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शहर में खुलेगा ‘आशा ज्योति केंद्र’
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Thu, 29 Jan 2015 03:32 AM IST
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महिलाओं को एक छत के नीचे सभी विभागों की सुविधाएं एक साथ दिलाने के लिए प्रदेश सरकार निर्भया केंद्र की तर्ज पर रानी लक्ष्मी बाई आशा ज्योति केंद्र खोलने जा रही है।
पहले चरण में कानपुर समेत प्रदेश के 11 जिलों को शामिल किया गया है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के अन्य जनपदों में यह केंद्र खुलेंगे। इन केंद्रों में पुलिस व कानूनी मदद से लेकर चिकित्सा सुविधा तक मिलेंगी।
बैकिंग सुविधा व प्रशिक्षण हब भी यहां होगा। यह जानकारी प्रमुख सचिव महिला कल्याण रेणुका कुमार ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान दी।
वे राजकीय बालिका गृह और महिला आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थीं। उन्होंने कहा कि यह केंद्र सभी जिलों के मेडिकल कॉलेज में खोले जाएंगे।
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इन केंद्रों में बलात्कार की शिकार महिला को कानूनी मदद से लेकर चिकित्सीय मदद तक प्रदान की जाएगी। केंद्र में ही पीड़िता की पुलिस में प्राथमिकी लिख जाएगी।
कानूनी सहायता दिलाने के लिए अच्छे अधिवक्ता भी यहां उपलब्ध रहेंगे। पीड़िता को मनोवैज्ञानिक सलाह भी इन केंद्रों में प्रदान की जाएगी। केंद्र के संचालन में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की भी मदद ली जाएगी।
महिला कल्याण विभाग ने इन केंद्रों के संचालन के लिए नियमावली जारी कर दी है। नियमावली के अनुसार यह केंद्र मेडिकल कॉलेजों के परिसर में ही बनाए जाएंगे।
इसके लिए 500 वर्ग फुट की जमीन चाहिए होगी। प्रत्येक केंद्र स्थापित करने के लिए पांच करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इसमें सभी संबंधित विभागों को अपने-अपने बजट से स्टाफ व अन्य सुविधाएं मुहैया करानी होंगी।
इन केंद्रों के संचालन के लिए एक प्रशासन की नियुक्ति की जाएगी। यह प्रशासन महिला कल्याण विभाग की ओर से रखा जाएगा।
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पहले चरण में कानपुर समेत प्रदेश के 11 जिलों को शामिल किया गया है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के अन्य जनपदों में यह केंद्र खुलेंगे। इन केंद्रों में पुलिस व कानूनी मदद से लेकर चिकित्सा सुविधा तक मिलेंगी।
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बैकिंग सुविधा व प्रशिक्षण हब भी यहां होगा। यह जानकारी प्रमुख सचिव महिला कल्याण रेणुका कुमार ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान दी।
वे राजकीय बालिका गृह और महिला आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थीं। उन्होंने कहा कि यह केंद्र सभी जिलों के मेडिकल कॉलेज में खोले जाएंगे।
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इन केंद्रों में बलात्कार की शिकार महिला को कानूनी मदद से लेकर चिकित्सीय मदद तक प्रदान की जाएगी। केंद्र में ही पीड़िता की पुलिस में प्राथमिकी लिख जाएगी।
कानूनी सहायता दिलाने के लिए अच्छे अधिवक्ता भी यहां उपलब्ध रहेंगे। पीड़िता को मनोवैज्ञानिक सलाह भी इन केंद्रों में प्रदान की जाएगी। केंद्र के संचालन में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की भी मदद ली जाएगी।
महिला कल्याण विभाग ने इन केंद्रों के संचालन के लिए नियमावली जारी कर दी है। नियमावली के अनुसार यह केंद्र मेडिकल कॉलेजों के परिसर में ही बनाए जाएंगे।
इसके लिए 500 वर्ग फुट की जमीन चाहिए होगी। प्रत्येक केंद्र स्थापित करने के लिए पांच करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इसमें सभी संबंधित विभागों को अपने-अपने बजट से स्टाफ व अन्य सुविधाएं मुहैया करानी होंगी।
इन केंद्रों के संचालन के लिए एक प्रशासन की नियुक्ति की जाएगी। यह प्रशासन महिला कल्याण विभाग की ओर से रखा जाएगा।