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बिकरू कांड : बचाव पक्ष का गवाह से जिरह का अवसर समाप्त, अब 25 जुलाई को सुनवाई
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कानपुर देहात। बिकरू कांड के मुख्य मामले में अभियोजन के पहले गवाह दरोगा से तीन आरोपियों की ओर से बचाव पक्ष तीन माह से जिरह कर रहा है। मंगलवार को बचाव पक्ष ने जिरह के लिए समय मांगते हुए अदालत में स्थगन प्रार्थना पत्र पेश किया।
इस पर अदालत ने सख्त नाराजगी जताते हुए बचाव पक्ष का प्रार्थना पत्र खारिज कर बचाव पक्ष की जिरह का अवसर समाप्त कर दिया। अब अदालत ने अन्य आरोपियों की ओर से जिरह के लिए 25 जुलाई की तिथि नियत की है।
दो जुलाई 2020 को हुए बिकरू कांड के बाद पुलिस ने 45-50 लोगों के खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास समेत कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी। मामले की सुनवाई एंटी डकैती कोर्ट अमित मालवीय की अदालत में चल रही है।
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मामले में आरोपी राजेंद्र मिश्रा, सुरेश वर्मा व शिवम दलाल की ओर से बचाव पक्ष के अधिवक्ता संतोष कुमार बाजपेयी अभियोजन के पहले गवाह दरोगा कुंवरपाल से जिरह कर रहे हैं। मंगलवार को बचाव पक्ष के अधिवक्ता गवाह से जिरह के लिए अदालत में उपस्थित नहीं हुए।
उनकी ओर से जिरह स्थगित करते हुए अग्रिम तिथि की मांग कर स्थगन प्रार्थना पत्र अदालत में पेश किया गया। इसका अभियोजन की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रशांत कुमार मिश्रा व शशिभूषण सिंह चौहान ने विरोध किया।
अदालत में तर्क रखा कि अभियोजन गवाह से बचाव पक्ष की जिरह एक मार्च से शुरू हुई थी। वहीं बचाव पक्ष ने मामले को विलंबित करने के लिए एक अप्रैल, 30 मई व 3 जुलाई को स्थगन प्रार्थना पत्र दिए गए।
इन्हें अदालत ने स्वीकार कर बचाव पक्ष को जिरह के लिए पर्याप्त अवसर दिया गया। इसके बाद भी बचाव पक्ष ने गवाह से जिरह पूरी नहीं की। अभी मामले के अन्य आरोपियों की ओर से बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं को जिरह करनी है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रशांत कुमार मिश्रा ने बताया कि अभियोजन के तर्कों से सहमत होते हुए अदालत ने बचाव पक्ष से कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए प्रार्थना पत्र खारिज करते कर आरोपी राजेंद्र मिश्रा, सुरेश वर्मा व शिवम दलाल की जिरह के अवसर को समाप्त कर दिया है।
अदालत ने केस की अगली सुनवाई को 25 जुलाई की तिथि नियत की है। इस दौरान अभियोजन गवाह दरोगा कुंवरपाल व जेल से आए मामले के सभी आरोपी अदालत में उपस्थित रहे।
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इस पर अदालत ने सख्त नाराजगी जताते हुए बचाव पक्ष का प्रार्थना पत्र खारिज कर बचाव पक्ष की जिरह का अवसर समाप्त कर दिया। अब अदालत ने अन्य आरोपियों की ओर से जिरह के लिए 25 जुलाई की तिथि नियत की है।
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दो जुलाई 2020 को हुए बिकरू कांड के बाद पुलिस ने 45-50 लोगों के खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास समेत कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी। मामले की सुनवाई एंटी डकैती कोर्ट अमित मालवीय की अदालत में चल रही है।
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मामले में आरोपी राजेंद्र मिश्रा, सुरेश वर्मा व शिवम दलाल की ओर से बचाव पक्ष के अधिवक्ता संतोष कुमार बाजपेयी अभियोजन के पहले गवाह दरोगा कुंवरपाल से जिरह कर रहे हैं। मंगलवार को बचाव पक्ष के अधिवक्ता गवाह से जिरह के लिए अदालत में उपस्थित नहीं हुए।
उनकी ओर से जिरह स्थगित करते हुए अग्रिम तिथि की मांग कर स्थगन प्रार्थना पत्र अदालत में पेश किया गया। इसका अभियोजन की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रशांत कुमार मिश्रा व शशिभूषण सिंह चौहान ने विरोध किया।
अदालत में तर्क रखा कि अभियोजन गवाह से बचाव पक्ष की जिरह एक मार्च से शुरू हुई थी। वहीं बचाव पक्ष ने मामले को विलंबित करने के लिए एक अप्रैल, 30 मई व 3 जुलाई को स्थगन प्रार्थना पत्र दिए गए।
इन्हें अदालत ने स्वीकार कर बचाव पक्ष को जिरह के लिए पर्याप्त अवसर दिया गया। इसके बाद भी बचाव पक्ष ने गवाह से जिरह पूरी नहीं की। अभी मामले के अन्य आरोपियों की ओर से बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं को जिरह करनी है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रशांत कुमार मिश्रा ने बताया कि अभियोजन के तर्कों से सहमत होते हुए अदालत ने बचाव पक्ष से कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए प्रार्थना पत्र खारिज करते कर आरोपी राजेंद्र मिश्रा, सुरेश वर्मा व शिवम दलाल की जिरह के अवसर को समाप्त कर दिया है।
अदालत ने केस की अगली सुनवाई को 25 जुलाई की तिथि नियत की है। इस दौरान अभियोजन गवाह दरोगा कुंवरपाल व जेल से आए मामले के सभी आरोपी अदालत में उपस्थित रहे।