी होटल के संचालक अयाज वारसी ने बताया कि लॉकडाउन और कोरोना काल में होटल-रेस्टोरेंट बंद रहे। अब बर्ड फ्लू ने दस्तक दे दी है। मटन-फिश के बनी नॉनवेज डिश बिकेंगी। हालांकि चमनगंज के कंघी मोहाल, बेकनगंज, कर्नलगंज, रेल बाजार, रजबी रोड, कुली बाजार जैसी घनी बस्तियों वाले इलाकों में चिकन की डिश बनाने वाले होटल खुले रहे।

चार दिन पहले ही मंगवाए थे 10 हजार चूजे
बिधनू के किशनपुर, कठेरुआ, दहेली, बकौली, कठारा, औंधा कुलौली गांव में करीब 60 पोल्ट्री फार्म हैं। पोल्ट्री फार्म संचालिका मीरा देवी ने बताया कि उनके तीन पोल्ट्री फार्मों से रोज 10 हजार रुपये का कारोबार होता है। उनके यहां से दिल्ली, इलाहाबाद, हरियाणा, गोरखपुर, औरैया समेत प्रदेश के कई जिलों में सप्लाई होती है। फार्मों में इस समय करीब 70 हजार चूजे हैं। चार दिन पहले उन्होंने औरैया से 10 हजार चूजे मंगवाए थे। यही स्थित रही तो कुछ दिनों में लाखों का नुकसान हो सकता है।

 

खाने वालों को कम, मुर्गा काटने वालों को खतरा ज्यादा
बर्ड फ्लू का खतरा चिकन खाने वालों को कम है, क्योंकि वे मांस को पकाकर खाएंगे लेकिन जो मुर्गा काटता है उसे बर्ड फ्लू का खतरा अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि उन्हीं लोगों को बर्ड फ्लू का खतरा अधिक होता है जो अधिक समय तक बीमार पक्षियों के संपर्क में रहते हैं। अगर एक व्यक्ति में संक्रमण आ गया तो दूसरे में फैल जाता है। बर्ड फ्लू कोरोना से अधिक खतरनाक है लेकिन इसका इलाज उपलब्ध है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बर्ड फ्लू के मामले में लापरवाही कतई न बरतें। उर्सला के सीएमएस सीनियर चेस्ट फिजिशियन डॉ. अनिल निगम का कहना है कि अगर संक्रमण की शुरुआत में इलाज मिल जाए तो रोगी ठीक हो जाता है। इसका इलाज उपलब्ध है। टेमी फ्लू सरीखी दवाएं अच्छा काम करती हैं। इलाज में देर होने से संक्रमण खतरनाक हो जाता है।

अगर वायरस म्यूटेट कर रूप बदलता है तो यह और अधिक खतरनाक हो सकता है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभाग के डॉ. प्रेम सिंह का कहना है कि बर्ड फ्लू के लक्षण कोरोना की तरह होते हैं। इसकी दवाएं उपलब्ध हैं। बचाव सबसे बेहतर उपाय है।
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