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रिजर्व बैंक पर फोड़ा बर्बादी का ठीकरा
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रिजर्व बैंक पर फोड़ा बर्बादी का ठीकरा
पीपुल्स कोऑपरेटिव बैंक प्रबंधन ने पत्र भेज मीडिया में रखा अपना पक्ष
कानपुर। आर्य नगर स्थित पीपुल्स कोऑपरेटिव बैंक के प्रबंधन ने जनता के जमा धन की निकासी न हो पाने के पीछे परिस्थितियों को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही यह भी खुलासा किया है कि जमा धन और ऋण की रकम का अनुपात लगातार बढ़ने की सूचना रिजर्व बैंक को दी जाती रही। लेकिन वहां से कोई दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुआ। बैंक के सचिव राजीव अवस्थी ने सोमवार को पत्र भेजकर मीडिया में अपना पक्ष रखा।
उन्होंने बताया कि रिजर्व बैंक व सहकारिता विभाग से कभी कोई तथ्य नहीं छिपाया गया। रिजर्व बैंक को यदि बैंक की हालत खराब लग रही थी तो पहले ही प्रतिबंध लगा देने चाहिए थे। आखिरकार यह दिन आया जब जमाधन दे पाने में भी बैंक सक्षम नहीं रहा। इसकी सूचना भी रिजर्व बैंक को भेजी गई लेकिन अभी तक कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। बीते तीन साल से बैंक से लगातार जमाधन की निकासी होती रही। इससे जमा कम हुआ और ऋण का अनुपात बढ़ता गया। फरवरी 2019, मार्च 2019 में रिजर्व बैंक को सूचित किया गया। इसके बाद सितंबर 2019 में महाराष्ट्र के पीएमसी बैंक प्रकरण के बाद लोगों ने जमा धन और तेजी से निकाला। नवंबर 2019 में फिर रिजर्व बैंक को बताया गया तो अधिकारियों ने बैंक का निरीक्षण किया। सारी स्थिति से अवगत होने के बाद भी कोई निर्देश नहीं दिया गया। उधर, यस बैंक संकट और कोरोना महामारी की वजह से भी जमाधन की लगातार निकासी हुई। इससे बैंक की हालत ज्यादा खराब हो गई।
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पीपुल्स कोऑपरेटिव बैंक प्रबंधन ने पत्र भेज मीडिया में रखा अपना पक्ष
कानपुर। आर्य नगर स्थित पीपुल्स कोऑपरेटिव बैंक के प्रबंधन ने जनता के जमा धन की निकासी न हो पाने के पीछे परिस्थितियों को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही यह भी खुलासा किया है कि जमा धन और ऋण की रकम का अनुपात लगातार बढ़ने की सूचना रिजर्व बैंक को दी जाती रही। लेकिन वहां से कोई दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुआ। बैंक के सचिव राजीव अवस्थी ने सोमवार को पत्र भेजकर मीडिया में अपना पक्ष रखा।
उन्होंने बताया कि रिजर्व बैंक व सहकारिता विभाग से कभी कोई तथ्य नहीं छिपाया गया। रिजर्व बैंक को यदि बैंक की हालत खराब लग रही थी तो पहले ही प्रतिबंध लगा देने चाहिए थे। आखिरकार यह दिन आया जब जमाधन दे पाने में भी बैंक सक्षम नहीं रहा। इसकी सूचना भी रिजर्व बैंक को भेजी गई लेकिन अभी तक कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। बीते तीन साल से बैंक से लगातार जमाधन की निकासी होती रही। इससे जमा कम हुआ और ऋण का अनुपात बढ़ता गया। फरवरी 2019, मार्च 2019 में रिजर्व बैंक को सूचित किया गया। इसके बाद सितंबर 2019 में महाराष्ट्र के पीएमसी बैंक प्रकरण के बाद लोगों ने जमा धन और तेजी से निकाला। नवंबर 2019 में फिर रिजर्व बैंक को बताया गया तो अधिकारियों ने बैंक का निरीक्षण किया। सारी स्थिति से अवगत होने के बाद भी कोई निर्देश नहीं दिया गया। उधर, यस बैंक संकट और कोरोना महामारी की वजह से भी जमाधन की लगातार निकासी हुई। इससे बैंक की हालत ज्यादा खराब हो गई।
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