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बांगरमऊ उपचुनाव: भाजपा को सपा ने दी टक्कर, नहीं खत्म हुआ बसपा का वनवास, 1996 व 2002 ‘चिंघाड़ा’ था हाथी

Thu, 12 Nov 2020 01:02 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Thu, 12 Nov 2020 01:02 PM IST
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Bangarmau by-election: SP's fight with BJP, BSP's exile did not end, 1996 and 2002 'Chinghada' was elephant
बसपा प्रमुख मायावती - फोटो : अमर उजाला
उन्नाव की बांगरमऊ विधानसभा के वोटरों ने कमोबेश हर छोटे, बड़े दल को मौका दिया। इसमें सबसे ज्यादा कांग्रेस को जनता का प्यार मिला और पार्टी को पांच बार बांगरमऊ का प्रतिनिधित्व करने का सम्मान हासिल हुआ। दूसरे नंबर पर समाजवादी पार्टी रही। साइकिल वाली पार्टी (सपा) के उम्मीदवारों को तीन बार जनता ने सिर आंखों पर बिठाया।
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तीसरे नंबर पर रही बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को यहां के वोटरों ने लगातार दो चुनावों में भारी मतों से जिताकर विधानसभा भेजा। हालांकि इसके बाद पार्टी जीत को तरस गई। हार का यह क्रम उपचुनाव में भी नहीं टूटा और इस चुनाव में पार्टी प्रत्याशी की जमानत जब्त होने से बसपा हाशिये पर पहुंच गई। देश की आजादी के बाद 1962 में बांगरमऊ विधानसभा अस्तित्व में आई।
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इसके बाद से अब तक 15 चुनाव हो चुके हैं। इस विधानसभा की जनता ने किसी भी पार्टी को निराश नहीं किया है। प्रमुख दलों के साथ, साथ छोटी पार्टियों को भी सिर आंखों पर बिठाया। जब जब कोई पार्टी जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी तो उसे नकारने में भी समय नहीं लगाया। इसमें बहुजन समाज पार्टी भी शामिल रही।
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Bangarmau by-election: SP's fight with BJP, BSP's exile did not end, 1996 and 2002 'Chinghada' was elephant
बांगरमऊ उपचुनाव में जीते से भाजपा प्रत्याशी श्रीकांत कटियार - फोटो : अमर उजाला
बसपा को यहां के वोटरों ने दो बार पसंद किया और लगातार दो चुनावों में पार्टी प्रत्याशी को जिताकर विधानसभा भेजा। हालांकि इसके बाद बांगरमऊ की जनता ने बसपा से ऐसा किनारा किया कि तबसे आज तक पार्टी इस सीट से पर जीत को तरस गई। बसपा ने 1989 के विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरी। पार्टी से अब्दुल जाहिद चुनावी ‘जंग’ लड़ने उतरे पर जनता ने उन्हें नकार दिया।

इसी कारण बसपा उम्मीदवार को मात्र 2334 वोट ही मिले और तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। 1991 के चुनाव में फिर पार्टी ने उम्मीदवार उतारा। इस बार शमशाद खान मैदान में थे। हालांकि जनता का प्यार फिर भी उन्हें नहीं मिला। इसके चलते शमशाद 3757 वोट पाकर पांचवे स्थान पर पहुंच गए। फिर 1996 का चुनाव आया। इस चुनाव में रामशंकर पाल बसपा से चुनावी मैदान में ताल ठोंकने उतरे।

उस बार जनता ने पार्टी को प्रमुखता दी और पाल 45263 वोट पाकर विधायक बने। पहली बार इस विधानसभा सीट पर बसपा का खाता खोलने का रामशंकर पाल को इनाम भी मिला और उन्हें सरकार में मंत्री बनाया गया। 2002 के चुनाव में फिर रामशंकर पाल बसपा से चुनावी मैदान में उतरे।

Bangarmau by-election: SP's fight with BJP, BSP's exile did not end, 1996 and 2002 'Chinghada' was elephant
बांगरमऊ सीट पर भाजपा प्रत्याशी के नामांकन भरने के दौरान साक्षी महाराज - फोटो : amar ujala
इस बार भी लोगों ने उन्हें चुना और पाल 43934 वोट पाकर दूसरी बार विधानसभा पहुंचे। हालांकि इसके बाद बसपा इस सीट पर जीत के लिए तरस गई। मंगलवार को संपन्न हुए उपचुनाव में भी पार्टी को जीत को दूर जमानत तक बचाना मुश्किल हो गया। 16वें विधानसभा चुनाव में जीत हासिल न हो पाने से पार्टी का वनवास एक बार फिर बढ़ गया। 

दो चुनावों में दूसरी नंबर पर रही पार्टी
2007 के चुनाव में फिर रामशंकर पाल हाथी के साथी होकर मैदान में उतरे। पर इस बार जनता ने उन्हें नकार दिया। जिसके चलते वह दूसरे नंबर पर पहुंच गए। 2012 में बसपा ने मो. इरशाद खान को मैदान में उतारा। हालांकि वह भी सीट नहीं जीत सके और दूसरे स्थान पर ही रहे। 2017 में भी बसपा को इस सीट से मायूसी ही हाथ लगी। 

41.32 प्रतिशत वोट पाकर श्रीकांत रहे अव्वल
बांगरमऊ उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी श्रीकांत कटियार कुल मतों 172733 में 71381 यानि 41.32 प्रतिशत वोट पाकर अव्वल रहे। कांग्रेस उम्मीदवार आरती बाजपेयी को 39983 वोट मिले। जो कुल मतों का 23.14 फीसदी रहा। इसके अलावा सपा को 20.45 (35322) और बसपा को 11.04 प्रतिशत (19062) मतों से ही संतोष करना पड़ा।
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