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कानपुर: लॉकर पीड़ितों को राहत देने की तैयारी में बैंक, 850 ग्राम सोने के बराबर हो सकता है भुगतान

Sun, 24 Apr 2022 08:58 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sun, 24 Apr 2022 08:58 PM IST
सार

बैंक प्रबंधन की ओर से मुआवजा लेने के बाद कोई भी पीड़ित बरामद माल से अपने गहनों के लिए कोई दावा नहीं करेगा। शपथ पत्र पर पीड़ितों ने इस पर सहमति जताई है। ऐसे में प्रबंधन बरामद माल से अपनी भरपाई कर सकेगा।

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Banks preparing to give relief to the locker victims of the Central Bank
बैंक लॉकर से जेवर गायब होने का मामला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया कराचीखाना के लॉकरों से चोरी हुए गहनों के मामले में पीड़ितों को लखनऊ में सोमवार को होने वाली बैठक में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। दरअसल, बैंक इन पीड़ितों को मुआवजा देने की तैयारी में है। किस नियम के तहत मुआवजा दिया जाए, बैठक में इसे अंतिम रूप दिया जाना है।

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माना जा रहा कि अधिकतम 850 ग्राम सोने का मुआवजा दिया जाएगा। बैठक महानिदेशक संस्थागत वित्त बीमा एवं बाह्य सहायतित परियोजना शिव सिंह यादव, बैंक अफसरों और लॉकर न्याय समिति के सदस्यों के साथ होनी है। पीड़ितों ने तीन करोड़ 78 लाख के नुकसान का दावा किया है।
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11 पीड़ितों ने शनिवार शाम को शपथ पत्र पर बैंक के लॉकर से गहने और कैश चोरी होने संबंधी जानकारी बैंक प्रबंधन को उपलब्ध करा दी थी। इसमें मंजू भट्टाचार्य ने 30 लाख, महेंद्र सविता ने दो लाख, एसके पोद्दार ने 30 लाख, राजाबेटी गुप्ता ने 35 लाख, निर्मला तहलियानी ने 35 लाख, अमिता गुप्ता ने 43 लाख 56 हजार, मीना यादव ने 80 लाख, सीता गुप्ता ने 20 लाख, सुशीला शर्मा ने 42 लाख, पंकज गुप्ता ने 35 लाख, वैभव माहेश्वरी ने 25 लाख के नुकसान की जानकारी दी है।

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सूत्रों के अनुसार बैंक प्रबंधन मुआवजा देने पर सहमत है। बताया गया कि अभी बैंक प्रत्येक पीड़ित को आधा किलो सोने के बराबर भुगतान की बात कह रहा है। ऐसे में एक पीड़ित को सोने की मौजूदा कीमत के तहत अधिकतम 27 लाख ही मुआवजा मिल सकता है। इससे उन्हें नुकसान होगा।

ऐसे में प्रत्येक को 850 ग्राम सोने के बराबर मूल्य के भुगतान पर सहमति बन सकती है। इससे 10 पीड़ितों को लगभग नुकसान की भरपाई हो जाएगी। केवल एक पीड़ित का 80 लाख का सामान चोरी हुआ है। इसके लिए कई और विकल्प हो सकते हैं। स्त्री धन के मुताबिक ही भुगतान का फार्मूला तय होना माना जा रहा है।

बरामद माल पर नहीं होगा कोई दावा
सूत्रों ने बताया कि बैंक प्रबंधन की ओर से मुआवजा लेने के बाद कोई भी पीड़ित बरामद माल से अपने गहनों के लिए कोई दावा नहीं करेगा। शपथ पत्र पर पीड़ितों ने इस पर सहमति जताई है। ऐसे में प्रबंधन बरामद माल से अपनी भरपाई कर सकेगा। इसके साथ ही आरोपी बैंक मैनेजर और लॉकर इंचार्ज की व्यक्तिगत संपत्ति से नुकसान की भरपाई की जाएगी। उनकी सैलरी, पेंशन, पीएफ का फंड सीज किया जाएगा।

स्थानीय स्तर पर नहीं बनी फार्मूले पर सहमति 
लॉकर न्याय संघर्ष समिति के संयोजक अभिमन्यु गुप्ता ने बताया कि रविवार को उनकी सेंट्रल बैंक के अधिकारियों के साथ पीड़ित ग्राहकों के नुकसान की भरपाई करने को लेकर कई दौर में बातचीत हुई। भरपाई के फार्मूले पर सहमति नहीं बन सकी। अब इसे लेकर सोमवार को महानिदेशक संस्थागत वित्त, बीमा एवं वाह्य सहायतित परियोजना (यूपी सरकार) शिव यादव व बैंक अधिकारियों संग बैठक होगी। नुकसान की भरपाई पर अंतिम निर्णय अधिकारियों और समिति के पदाधिकारियों की वार्ता के बाद लिया जाएगा। 48 घंटे में निर्णय न होने पर पीड़ितों के साथ खून से पत्र लिख कर सत्याग्रह करने की बात कही। 
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