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औरैया: डेढ़ माह बाद घर पहुंचा शहीद जवान विनोद का पार्थिव अवशेष, 44 दिन बाद डीएनए से हुई पहचान, परिजन बेहाल

Sat, 26 Sep 2026 12:06 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया Published by: Himanshu Awasthi Updated Sat, 26 Sep 2026 12:06 PM IST
सार

Auraiya News: अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली में बीते 14 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और बादल फटने की घटना में लापता हुए सराय अमिलिया निवासी अग्निवीर जवान विनोद यादव का पार्थिव अवशेष 44 दिन बाद घर पहुंचा। शनिवार, 26 सितंबर को डीएनए जांच रिपोर्ट के आधार पर पहचान की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद सेना ने शहीद जवान की अस्थियां परिजनों को सौंपी।

 

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Auraiya Mortal remains of martyred soldier Vinod reach home after month and a half identity confirmed via DNA
शहीद जवान विनोद यादव का पार्थिव अवशेष पहुंचा घर - फोटो : amar ujala

विस्तार

अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली में 14 अगस्त को आई अचानक बाढ़ में लापता हुए सराय अमिलिया निवासी सेना के जवान विनोद यादव की 44 दिन बाद पहचान हो सकी। डीएनए जांच रिपोर्ट के आधार पर शनिवार को उनकी पहचान की पुष्टि हुई और अस्थियां परिजनों को सुपुर्द की गईं। लंबे समय से बेटे की सकुशल वापसी की उम्मीद लगाए बैठे परिजनों के सामने जब उनकी अस्थियां पहुंचीं तो कोहराम मच गया। मां, पिता और भाई समेत परिवार के लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े। गांव में भी शोक की लहर दौड़ गई।

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सराय अमिलिया निवासी विनोद यादव पुत्र महेंद्र यादव अग्निवीर योजना के शुरुआती दौर में सेना में भर्ती हुए थे। वह वर्तमान में 5वीं ग्रेनेडियर में तैनात थे। विनोद के परिवार में मां सुनीत देवी, पिता महेंद्र यादव और छोटा भाई अभिषेक हैं। पिता किसान हैं। बीते 14 अगस्त की शाम करीब 4:30 बजे अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली जिले के पाशु पानी स्थित सेना के कैंप में भारी बारिश और बादल फटने के बाद अचानक बाढ़ आ गई थी।

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तलाश के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया
पानी का बहाव इतना तेज था कि सेना के दो शेल्टर उसकी चपेट में आकर बह गए। उस समय कैंप में मौजूद सात जवान बाढ़ के तेज बहाव में बह गए थे। इनमें दो जवानों को सुरक्षित बचा लिया गयाम  जबकि 5वीं ग्रेनेडियर में तैनात विनोद यादव समेत पांच जवान लापता हो गए थे। हादसे के बाद से ही सेना की ओर से लापता जवानों की तलाश के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया गया, लेकिन कुछ कामयाबी नही मिली।

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सेना और प्रशासन से मिलने वाली हर सूचना का था इंतजार
बेटे के लापता होने की सूचना मिलने के बाद से परिवार के लोग लगातार सेना और प्रशासन से मिलने वाली हर सूचना का इंतजार कर रहे थे। गांव के लोग भी परिवार के संपर्क में रहे और विनोद की सकुशल वापसी की प्रार्थना करते रहे। उधर लापता जवानों की तलाश में सेना की खोज व बचाव टीमें लगातार अभियान चलाती रहीं। भारतीय सेना के साथ आईटीबीपी, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें भी तलाशी अभियान में शामिल रहीं।

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पहचान के लिए डीएनए जांच कराई
दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में सेना की एविएशन यूनिट की मदद से भी संभावित स्थानों पर खोजबीन की गई। हालांकि लगातार बारिश, पहाड़ी भूभाग और पानी के तेज बहाव के कारण बचाव एवं तलाशी अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना रहा। इसके बावजूद जवानों की तलाश लगातार जारी रखी गई। हादसे के बाद लगातार खोजबीन के दौरान बरामद अवशेषों की पहचान के लिए डीएनए जांच कराई गई।

मां और परिजन फफक पड़े
26 सितंबर को डीएनए रिपोर्ट के आधार पर विनोद यादव की पहचान की पुष्टि हुई। इसके बाद सेना की ओर से उनकी अस्थियां परिजनों को सुपुर्द की गईं। अस्थियां घर पहुंचते ही परिवार के लोगों का धैर्य टूट गया। मां और परिजन फफक पड़े। बेटे के लौटने की उम्मीद लगाए बैठे परिवार के लिए यह पल बेहद भावुक कर देने वाला रहा। आसपास मौजूद ग्रामीणों की आंखें भी नम हो गईं।

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