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धर्मांतरण का मामला: एटीएस ने कब्जे में लिया ज्योति बधिर विद्यालय के बैंक खातों और शिक्षकों का ब्योरा

Fri, 25 Jun 2021 03:38 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Fri, 25 Jun 2021 03:38 PM IST
सार

धर्मांतरण के मामले में एटीएस की टीमें लगातार जांच में जुटी हैं। एटीएस ने बिठूर स्थित ज्योति बधिर स्कूल बंधन से बैंक खातों का ब्योरा लिया है।

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ATS captured the details of bank accounts and teachers of Jyoti Deaf School
ज्योति बधिर विद्यालय - फोटो : amar ujala

विस्तार

धर्मांतरण के मामले में एटीएस ने बिठूर स्थित ज्योति बधिर स्कूल की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। एटीएस की टीम ने गुरुवार को विद्यालय प्रबंधन से बैंक खातों का ब्योरा लिया। पिछले चार साल तक के सभी शिक्षकों और कर्मचारियों का विवरण भी जुटाया। प्रिंसिपल और मैनेजर से काफी देर तक पूछताछ की।
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अगर किसी तरह के साक्ष्य विद्यालय के खिलाफ पाए जाते हैं तो एटीएस अपने स्तर से कार्रवाई करेगी। धर्मांतरण के गिरोह का पर्दाफाश कर एटीएस ने चार दिन पहले मोहम्मद उमर गौतम और जहांगीर को गिरफ्तार किया था। खुलासा हुआ था कि काकादेव निवासी आदित्य गुप्ता को धर्म परिवर्तन कर अब्दुल बनाया गया है।
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एटीएस की टीमें लगातार जांच में जुटी हैं। चूंकि आदित्य ज्योति बधिर स्कूूल में पढ़ता था और संदिग्ध शिक्षक यहीं पर पढ़ाने आया था इसलिए स्कूल प्रबंधन भी जांच के दायरे में आ गया है। बुधवार को एटीएस ने स्कूल प्रबंधन से जल्द से जल्द पूरा ब्योरा मांगा था। गुरुवार को दोबारा एटीएस की टीम स्कूल पहुंची।
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ATS captured the details of bank accounts and teachers of Jyoti Deaf School
आदित्य गुप्ता उर्फ अब्दुल - फोटो : अमर उजाला
प्रिंसिपल रामदास पाल ने उनको स्कूल के तीन बैंक खातों की पूरी जानकारी देने के साथ पासबुकों की फोटो कॉपी दी। यही नहीं पिछले चार साल में कौन कौन से शिक्षकों ने यहां पर पढ़ाया। कौन कौन से छात्र यहां से पढ़कर निकले और कौन अभी भी हैं। इन सभी का नाम, पता, मोबाइल नंबर, परिजनों के नाम आदि की जानकारी ली। 

शिक्षक का नाम राजू नहीं राजीब आलम है 
अप्रैल 2019 से मार्च 2020 के बीच नेशनल डेफ सोसाइटी की तरफ से एक शिक्षक को ज्योति बधिर स्कूल में भारतीय सांकेतिक भाषा सिखाने के लिए भेजा था। जब एटीएस को प्रबंधन ने ब्योरा सौंपा तब स्पष्ट हुआ कि उसको नाम राजीब आलम था। अभी तक इसका नाम राजू आलम होने की चर्चा चल रही थी। राजीब ही आदित्य व अन्य कई बच्चों को इस्लाम धर्म के प्रति प्रेरित कर रहा था। 

स्कूल प्रबंधन की लापरवाही: नाम के अलावा कुछ जानकारी नहीं 
स्कूल के प्रिंसिपल रामदास पाल ने बताया कि एमओयू के तहत सोसाइटी ने दिल्ली से ही राजीब को एक साल के लिए भेजा था। हैरानी की बात ये है कि रामदास के पास राजीब नाम के अलावा उसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। उनका कहना है कि उनको नहीं पता कि राजीब कहां का रहने वाला है। इससे स्कूल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। स्कूल में पढ़ाने वाले के बारे में पूरी जानकारी तक नहीं। वो पूरा ठीकरा नेशनल डेफ सोसाइटी पर ही फोड़ रहे हैं। 
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