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Tannery Case: चूने और हाइड्रोजन सल्फाइड गैस से भरा था चैंबर, रात के अंधेरे में एक के बाद एक चली गईं जानें

Sun, 13 Nov 2022 09:44 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 13 Nov 2022 09:44 AM IST
सार

जाजमऊ स्थित टेनरी में तीन श्रमिकों की मौत के मामले में बड़ी लापरवाही सामने आई है। पुलिस की जांच में मजदूरों को जबरन उतारने की बात भी सामने आ रही है। वहीं, चैंबर चूने और हाइड्रोजन सल्फाइड गैस से भरा हुआ था।

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Big negligence came to the fore in Tannery accident in Kanpur
टेनरी हादसा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर के जाजमऊ में टेनरी के टैंक में तीन मजदूरों की जान जाने के मामले में कई लापरवाही सामने आई है। सबसे बड़ी लापरवाही यह बताई जा रही है कि यह सफाई रात के समय कराई गई। यदि सफाई का काम दिन में कराया गया होता, तो जब पहला मजदूर टैंक के अंदर दम घुटने से बेहोश हुआ तभी पता चल जाता।

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रात की वजह से मजदूर एक के बाद एक बेहोश होकर दम तोड़ते गए, बाहर ठेकेदार यह समझता रहा कि अंदर सफाई चल रही है। इसी तरह दूसरी लापरवाही यह बताई जा रही है कि अक्सर टेनरी के टैंक को साफ करने के लिए पहले केमिकल वाले पानी में सादा पानी बड़ी मात्रा में मिलाया जाता है।
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इससे उसमें जमी गैस बाहर निकल जाए। कहा जा रहा है कि अलग से पानी नहीं मिलाया गया था। इसी तरह जिस पानी से टेनरी में चमड़े की धुलाई की जाती है। उसे ही टेनरी के टैंक में इकट्ठा किया जाता है। इस पानी में बड़ी मात्रा में केमिकल होता है। जैसे चूना और हाइड्रोजन सल्फाइड, जो गैस भी बनाता है।

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ऐसा कहा जा रहा  है कि टैंक के पानी का केमिकल जमीन में बैठने न पाए इसलिए उसे प्रयोग में भी लगातार लिया जाता है। इस टेनरी में इस टैंक का पानी लंबे समय से नहीं निकाला गया। यही वजह है कि वह सूखकर जमीन की परत में जमा गया था। बंद होने की वजह से उसमें गैस भी भर गई थी। क्योंकि इसमें चूना भी मिला था।

इसलिए कहा जा रहा है कि वह सूखकर जमीन पर ही पत्थर जैसा हो गया था। उसे उखाड़ने के बाद और गैस पैदा हुई। जिससे मजदूर उसी में बेहोश होते चले गए। आखिर में उनकी मौत हो गई। अब जबकि मामले में मुकदमा दर्ज हो गया है तो टेनरी मालिक के साथ उन ठेकेदार से भी पूछताछ की जाएगी, जिसने सफाई का ठेका लिया था।

बता दें कि कानपुर शहर भले ही स्मार्ट सिटी में शामिल हो गया हो, लेकिन आज भी सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान मौतों का होना तकनीकी लिहाज से पिछड़ेपन को दिखाता है। पिछले दो माह से भी कम समय में नौ मौतें हुईं हैं। 18 सितंबर को बर्रा के मालवीय नगर में सेप्टिक टैंक में भी तीन मजदूरों की जहरीली गैस से मौत हो गई थी।

31 अक्तूबर को बिठूर के चकरतनपुर में तीन मजदूरों की मौत हुई। अब गुरुवार को टेनरी के वेस्ट टैंक की सफाई के दौरान तीन की जान चली गई। इस तरह की मौतों में पूरे देश में उत्तर प्रदेश सबसे आगे हैं। एक साल में 65 मौतें हुई हैं। देश में 10 साल में 660 लोगों की मौत हुई है।

टेनरियां पहले भी ले चुकी हैं जान

  • छह साल पहले बुढ़िया घाट स्थित अनीस टेनरी में गैस रिसाव से टेनरी मालिक समेत दो की मौत।
  • चार साल पहले जाजमऊ के अशर्फाबाद स्थित इंपैक्ट टेनरी में टैंक की सफाई के दौरान दो की मौत।
  • ढाई साल पहले इब्राहिम की शीतला बाजार स्थित टेनरी में जहरीली गैस के रिसाव से तीन मजदूरों की मौत।
  • दो साल पहले चकेरी के संजयनगर में मुन्ना लखपति की टेनरी में गैस रिसाव से दो कर्मचारियों की मौत।
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