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बिकरू पंचायत चुनाव: कभी विकास दुबे के खौफ से नहीं लड़ते थे चुनाव, अब वोटर लिस्ट देखने पहुंच रहे उम्मीदवार

Sat, 09 Jan 2021 04:42 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sat, 09 Jan 2021 04:42 PM IST
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Bikru Panchayat Election: Never used to fight elections in the fear of Vikas Dubey, now the candidates who are going to see the voter list
गैंगस्टर विकास दुबे का गांव बिकरू - फोटो : Amar Ujala
गैंगस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद नव वर्ष के लिए गांव में लगे शुभकामना संदेश वाले पोस्टर-वैनर और विकास खंड कार्यालय में कुछ लोगों के द्वारा मतदाता सूचियों का निरीक्षण यह संकेत दे रहा है कि बिकरु गांव में धीरे-धीरे लोकतंत्र की वापसी हो रही है, जबकि इसके पूर्व स्वयं विकास दुबे और उसके गुर्गे ही राजनीति में सक्रिय रहते थे।

 
Bikru Panchayat Election: Never used to fight elections in the fear of Vikas Dubey, now the candidates who are going to see the voter list
विकास दुबे कांड - फोटो : amar ujala
मालूम रहे कि वर्ष 1995 मे हुए पंचायत चुनाव में विकास दुबे ने पहली बार ग्राम प्रधान पद का पर्चा दाखिल किया था, जिसमें वह निर्विरोध प्रधान बना, इसके बाद वर्ष 2000 में सीट अनुसूचित जाति के होने के चलते विकास के सहयोग से ही गायत्री देवी प्रधान निर्वाचित की हुईं। 2005 में सामान्य महिला सीट आने के बाद विकास दुबे के भाई दीपू की पत्नी अंजली दुबे ग्राम प्रधान की उम्मीदवार बनी और अपने प्रतिद्वंदी को भारी बहुमत से पराजित किया।
 
Bikru Panchayat Election: Never used to fight elections in the fear of Vikas Dubey, now the candidates who are going to see the voter list
बिकरू पंचायत भवन व बिकरू गांव को जाने वाले मार्ग पर लगा संकेतक - फोटो : अमर उजाला
2010 में पिछड़े वर्ग की सीट आरक्षित होने के चलते गैंगस्टर द्वारा रजनी कुशवाहा को निर्विरोध प्रधान निर्वाचित कराया और 2015 में भाई की पत्नी अंजली दुबे ग्राम प्रधान बनी। इसी दौरान विकास ने अपनी पत्नी ऋचा दुबे को घिमऊ जिला पंचायत सीट से भारी मतों से विजय दिलाई। इन 25 सालों में विकास दुबे ने जिसको चाहा वहीं ग्राम प्रधान बना।
 
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Bikru Panchayat Election: Never used to fight elections in the fear of Vikas Dubey, now the candidates who are going to see the voter list
बिकरू गांव - फोटो : अमर उजाला
1992 में अपराध जगत में कदम रखने के बाद चौबेपुर के कोल्ड स्टोरेज संचालक पर जानलेवा हमला करने के बाद चर्चा में आया विकास धीरे-धीरे अपराध जगत में अपना कद बढ़ाता चला गया। इसके बाद शिवली के प्रधानाचार्य सिद्धेश्वर हत्याकांड, मंत्री संतोष शुक्ला हत्याकांड जैसे बड़े घटनाओं को अंजाम देने के बाद वह इलाके लोगों में उसके नाम की दहशत हो गई।

 
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विकास दुबे का बिकरू गांव - फोटो : amar ujala
लोग बिना उसकी मर्जी से एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाते थे, वैसे तो 1493 मतदाताओं वाली बिकरू ग्राम सभा में करीब 400 यादव, 350 ब्राह्मण, 200 मुस्लिम मतदाता और शेष में अन्य जातियां रही हैं, पर इसके बाद भी किसी ने 25 वर्षों में चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं जुटाई।

 
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