अवनीश के कबूलनामे: मजदूर ही नहीं लगाती थी फर्म, बागेश्वर बाबा की कथा के रुपयों से खरीदी फॉर्च्यूनर, ये भी कहा
Kanpur News: कस्टडी रिमांड में चल रहे अवनीश ने कहा कि 235 रुपये में मजदूर नाले में नहीं उतरते थे। ऐसे में जितने मिलते थे, उन्हीं से काम चलाया जाता था। वहीं, ये भी बताया कि बागेश्वर बाबा की कथा के नाम पर जुटाए रुपयों से दो फॉर्च्यूनर खरीद डाली, क्योंकि कथा निरस्त हो गई थी।
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कानपुर में पुलिस कस्टडी रिमांड के 9वें दिन पूछताछ में अवनीश दीक्षित ने शहर के नाले साफ न होने की वजह से पर्दा उठाया। पुलिस के मुताबिक अवनीश ने बताया कि नाला सफाई के लिए मजदूरों को 235 रुपये मिलते हैं। इतने कम पैसे में ज्यादातर मजदूर नाले में उतरने को तैयार नहीं होते।
इस वजह से जितने भी मजदूर मिलते थे, उनसे सफाई कराई जाती थी। यही वजह रही कि नाले पूरी तरह से साफ नहीं हो पाते। अवनीश ने यह भी बताया कि मजदूर कम होते थे पर ज्यादा दिखाकर पैसा लिया जाता था। नाला सफाई का ठेका श्री बालाजी मल्टी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड पिछले 20 सालों से लेती आ रही है।
इसमें तीन निदेशकों के नाम सामने आए हैं। इनमें एडवोकेट सुनील शुक्ला उर्फ जीतू, उसकी पत्नी और अवनीश दीक्षित की पत्नी प्रतिमा दीक्षित शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक अवनीश अपने प्रभाव के दम पर सालों से इस फर्म को नाला सफाई का ठेका दिलाता आ रहा था।
एडीसीपी सेंट्रल की टीम कर रही है जांच
सुनील की ही दूसरी फर्म बालाजी इंजीनियरिंग वर्क्स केस्को में मैन पॉवर उपलब्ध कराती थी। इसी फर्म ने केस्को के संविदा कर्मचारियों के 70 लाख रुपये के पीएफ का घोटाला किया है। इसकी जांच एडीसीपी सेंट्रल महेश कुमार की टीम कर रही है।
सुनील को दिलवाता था काम, एवज में मिलते थे रुपये
अवनीश से उसके और सुनील शुक्ला से संबंधों के बारे में पूछा गया, तो रिश्तेदार बताया। कहा कि रिश्तेदारी के चलते उसका और सुनील का लेनदेन चलता था। पुलिस ने पूछा कि सुनील की फर्मों से उसके खातों में पैसा क्यों आता था। तो अवनीश ने बताया कि सुनील की फर्म को वह काम दिलाता था, उसके एवज में सुनील अपनी फर्म के खाते से रुपये डालता था।
बागेश्वर बाबा की कथा के रुपयों से दो फॉर्च्यूनर खरीद डाली
वहीं, अवनीश दीक्षित ने पिछले साल खरीदी गई फॉर्च्यूनर कार के रहस्य से भी पर्दा उठाया। पुलिस के मुताबिक अवनीश ने बताया कि बागेश्वर धाम के बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा कानपुर देहात में होनी थी। इसमें तमाम मदों में ठेका देने के नाम पर बड़े कारोबारियों से रुपये लिए गए थे।
बोला- एक गाड़ी सुनील शुक्ला के पास और एक उसके पास
सुनील शुक्ला भी साझेदार था। कानपुर देहात के प्रशासन ने अनुमति नहीं दी थी, इस वजह से कथा निरस्त हो गई थी। जो रुपये जुटाए गए थे, उससे दो फॉर्च्यूनर कार खरीदी गईं। एक उसके पास है और एक सुनील शुक्ला के पास। कुछ और लेनदेन का हिसाब जब पुलिस ने मांगा तो अवनीश ने कहा कि कोई भी चेक, ड्राफ्ट या ऑनलाइन रुपये नहीं देता था। नकद लेनदेन ही होता था।
कमलेश फाइटर की गिरफ्तारी के लिए घर में दबिश
कल्याणपुर निवासी कमलेश फाइटर के खिलाफ कर्नलगंज और नजीराबाद थाने में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस के मुताबिक शुक्रवार को जानकारी मिली कि कमलेश अपने घर में है। पुलिस ने सादी वर्दी में दबिश दी तो घर से एक हिस्ट्रीशीटर का भाई मिला।
शातिर से पूछताछ कर रही है पुलिस
बताते चलें कमलेश फाइटर के संबंध शातिर हिस्ट्रीशीटर शानू लफ्फाज और कुछ अन्य अपराधियों से भी होने की बात सामने आई है। पुलिस फिलहाल पकड़े गए शातिर से पूछताछ कर रही है। कमलेश का एक खास गुर्गा भी वसूली में शामिल है, उसके खिलाफ भी तहरीर दी गई है।