Auraiya: यमुना पुल निर्माण में मौत का जोखिम, 54 फीट ऊंचाई पर बिना सुरक्षा काम कर रहे मजदूर, प्रशासन अनजान
Auraiya News: यमुना पुल निर्माण के दौरान मजदूर बिना सुरक्षा उपकरणों के जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की गैर-मौजूदगी और सुरक्षा बोर्ड के कबाड़ में होने से निर्माण कार्य की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
विस्तार
औरैया जनपद हमीरपुर में निर्माणाधीन पुल गिरने से छह मजदूरों की दर्दनाक मौत के बाद भी स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी और ठेकेदार गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। शहर के किनारे से गुजर रही यमुना नदी पर बन रहे नए पुल के निर्माण कार्य में भी सुरक्षा मानकों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। निर्माणाधीन पुल पर करीब 54 फीट ऊंचे पिलर पर मजदूर बिना किसी सेफ्टी बेल्ट और हेलमेट के काम करते मिले। ऐसे में कभी भी कोई हादसा हो सकता है।
हैरानी की बात यह है कि मौके पर उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी व इंजीनियर नहीं मिला। केवल डंपिंग यार्ड में एक सुपरवाइजर मौजूद मिले। जब निर्माण स्थल पर कैमरे चलने की भनक लगी, तो डंपिंग यार्ड में मौजूद प्राइवेट जूनियर इंजीनियर ने आननफानन में मजदूरों को पिलर से नीचे उतारा लेकिन तब तक पूरी लापरवाही कैमरे में कैद हो गई।
कबाड़ की तरह पड़ा मिला कार्य प्रगति पर है का बोर्ड
निर्माणाधीन स्थल पर अव्यवस्था का आलम यहीं खत्म नहीं होता। नियमानुसार, राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए सड़क किनारे कार्य प्रगति पर है का चेतावनी बोर्ड लगा होना चाहिए लेकिन जिम्मेदार ठेकेदार ने इस बोर्ड को सड़क पर लगाने के बजाय डंपिंग यार्ड में कबाड़ की तरह फेंक रखा है। पूरा निर्माण स्थल भगवान भरोसे चल रहा है।
यमुना पर बन रहा 916 मीटर लंबा पुल
बिलराया-पनवाड़ी मार्ग स्थित शेरगढ़ घाट पर यमुना नदी पर प्रस्तावित सेतु निर्माण राज्य योजना के अंतर्गत 151.22 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है। इस पुल की 916.88 मीटर लंबाई है। उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम लिमिटेड फर्रुखाबाद इकाई निर्माण करा रही है। इसमें पीएससी बॉक्स गर्डर तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है।
द शेल्टर फर्म को निर्माण का जिम्मा सौंपा गया
वहीं, पुल को मजबूती देने के लिए 1.50 मीटर व्यास के पाइल और 2.75 मीटर व्यास के पियर बनाए जा रहे हैं। कानपुर की द शेल्टर फर्म को इसके निर्माण का जिम्मा सौंपा गया है। अक्तूबर 2024 में शुरू हुए इस कार्य को जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
इस पुल निर्माण से सीमावर्ती जिले जालौन के बीच आवागमन पूरी तरह सुरक्षा के दृष्टिगत मजदूरों को सेफ्टी बेल्ट व हेलमेट के साथ काम करना चाहिए, अगर बिना सुरक्षा उपकरण के मजदूर काम रहे थे तो यह गंभीर मामला है, जांच कराई जाएगी। -विजय सेन, चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर सेतु निगम