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मचान विधि से लौकी उगा समृद्ध हुए बाबूलाल

Mon, 21 Sep 2020 12:48 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 21 Sep 2020 12:48 AM IST
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Babulal became rich by growing gourd with scaffolding method
फरीदपुर निटर्रा गांव में लौकी की लंबाई नापता किसान। - फोटो : AKBARPUR
कानपुर देहात। फरीदपुर निटर्रा गांव के बाबू लाल निषाद ने मचान विधि से लौकी की खेती कर अच्छी आमदनी की है। उन्नत किस्म की लौकी की बीज से 70 दिन में साढ़े चार फीट लंबाई की लौकियां तैयार हुईं। इससे उनकी आमदनी दो से तीन गुना बढ़ गई है। अधिकारियों ने भी किसान की हौसला आफजाई की है। सब्जी की खेती के साथ वह इसी भूमि पर सहखेती में हल्दी की फसल तैयार कर रहे हैं।
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सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने पर जोर दे रही है। वहीं, संदलपुर के फरीदपुर निटर्रा गांव के बाबू लाल ने बिना किसी सरकारी सहायता के सब्जी व मसाले की खेती कर खुद को समृद्ध किया है। बाबू लाल निषाद ने बताया कि उसके पास दस बीघा खेत है। तीन बीघा भूमि पर वह परंपरागत खेती करते हैं। बाकी अधिकतर खेत में सब्जी व फूल की खेती करते हैं। उन्होंने जून में एक बिस्वा खेत में हल्दी की फसल बोई थी। वहीं, जुलाई में सह खेती के तहत उसी खेत में मचान विधि से उन्नतशील नरेंद्र शिवनी लौकी का बीज बोया। अब लौकी की फसल तैयार हो गई है। उन्होंने बताया कि व्यापारी खेत में आकर लौकी खरीद रहे हैं। रोजाना दो से तीस सौ रुपये की आमदनी हो रही है। हल्दी की फसल भी अच्छी तैयार हुई है। वह कहते हैं कि एक बिस्वा में हल्दी की फसल अच्छी हुई तो तीन क्विंटल उत्पादन होगा। करीब 30 से 35 हजार रुपये में बिक जाएगी। बताया कि सब्जी व मसाले की खेती से काफी आमदनी हुई। इसके चलते अब खाली पड़े खेत में अन्य प्रकार की सब्जी व मसालों की खेती का मन है।
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दूर-दूर से लोग आ रहे सीखने
कानपुर देहात। फरीदपुर निटर्रा गांव के बाबू लाल की खेती करने के तरीके को लोग खूब सराह रहे हैं। केवल 70 दिन में लौकी की उम्दा फसल तैयार की है। जो आस-पास क्षेत्र में नजीर बनी है। आसपास के किसान रोजाना बाबू लाल के पास खेती के गुर सीखने आ रहे हैं।
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मचान विधि से यह हैं फायदे
-35 फीसदी उत्पादन बढ़ता है।
- ज्यादा दिन तक फसल खेत में बनी रहती है।
- नीचे खाली खेत में अन्य फसल कर सकते हैं।
-कीड़े लगने की आशंका कम रहती है।
- दवा छिड़काव में आसानी होती है व खर्चा कम होता है।
जिले में इस मचान विधि से सौ से अधिक किसान खेती कर रहे हैं। इससे किसानों की आय पहले से बढ़ी है। इस विधि से खेती करने के लिए सरकार जोर दे रही है।- सुभाष चंद्र, जिला उद्यान अधिकारी
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