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Kanpur News: स्क्रीन टाइम बढ़ा तो गुस्सा भी बढ़ गया

Thu, 20 Feb 2025 01:27 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 20 Feb 2025 01:27 AM IST
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As screen time increased, anger also increased.
कानपुर। मोबाइल, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन ने किशोरों और युवाओं की स्लीप साइकिल को तोड़ दिया है। इससे उनमें गुस्सा, चिड़चिड़ापन, माइग्रेन जैसा सिर दर्द और नाक, कान गले में एलर्जी जैसे लक्षण उभर रहे हैं। मस्तिष्क की सहन क्षमता घट गई। स्क्रीन पर अधिक सिर खपाने से मानसिक ऊर्जा कम हो रही है। हारमोंस का सामंजस्य भी बिगड़ रहा है। स्लीप फाउंडेशन के 300 रोगियों के सैंपल सर्वे में यह बात उभर कर सामने आई है।
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सैंपल सर्वे में 10 साल के बच्चे से लेकर 18 साल तक के युवाओं को शामिल किया गया है। इनमें एक तीन साल का बच्चा भी है। जो फोन की स्क्रीन पर आठ से 10 घंटे खर्च करता है और उसको भी किशोरों जैसी दिक्कतें हो रही हैं। स्लीप फाउंडेशन के निदेशक सीनियर ईएनटी सर्जन डॉ. देवेंद्र लालचंदानी ने बताया कि रोगियों की हिस्ट्री ली गई तो उसमें नींद चक्र गड़बड़ होने का मुख्य कारण अधिक स्क्रीन टाइम मिला है। बच्चों में छोटी सी बात पर झुंझलाने की प्रवृत्ति बढ़ी मिली है।
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नींद चक्र प्रभावित होने से दिन में ऊंघने, याददाश्त प्रभावित होने, लॉजिक वाले सवालों को हल करने में दिक्कत होने तथा सिर दर्द और एलर्जी के लक्षण भी आए। इसके साथ ही कुछ किशोरों में मोटापा बहुत तेजी से बढ़ा। स्क्रीन में व्यस्त रहने की वजह से ओवर ईटिंग कर ली। इससे मोटापा बढ़ा और खर्राटे आने लगे। उन्होंने बताया कि स्क्रीन की लत पूरी रोगी की पूरे व्यक्तित्व पर असर डाल रही। स्क्रीन के लतियों में सामाजिकता की भावना कम हो गई। वह अनसोशल हो गए।
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. धनंजय चौधरी का कहना है कि स्क्रीन टाइम अधिक होने से न्यूरो केमिकल और हारमोंस का बैलेंस बिगड़ रहा है। स्क्रीन देखने से मस्तिष्क में एडिनोसिन ट्राईफॉसफेट (एटीपी) अधिक खर्च होता है। इन्हीं से मस्तिष्क को ऊर्जा मिलती है। एटीपी खर्च होने से दिमाग जल्दी थक जाता है। चिड़चिड़ापन आता है। स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी के कारण मेलोटोनिन का रिसाव कम होता है। इससे निद्रा चक्र प्रभावित हो जाता है। मेलोटोनिन के रिसाव से ही नींद आता है। रोगी सिर दर्द, आवेगी प्रवृत्ति आदि के लक्षण लेकर आते हैं लेकिन मुख्य कारण स्क्रीन टाइम निकलता है।
इन बातों का रखें ध्यान
-दिन में एक घंटे से अधिक स्क्रीन को समय न दें
-सोने के दो घंटे पहले ही स्क्रीन देखना बंद कर दें
-रात में सोएं तो कमरे की लाइट बंद कर दें
-सोकर उठने के तुरंत बाद स्क्रीन न देखें
-स्क्रीन पर पीडीएफ पढ़ने के बजाए किताब पढ़ें
-खाते वक्त टीवी, मोबाइल फोन, लैपटॉप न देखें
-मैदान में जाकर खेलें, दौड़ लगाएं
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