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अस्पताल में नहीं मिला बेड, कोरोना से साहित्यकार दंपती की मौत, सांस लेने में थी दिक्कत, ऑक्सीजन की थी जरूरत
Fri, 16 Apr 2021 04:34 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 16 Apr 2021 04:34 PM IST
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मृतक पति पत्नी
- फोटो : amar ujala
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कानपुर में रह रहे सोरों (कासगंज) के साहित्यकार दंपती की ऑक्सीजन की मात्रा कम होने से कानपुर में मौत हो गई। मूलरूप से सोरों में रहने वाले साहित्यकार डॉ. रामकृष्ण शर्मा कासगंज के कोठीवाल आढ़तिया महाविद्यालय में हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष थे।
भतीजे नंद किशोर ने बताया कि सेवानिवृत्ति के बाद डॉ. रामकृष्ण पत्नी डॉ. विमलेश शर्मा के साथ कानपुर के तेजाब मिल कैंपस में रहते थे। डॉ. विमलेश कानपुर नगर पालिका डिग्री कॉलेज में हिंदी की एसोसिएट प्रोफेसर थीं। यहां रह रही भतीजी मीनू ने बताया कि 10 दिन पहले दोनों का टीकाकरण हुआ था।
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भतीजे नंद किशोर ने बताया कि सेवानिवृत्ति के बाद डॉ. रामकृष्ण पत्नी डॉ. विमलेश शर्मा के साथ कानपुर के तेजाब मिल कैंपस में रहते थे। डॉ. विमलेश कानपुर नगर पालिका डिग्री कॉलेज में हिंदी की एसोसिएट प्रोफेसर थीं। यहां रह रही भतीजी मीनू ने बताया कि 10 दिन पहले दोनों का टीकाकरण हुआ था।
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अगले दिन ही दोनों को सांस लेने में दिक्कत हुई। एंटीजन टेस्ट में दोनों निगेटिव निकले। चार दिन पहले बुखार और सांस की तकलीफ पर जीटी रोड स्थित रीवा अस्पताल में दोनों को भर्ती कराया था। इलाज के बाद फिर घर ले आए थे।
बुधवार को हालत बिगड़ने पर दोनों को फिर से रीवा अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां ऑक्सीजन स्तर गिरने के कारण उन्हें रेफर कर दिया गया। भतीजी कानपुर के कई अस्पतालों में उन्हें लेकर गई लेकिन कहीं बेड नहीं मिला।
पहले डॉ. रामकृष्ण की मौत हुई उसके कुछ देर बाद ही डॉ. विमलेश की मौत हो गई। मीनू के अनुसार उनकी दत्तक पुत्री आस्था व उनका भतीजा मोहित पुणे में हैं, लेकिन वे नहीं आ सके। यहां एक शोधार्थी छात्र रामेंद्र शुक्ला ही मौजूद था। कानपुर में ही दोनों का अंतिम संस्कार हुआ।
बुधवार को हालत बिगड़ने पर दोनों को फिर से रीवा अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां ऑक्सीजन स्तर गिरने के कारण उन्हें रेफर कर दिया गया। भतीजी कानपुर के कई अस्पतालों में उन्हें लेकर गई लेकिन कहीं बेड नहीं मिला।
पहले डॉ. रामकृष्ण की मौत हुई उसके कुछ देर बाद ही डॉ. विमलेश की मौत हो गई। मीनू के अनुसार उनकी दत्तक पुत्री आस्था व उनका भतीजा मोहित पुणे में हैं, लेकिन वे नहीं आ सके। यहां एक शोधार्थी छात्र रामेंद्र शुक्ला ही मौजूद था। कानपुर में ही दोनों का अंतिम संस्कार हुआ।