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बिकरू कांड : गैंगस्टर मामले में इंस्पेक्टर से पूरी नहीं हो पाई जिरह, अब 15 सितंबर को होगी सुनवाई
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कानपुर देहात। बिकरू कांड के आरोपियों पर लगाए गए गैंगस्टर के मामले की सुनवाई गुरुवार को अदालत में हुई। इस दौरान वादी इंस्पेक्टर कृष्ण मोहन राय से बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने जिरह की। जिरह पूरी नहीं होने पर कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 15 सितंबर तय की है।
दो जुलाई 2020 को हुए बिकरू कांड के बाद चौबेपुर पुलिस ने 30 आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की थी। इसकी सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पांच (गैंगस्टर) बाकर शमीम रिजवी की अदालत में चल रही है।
मामले में वादी मुकदमा इंस्पेक्टर कृष्ण मोहन राय के बयान अदालत में दर्ज होने के बाद आरोपी श्यामू बाजपेई, रामू बाजपेई, अखिलेश उर्फ छोटू व शिव तिवारी की ओर से बचाव पक्ष के अधिवक्ता सीपी शुक्ला व संजय सिंह जिरह कर रहे हैं।
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गुरुवार को सभी आरोपी व गवाह अदालत में पेश हुए। अधिवक्ता सीपी शुक्ला ने इंस्पेक्टर कृष्ण मोहन राय से सवाल किया कि डीसीआरवी प्रभारी की तरफ से गैंग पंजिका का मिलान अपने रजिस्टर से किया गया था कि नहीं। गैंग पंजिका में कथित गिरोह अंकित था या नहीं।
क्या फार्म 45 पुलिस रेगुलेशन के पैरा 253 के अनुसार आरोपियों की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को हिस्ट्रीशीट के साथ भेजी थी। इन सवालों के जवाब देने में इंस्पेक्टर लड़खड़ा गए।
उन्होंने इंस्पेक्टर से पूछा कि क्या प्राइवेट स्थान पर रात में लोक व्यवस्था भंग हो सकती है। कथित गिरोह का कार्य क्षेत्र बिकरू गांव था या थाना परिक्षेत्र। इन सवालों के जवाब भी इंस्पेक्टर संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
हालांकि विशेष लोक अभियोजक अमर सिंह भदौरिया ने बचाव पक्ष के कई सवालों पर विरोध किया। विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि अभी जिरह जारी है। आगे की जिरह के लिए कोर्ट ने 15 सितंबर की तारीख तय की है।
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दो जुलाई 2020 को हुए बिकरू कांड के बाद चौबेपुर पुलिस ने 30 आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की थी। इसकी सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पांच (गैंगस्टर) बाकर शमीम रिजवी की अदालत में चल रही है।
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मामले में वादी मुकदमा इंस्पेक्टर कृष्ण मोहन राय के बयान अदालत में दर्ज होने के बाद आरोपी श्यामू बाजपेई, रामू बाजपेई, अखिलेश उर्फ छोटू व शिव तिवारी की ओर से बचाव पक्ष के अधिवक्ता सीपी शुक्ला व संजय सिंह जिरह कर रहे हैं।
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गुरुवार को सभी आरोपी व गवाह अदालत में पेश हुए। अधिवक्ता सीपी शुक्ला ने इंस्पेक्टर कृष्ण मोहन राय से सवाल किया कि डीसीआरवी प्रभारी की तरफ से गैंग पंजिका का मिलान अपने रजिस्टर से किया गया था कि नहीं। गैंग पंजिका में कथित गिरोह अंकित था या नहीं।
क्या फार्म 45 पुलिस रेगुलेशन के पैरा 253 के अनुसार आरोपियों की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को हिस्ट्रीशीट के साथ भेजी थी। इन सवालों के जवाब देने में इंस्पेक्टर लड़खड़ा गए।
उन्होंने इंस्पेक्टर से पूछा कि क्या प्राइवेट स्थान पर रात में लोक व्यवस्था भंग हो सकती है। कथित गिरोह का कार्य क्षेत्र बिकरू गांव था या थाना परिक्षेत्र। इन सवालों के जवाब भी इंस्पेक्टर संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
हालांकि विशेष लोक अभियोजक अमर सिंह भदौरिया ने बचाव पक्ष के कई सवालों पर विरोध किया। विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि अभी जिरह जारी है। आगे की जिरह के लिए कोर्ट ने 15 सितंबर की तारीख तय की है।