फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   BCA student acquitted in murder

‘हत्यारा बनाकर पुलिस ने एक साल जेल में रखा और बर्बाद कर दिया करियर, अब बनूंगा जज’

Fri, 29 Sep 2017 09:41 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Fri, 29 Sep 2017 09:41 AM IST
विज्ञापन
BCA student acquitted in murder
बरी छात्र जय प्रताप।

दस साल के बच्चे की हत्या में बीसीए छात्र को कानपुर कोर्ट ने दोषमुक्त करार दिया है। कोर्ट ने विवेचक के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीजीपी को पत्र भी लिखा है। यह छात्र बच्चे की हत्या के बाद से ही जेल में था। उसे जमानत तक नहीं मिली थी। वह एक साल जेल में रहा। गिरफ्तारी के समय भी छात्र और परिजन बार-बार कहते रहे कि उसे निर्दोष फंसाया जा रहा है, आला अफसरों से भी गुहार की लेकिन पुलिस ने किसी की नहीं सुनी और उसे ही हत्यारोपी बताते हुए जेल भेज दिया था। अब बरी होने के बाद छात्र ने कहा है कि पुलिस ने उसका करियर बर्बाद कर दिया। उसके जीवन का महत्वपूर्ण एक साल बर्बाद हो गया। अब वह पीसीएस जे की तैयारी करेगा। उसका मकसद जज बनकर लोगों को न्याय दिलाना होगा। 

विज्ञापन

 

गली में बरामद हुआ था बच्चे का शव

BCA student acquitted in murder
अपने परिजनों के साथ जय प्रताप

20 अगस्त 2016 को कानपुर जूही लाल कालोनी निवासी मेराजुल हक के दस साल के बेटे रेहान का शव मोहल्ले की ही एक गली में बरामद हुआ था। उसका गला रेता गया था। इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। अधिवक्ता शरद त्रिपाठी और नागेंद्र सिंह ने बताया कि इस मामले में किदवई नगर पुलिस ने 30 अगस्त 2016 को साकेत नगर कल्याण जी बेकरी के पास से जूही लाल कालोनी निवासी बीसीए छात्र जय प्रताप सिंह उर्फ मोहित की गिरफ्तारी दिखाई थी। जय प्रताप सिंह गोविंदनगर के एक इंस्टीट्यूट से बीसीए कर रहा था। बचाव पक्ष ने आरोपी को निर्दोष बताकर उस समय कोर्ट में अर्जी देकर जय प्रताप सिंह के नार्को टेस्ट की मांग की थी लेकिन इसे खारिज कर दिया गया था। हाईकोर्ट में अर्जी देकर सीबीआई जांच की भी मांग की गई थी। विवेचक हरी शंकर मिश्रा ने तब हाईकोर्ट में चार्जशीट दाखिल होने की बात कही थी। इस पर बचाव पक्ष की अर्जी खारिज हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट में जल्द मामले की सुनवाई की गुहार लगाई तो छह माह में मामले के निस्तारण का आदेश दिया गया था। 

 

कोर्ट ने जय प्रताप को दोषमुक्त करार दिया
अधिवक्ताओं ने बताया कि पुलिस ने गंगा बैराज के पास से गोताखोर रामबाबू और मो. निसार द्वारा आलाकत्ल चापड़ बरामद होने की बात कही थी, लेकिन यह दोनों कोर्ट में मुकर गए। उन्होंने विवेचक की बात पर सवालिया निशान लगा दिए थे। पुलिस ने उत्कर्ष और यशराज नामक दो बच्चों को गवाह बनाया था। इन दोनों ने भी कोर्ट में घटना देखने से इनकार किया था। वादी मृतक के पिता मेराजुल हक ने भी कोर्ट में कहा था कि वह जय प्रताप को नहीं जानता। पता नहीं, हत्या किसने की है। गवाहों और सबूतों के आधार पर कोर्ट ने जय प्रताप को दोषमुक्त करार दिया। कोर्ट ने विवेचक हरी शंकर मिश्र के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीजीपी को पत्र लिखा है।

छात्र का करियर तबाह, क्लेम मांगेंगे
दस साल के बालक की हत्या में बरी होने के बाद जय प्रताप के अधिवक्ता नागेंद्र सिंह ने कहा कि पुलिस की लापरवाही से बेकसूर छात्र को एक साल जेल में रहना पड़ा। उसका करियर और जीवन का अहम समय बर्बाद हो गया। इसकी दोषी सीधे-सीधे पुलिस है। अब जय प्रताप को क्लेम दिलाने के लिए कोर्ट में अर्जी देंगे।

क्लेम के लिए मानवाधिकार आयोग जा सकता
वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेश सिंह चौहान और शिवाकांत दीक्षित का कहना है कि दोषमुक्त साबित हुआ छात्र मानवाधिकार आयोग में क्लेम के लिए जा सकता है। विवेचक के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की जा सकती है।

पिता बोले, शुक्र है कोर्ट से न्याय मिला 
जय प्रताप के पिता भगवान सिंह सेंगर सेना में वारंट अफसर हैं। वे दिल्ली में तैनात हैं। उनका कहना है कि पुलिस जानती थी कि उनका बेटा बेकसूर है फिर भी उसे फंसाया गया। भगवान का शुक्र है कि कोर्ट से न्याय मिला। उनकी पत्नी कृष्णा का एक साल रोते-रोते बीता है। बड़ा बेटा रोहित सिंह और बेटी ज्योति भी मानसिक तनाव से गुजरी। अब वकीलों से क्लेम और दोषी पुलिसकर्मियों को सजा दिलाने के लिए सलाह करेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed