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डेंगू से युवक की मौत बाद थमाया 6.57 लाख का बिल, शव देने से इनकार करने पर परिजनों ने काटा हंगामा
Sun, 10 Nov 2019 11:08 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 10 Nov 2019 11:08 PM IST
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डेंगू से अस्पताल फुल (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर में गोविंदनगर के एक बड़े अस्पताल में रविवार सुबह बैंक कर्मी रामचंद्र शुक्ला की मौत के बाद परिजनों को 6.57 लाख का बिल थमा दिया गया। पूरा भुगतान किए बिना शव देने से इनकार कर दिया गया। इस पर हंगामा शुरू हो गया। बाद में परिजनों ने भुगतान कर दिया।
इसके बाद लापरवाह डॉक्टरों ने मृत्यु प्रमाणपत्र भी भर्ती होने से पहले की तारीख का थमा दिया। इससे तीमारदारों का गुस्सा बढ़ गया। फिर हंगामा शुरू हो गया। बवाल बढ़ने की सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामला शांत कराया। उन्नाव, शुक्लागंज निवासी रामचंद्र शुक्ला (35) परमट स्थित यूनियन बैंक में कैशियर पद पर तैनात थे।
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इसके बाद लापरवाह डॉक्टरों ने मृत्यु प्रमाणपत्र भी भर्ती होने से पहले की तारीख का थमा दिया। इससे तीमारदारों का गुस्सा बढ़ गया। फिर हंगामा शुरू हो गया। बवाल बढ़ने की सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामला शांत कराया। उन्नाव, शुक्लागंज निवासी रामचंद्र शुक्ला (35) परमट स्थित यूनियन बैंक में कैशियर पद पर तैनात थे।
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भाई विवेक शुक्ला ने पुलिस को बताया कि रामचंद्र को 31 अक्तूबर कोे गोविंदनगर स्थित अस्पताल में भर्ती कराया था। डॉक्टरों ने जांच कर उन्हें डेंगू होने की पुष्टि की। हालत गंभीर बताकर उन्हें आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। उन्हें प्लेटलेट्स चढ़ाई गईं।
रविवार सुबह करीब चार बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। आरोप है कि शनिवार रात अस्पताल प्रबंधन ने 5.91 लाख रुपये का बिल बताया था। सुबह 6.57 लाख रुपये का बिल थमा दिया और भुगतान करने पर ही शव देने की बात कही। इस पर अन्य रिश्तेदार गुस्सा गए।
बहस हुई, लेकिन रुपये मंगाकर जमा कर दिए गए। जब मृत्यु प्रमाणपत्र देखा तो उसमें तारीख 27 अक्तूबर लिखी थी। इस पर परिजन गुस्सा गए। अस्पताल प्रबंधन ने 6.57 लाख रुपये लेने के बाद ही परिजनों को शव सौंपा। बैंक कर्मी के परिवार में पत्नी एकता शुक्ला व दो माह की बेटी है। थाना प्रभारी संजीवकांत मिश्रा ने बताया कि पैसे के लेनदेन को लेकर विवाद हुआ था। कोई तहरीर नहीं मिली है।
रविवार सुबह करीब चार बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। आरोप है कि शनिवार रात अस्पताल प्रबंधन ने 5.91 लाख रुपये का बिल बताया था। सुबह 6.57 लाख रुपये का बिल थमा दिया और भुगतान करने पर ही शव देने की बात कही। इस पर अन्य रिश्तेदार गुस्सा गए।
बहस हुई, लेकिन रुपये मंगाकर जमा कर दिए गए। जब मृत्यु प्रमाणपत्र देखा तो उसमें तारीख 27 अक्तूबर लिखी थी। इस पर परिजन गुस्सा गए। अस्पताल प्रबंधन ने 6.57 लाख रुपये लेने के बाद ही परिजनों को शव सौंपा। बैंक कर्मी के परिवार में पत्नी एकता शुक्ला व दो माह की बेटी है। थाना प्रभारी संजीवकांत मिश्रा ने बताया कि पैसे के लेनदेन को लेकर विवाद हुआ था। कोई तहरीर नहीं मिली है।