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Kanpur News: बीहड़ में हर ओर दिख रहे बया के घोंसले, मादा तलाश रहीं सबसे खूबसूरत घोंसला
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इटावा/चकरनगर। बया चिडि़या को पक्षियों का वास्तुकार कहा जाता है। बया का बनाया गया घोंसला किसी वास्तुकला से कम नहीं होता है। जिले के इटावा सफारी पार्क के साथ बढ़पुरा व चकरनगर क्षेत्र के बीहड़ में बबूल के कंटीले पेड़ों पर इन दिनों बड़ी संख्या में बया के खूबसूरत घोंसले लटके दिखाई देने लगे हैं। अगस्त से अक्तूबर माह तक इनका प्रजनन काल होता है, इसलिए नर बया बारीक बुनाई वाले घोंसले तैयार कर रहे हैं। यह घोंसले नारियल की तरह उल्टे लटके हुए नजर आतें हैं। बीहड़ क्षेत्र में इस समय बया के अनगिनत घोंसले ग्रामीणों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। यह नजारा न सिर्फ प्राकृतिक खूबसूरती का प्रतीक है बल्कि पक्षियों की अद्भुत कला का भी सजीव उदाहरण है।
जुगनुओं से जगमगाते हैं घोंसले
नर बया प्रतिदिन 100 से 500 बार तिनके लाने के लिए जाते हैं। वह अपनी छोटी चोंच से गांठ लगाते हुए घोंसले की बुनाई करते हैं। तालाब से गीली मिट्टी लाकर वह ऊपरी हिस्से में चिपकाते हैं। रात के समय घोंसले में रोशनी रहे इसके लिए जुगनू को घोंसले की गीली मिट्टी में चिपका देते हैं। इससे घोंसले रोशनी से जगमगाते हैं। घोंसला तैयार होने पर कई नर उसे पीले फूलों से भी सजाते हैं और मादा को आमंत्रित करते हैं। यदि मादा को घोंसला पसंद आता है तो वह जोड़ा बनाती है। जोड़ा न बन पाने पर नर खुद ही घोंसले को नष्ट कर देता है।
तीस दिन में उड़ने लगते हैं बया के बच्चे
मादा बया एक बार में तीन से सात अंडे देती है। लगभग 13 से 15 दिन में बच्चे अंडों से निकल आते हैं और 25 से 30 दिन में उड़ने लायक हो जाते हैं। बया का यह जीवनचक्र प्राकृतिक संतुलन में अहम योगदान देता है। नर और मादा बया का स्वरूप वयस्क होने से पहले लगभग समान होता है। लेकिन वयस्क नर के सिर और गर्दन का निचला हिस्सा चमकीला पीला हो जाता है, जबकि मादा का रंग सफेद रहता है। बया सामूहिक रूप से रहना पसंद करतीं हैं, इसलिए एक ही पेड़ पर दर्जनों घोंसले लटके देखे जा सकते हैं।
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जुगनुओं से जगमगाते हैं घोंसले
नर बया प्रतिदिन 100 से 500 बार तिनके लाने के लिए जाते हैं। वह अपनी छोटी चोंच से गांठ लगाते हुए घोंसले की बुनाई करते हैं। तालाब से गीली मिट्टी लाकर वह ऊपरी हिस्से में चिपकाते हैं। रात के समय घोंसले में रोशनी रहे इसके लिए जुगनू को घोंसले की गीली मिट्टी में चिपका देते हैं। इससे घोंसले रोशनी से जगमगाते हैं। घोंसला तैयार होने पर कई नर उसे पीले फूलों से भी सजाते हैं और मादा को आमंत्रित करते हैं। यदि मादा को घोंसला पसंद आता है तो वह जोड़ा बनाती है। जोड़ा न बन पाने पर नर खुद ही घोंसले को नष्ट कर देता है।
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तीस दिन में उड़ने लगते हैं बया के बच्चे
मादा बया एक बार में तीन से सात अंडे देती है। लगभग 13 से 15 दिन में बच्चे अंडों से निकल आते हैं और 25 से 30 दिन में उड़ने लायक हो जाते हैं। बया का यह जीवनचक्र प्राकृतिक संतुलन में अहम योगदान देता है। नर और मादा बया का स्वरूप वयस्क होने से पहले लगभग समान होता है। लेकिन वयस्क नर के सिर और गर्दन का निचला हिस्सा चमकीला पीला हो जाता है, जबकि मादा का रंग सफेद रहता है। बया सामूहिक रूप से रहना पसंद करतीं हैं, इसलिए एक ही पेड़ पर दर्जनों घोंसले लटके देखे जा सकते हैं।
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