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Bangladeshi citizen: डॉ. रिजवान से वसूली की जांच डीसीपी क्राइम को, एडिशनल डीसीपी व एक इंस्पेक्टर पर है आरोप

Sun, 08 Jan 2023 02:52 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sun, 08 Jan 2023 02:52 PM IST
सार

पुलिस ने 11 दिसंबर को डॉ. रिजवान व उसके परिवारीजनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। आरोपी अवैध तरीके से फर्जी दस्तावेज बनाकर शहर में रह रहे थे। खुलासा हुआ कि रिजवान के बारे में एक एडीसीपी व इंस्पेक्टर को लंबे समय से जानकारी थी, लेकिन उस पर कार्रवाई नहीं की। एक बिचौलिए के जरिये उससे बड़ी वसूली की गई।

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Bangladeshi citizen case: Investigation of recovery from Dr. Rizwan to DCP Crime
बांग्लादेशी नागरिक डॉ. रिजवान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बांग्लादेशी नागरिक डॉ. रिजवान से कथित वसूली के मामले की जांच डीसीपी क्राइम को सौंपी गई है। उन्होंने तथ्य जुटाने शुरू कर दिए हैं। एक एडिशनल डीसीपी व एक इंस्पेक्टर जांच की जद में हैं। जांच पूरी होने के बाद जो तथ्य सामने आएंगे, उस आधार पर कार्रवाई होगी।

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पुलिस ने 11 दिसंबर को बांग्लादेशी नागरिक डॉ. रिजवान व उसके परिवारीजनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। आरोपी अवैध तरीके से फर्जी दस्तावेज बनाकर शहर में रह रहे थे। खुलासा हुआ कि रिजवान के बारे में एक एडीसीपी व इंस्पेक्टर को लंबे समय से जानकारी थी, लेकिन उस पर कार्रवाई नहीं की।
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एक बिचौलिए के जरिये उससे बड़ी वसूली की गई। शुरुआत में मामले को दबाने का प्रयास किया गया लेकिन अब उसमें जांच के आदेश हो गए हैं। पुलिस कमिश्नर बीपी जोगदंड ने डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल को जांच दी है। सर्विलांस की मदद से जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। 

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बिचौलिये का बड़ा खेल, कस सकता है शिकंजा 
वसूली कराने में जिस बिचौलिए का नाम सामने आ रहा है, उसको पहले से पता था कि रिजवान बांग्लादेशी है। जानकारी के मुताबिक करीब सात-आठ महीने पहले एक क्लब में हुई पार्टी से बिचौलिए की पत्नी को इस बारे में पता चला था। अफसरों के मुताबिक इसी शख्स ने मामले का अब खुलासा कराया है। सवाल है कि आखिर इतने दिनों तक वह खामोश क्यों रहा। यहीं से शक गहरा जाता है। आशंका है कि वह वसूली करता रहा। पुलिस उसमें शामिल हुई। जब वसूली का खेल बिगड़ा तो रिजवान को पकड़वा दिया। अगर जांच में इससे संबंधित साक्ष्य मिले तो इस पर भी शिकंजा कसना तय है। 

सुबूत मिले तो होगी विस्तृत जांच
पुलिस सूत्रों के मुताबिक बिचौलिए के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल निकाली जा रही है, जिससे पता चल सके कि संबंधित पुलिसकर्मी उसके संपर्क में थे या नहीं। साथ ही लोकेशन भी देखी जाएगी कि वह पुलिसकर्मियों के साथ कब कब रहा? इन्हीं तथ्यों के आधार पर जांच होगी। अगर सुबूत पाए जाते हैं तो फिर विस्तृत जांच होगी। 
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