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घरेलू हिंसा, दहेज कानून के प्रति जागरूक किया
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर देहात
Updated Mon, 09 Mar 2015 12:52 AM IST
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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर जिला जेल माती में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण
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की ओर से संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान महिला बंदियों को महिला
उत्पीड़न, दहेज प्रथा, विवाह कानून, भरण-पोषण सहित उनके अधिकारों की
जानकारी दी गई। इस दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट ने महिला बंदियों की समस्याएं
सुनी।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष रवींद्रनाथ मिश्रा व सचिव अपर सिविल जज मोहिंदर कुमार के निर्देशन में माती जेल में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
इस दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट सुनीता शर्मा ने महिला बंदियों को विधिक अधिकारों, घरेलू हिंसा से बचाव के तरीके, दहेज कानून, विवाह, भरण पोषण सहित अन्य विधिक जानकारियां देते हुए कहा कि विवाह के समय दहेज लेना व देना अपराध माना जाता है। हमें दहेजरहित स्वस्थ समाज का निर्माण करना होगा।
उन्होंने बताया कि जिन महिला बंदियों के वाद न्यायालय में विचाराधीन हैं। और किसी कारणवश वह अधिवक्ता नहीं कर पा रही हैं। ऐसी महिला बंदियों के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से निशुल्क अधिवक्ता की नियुक्ति की जाती है। जिसका लाभ उठाया जा सकता है।
इसी क्रम में जेलर श्रीप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि भारत में प्रतिवर्ष अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। जिसे मात्र औपचारिकता नहीं मानना चाहिए। महिला दिवस सशक्तीकरण की दिशा में एक ठोस प्रयास है। किसी भी समाज में महिलाओं का विकास ही उस देश और समाज के वास्तविक विकास को दर्शाता है।
इसी क्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अधिवक्ता जितेंद्र प्रताप सिंह चौहान ने बताया कि कानून की जानकारी होना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। महिलाओं को सुरक्षित समाज देने के लिए सरकार पर्याप्त कदम उठा रही है।
महिलाओं का सर्वांगीण विकास ही महिला सशक्तीकरण की ओर से बढ़ रहे प्रयासों को पंख लगा सकता है।
इस दौरान अधिवक्ता जितेंद्र सिंह चौहान, डिप्टी जेलर सुशील शर्मा, शिवदास वर्मा, कृष्णचंद्र मोहन उपस्थित रहे।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष रवींद्रनाथ मिश्रा व सचिव अपर सिविल जज मोहिंदर कुमार के निर्देशन में माती जेल में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
इस दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट सुनीता शर्मा ने महिला बंदियों को विधिक अधिकारों, घरेलू हिंसा से बचाव के तरीके, दहेज कानून, विवाह, भरण पोषण सहित अन्य विधिक जानकारियां देते हुए कहा कि विवाह के समय दहेज लेना व देना अपराध माना जाता है। हमें दहेजरहित स्वस्थ समाज का निर्माण करना होगा।
उन्होंने बताया कि जिन महिला बंदियों के वाद न्यायालय में विचाराधीन हैं। और किसी कारणवश वह अधिवक्ता नहीं कर पा रही हैं। ऐसी महिला बंदियों के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से निशुल्क अधिवक्ता की नियुक्ति की जाती है। जिसका लाभ उठाया जा सकता है।
इसी क्रम में जेलर श्रीप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि भारत में प्रतिवर्ष अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। जिसे मात्र औपचारिकता नहीं मानना चाहिए। महिला दिवस सशक्तीकरण की दिशा में एक ठोस प्रयास है। किसी भी समाज में महिलाओं का विकास ही उस देश और समाज के वास्तविक विकास को दर्शाता है।
इसी क्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अधिवक्ता जितेंद्र प्रताप सिंह चौहान ने बताया कि कानून की जानकारी होना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। महिलाओं को सुरक्षित समाज देने के लिए सरकार पर्याप्त कदम उठा रही है।
महिलाओं का सर्वांगीण विकास ही महिला सशक्तीकरण की ओर से बढ़ रहे प्रयासों को पंख लगा सकता है।
इस दौरान अधिवक्ता जितेंद्र सिंह चौहान, डिप्टी जेलर सुशील शर्मा, शिवदास वर्मा, कृष्णचंद्र मोहन उपस्थित रहे।