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देश की पहली स्वाट टीम बनाने वाले असीम अरुण बने कानपुर कमिश्नर, पूर्व पीएम की सुरक्षा में रह चुके हैं तैनात
Fri, 26 Mar 2021 01:07 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 26 Mar 2021 01:07 PM IST
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असीम अरूण
- फोटो : फेसबुक
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उत्तर प्रदेश के कानपुर में कमिश्नरेट लागू होने के बाद डायल 112 के एडीजी का पदभार संभाल रहे 1994 बैच के तेज तर्रार आईपीएस अफसर असीम कुमार अरूण कानपुर के कमिश्नर बने हैं। असीम का नाम ज्यादा सुर्खियों में नहीं रहा, लेकिन बता दें कि देश की सुरक्षा में असीम का बड़ा हाथ है।
असीम अरूण
- फोटो : फेसबुक
लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके में छिपे संदिग्ध सैफुल्लाह को 2017 में जिस एटीएस की टीम ने मार गिराया था उसे असीम ही लीड कर रहे थे। देश में जनपद स्तर पर पहली स्वॉट (स्पेशल वेपन्स एंड टैक्टिस) टीम बनाने का श्रेय भी असीम अरुण को जाता है। असीम अरुण की काबलियत का ही नतीजा था कि उन्हें देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सुरक्षा दल में शामिल किया गया। वे एसपीजी में प्रधानमंत्री के अंदरूनी घेरे की सुरक्षा सीपीटी (क्लोज प्रोटेक्शन टीम) का नेतृत्व भी कर चुके हैं।
पत्नी के साथ असीम अरुण
- फोटो : फेसबुक
कौन हैं असीम अरुण
यूपी के कई जिलों में पुलिस कप्तान रह चुके असीम अरुण का जन्म 3 अक्टूबर 1970 को यूपी के कन्नौज जिले में हुआ था। उनके पिता श्रीराम अरुण भी एक आईपीएस अफसर थे। वे उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक भी रहे। उनकी माता शशि अरुण जानी-मानी लेखिका और समाजसेविका हैं। असीम ने शुरुआती शिक्षा लखनऊ के सेंट फ्रांसिस स्कूल से हासिल की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली का रुख किया और सेंट स्टीफेंस कॉलेज से बीएससी की।
यूपी के कई जिलों में पुलिस कप्तान रह चुके असीम अरुण का जन्म 3 अक्टूबर 1970 को यूपी के कन्नौज जिले में हुआ था। उनके पिता श्रीराम अरुण भी एक आईपीएस अफसर थे। वे उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक भी रहे। उनकी माता शशि अरुण जानी-मानी लेखिका और समाजसेविका हैं। असीम ने शुरुआती शिक्षा लखनऊ के सेंट फ्रांसिस स्कूल से हासिल की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली का रुख किया और सेंट स्टीफेंस कॉलेज से बीएससी की।
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आईपीएस असीम अरूण
- फोटो : amar ujala
कई जिलों में रह चुके हैं कप्तान
भारतीय पुलिस सेवा में आने के बाद असीम अरुण यूपी के कई जिलों में तैनात रहे। उन्होंने टिहरी गढ़वाल (अब उत्तराखंड में) के अलावा यूपी के जनपद बलरामपुर, हाथरस, सिद्धार्थ नगर, अलीगढ़, गोरखपुर और आगरा में बतौर पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस उपमहानिरीक्षक अपनी सेवाएं दी। इसके बाद वे कुछ समय के लिए स्टडी लीव पर विदेश चले गए थे। लेकिन लौटकर आने के बाद उन्होंने एटीएस लखनऊ में कार्यभार संभाला। इसके बाद से वो डायल 112 के एडीजी के पद पर तैनात थे।
भारतीय पुलिस सेवा में आने के बाद असीम अरुण यूपी के कई जिलों में तैनात रहे। उन्होंने टिहरी गढ़वाल (अब उत्तराखंड में) के अलावा यूपी के जनपद बलरामपुर, हाथरस, सिद्धार्थ नगर, अलीगढ़, गोरखपुर और आगरा में बतौर पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस उपमहानिरीक्षक अपनी सेवाएं दी। इसके बाद वे कुछ समय के लिए स्टडी लीव पर विदेश चले गए थे। लेकिन लौटकर आने के बाद उन्होंने एटीएस लखनऊ में कार्यभार संभाला। इसके बाद से वो डायल 112 के एडीजी के पद पर तैनात थे।
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आईपीएस असीम अरूण
- फोटो : फेसबुक
जानिए क्या है स्वाट और कैसे करती है काम
स्वाट मुख्य रूप से शहर में होने वाली हाईरिस्क वाली वारदातों जैसे बंधक बनाए जाने जैसी स्थिति, अचानक गोलीबारी जैसी परिस्थितयों से निपटने के लिए बनाई गई है। ऐसी कंडीशन में टीम सब्जेक्ट कंट्रोल, गोली चलाते वक्त दोनों आंखें खुली रखना, टार्गेट की कमजोरी पहचानना, फायर आर्म टैक्टिस, डबल टैप (दो बार गोली मारना), कवर फायर और घायल साथियों को बचाना, मानवाधिकारों को ध्यान रखने का काम करती है।
स्वाट मुख्य रूप से शहर में होने वाली हाईरिस्क वाली वारदातों जैसे बंधक बनाए जाने जैसी स्थिति, अचानक गोलीबारी जैसी परिस्थितयों से निपटने के लिए बनाई गई है। ऐसी कंडीशन में टीम सब्जेक्ट कंट्रोल, गोली चलाते वक्त दोनों आंखें खुली रखना, टार्गेट की कमजोरी पहचानना, फायर आर्म टैक्टिस, डबल टैप (दो बार गोली मारना), कवर फायर और घायल साथियों को बचाना, मानवाधिकारों को ध्यान रखने का काम करती है।