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मेक इन इंडिया: सरहद की सुरक्षा करेगी ‘शारंग’, ये है खासियत
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 28 Oct 2018 12:22 PM IST
सार
- ओएफसी और फील्डगन फैक्ट्री कानपुर मिलकर तैयार करेंगे तोप
- आयुध निर्माणी बोर्ड और रक्षा मंत्रालय के बीच 25 अक्तूबर को हुआ करार
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कानपुर में बनी शारंग तोप
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विस्तार
शारंग तोप के निर्माण के लिए रक्षा मंत्रालय और आयुध निर्माणी बोर्ड के बीच 25 अक्तूबर को समझौता हो गया। इसके तहत अगले चार साल में बोर्ड सेना को तीन सौ तोपों का निर्माण करके देगा। शारंग का निर्माण ओएफसी और फील्डगन फैक्ट्री कानपुर मिलकर करेंगी।
शारंग इस्राइली तोप सोल्टम का आधुनिक संस्करण है। पहले इसकी कैलिबर 135 एमएम थी। अब इसे 155 एमएम किया गया है। मार्च 2018 में हुए कई परीक्षणों में इस तोप ने भारत फोर्ज और पुंजलॉयड की तोपों को पछाड़ कर ओपेन बिड में सेना से ऑर्डर हासिल किया था। दिल्ली में इसके बल्क में उत्पादन के लिए बोर्ड की ओर से डिप्टी डायरेक्टर जनरल वेपेन आलोक प्रसाद और रक्षा मंत्रालय की अधिकारी निधि छिब्बर के बीच एक समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।
डिप्टी डायरेटर जनरल आयुध निर्माणी बोर्ड गगन चतुर्वेदी ने बताया कि 2022 तक तीन सौ तोपों का निर्माण कर सेना को दिया जाना है। पहले चरण में 30, दूसरे में 70 और अगले चरण में 100-100 तोपों का निर्माण किया जाना है। उन्होंने बताया कि शारंग तोप मेक इन इंडिया के तहत अपग्रेड की गई है। इसे ओएफसी कानपुर के आर्डनेंस डेवलेपमेंट सेंटर (ओडीसी) में विकसित किया गया है।
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शारंग इस्राइली तोप सोल्टम का आधुनिक संस्करण है। पहले इसकी कैलिबर 135 एमएम थी। अब इसे 155 एमएम किया गया है। मार्च 2018 में हुए कई परीक्षणों में इस तोप ने भारत फोर्ज और पुंजलॉयड की तोपों को पछाड़ कर ओपेन बिड में सेना से ऑर्डर हासिल किया था। दिल्ली में इसके बल्क में उत्पादन के लिए बोर्ड की ओर से डिप्टी डायरेक्टर जनरल वेपेन आलोक प्रसाद और रक्षा मंत्रालय की अधिकारी निधि छिब्बर के बीच एक समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।
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डिप्टी डायरेटर जनरल आयुध निर्माणी बोर्ड गगन चतुर्वेदी ने बताया कि 2022 तक तीन सौ तोपों का निर्माण कर सेना को दिया जाना है। पहले चरण में 30, दूसरे में 70 और अगले चरण में 100-100 तोपों का निर्माण किया जाना है। उन्होंने बताया कि शारंग तोप मेक इन इंडिया के तहत अपग्रेड की गई है। इसे ओएफसी कानपुर के आर्डनेंस डेवलेपमेंट सेंटर (ओडीसी) में विकसित किया गया है।
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डेमो पिक
70 डिग्री तक मूव किया जा सकता
शारंग में गोले दागने की क्षमता जबरदस्त है। इस तोप में पहाड़ों में छिपे दुश्मनों को तबाह करने की विशेष क्षमता है। तोप को 70 डिग्री तक मूव किया जा सकता है।
रूस की तोप का लेगी स्थान
शारंग तोप रूसी तोप एम-46 टाउड को रिप्लेस करेगी। यह तोप 1968 से सेना के पास है। इसकी कैलिबर130 एमएम है।
भगवान विष्णु के धनुष के नाम पर रखा नाम
शारंग पूरी तरह से स्वदेशी है। इसमें 100 फीसदी उपकरण स्वदेशी हैं। शारंग का नाम भगवान विष्णु के धनुष के नाम पर रखा गया है।
तोप की खासियत
वजन:- 8 टन
लंबाई:- 11 मीटर
चौड़ाई:- 2.45 मीटर
ऊंचाई:- 2.55 मीटर
कैलिबर:- 155 मिलीमीटर
कैरिज स्प्लिट ट्रेल
मारक क्षमता:- 36 किलोमीटर तक
शारंग में गोले दागने की क्षमता जबरदस्त है। इस तोप में पहाड़ों में छिपे दुश्मनों को तबाह करने की विशेष क्षमता है। तोप को 70 डिग्री तक मूव किया जा सकता है।
रूस की तोप का लेगी स्थान
शारंग तोप रूसी तोप एम-46 टाउड को रिप्लेस करेगी। यह तोप 1968 से सेना के पास है। इसकी कैलिबर130 एमएम है।
भगवान विष्णु के धनुष के नाम पर रखा नाम
शारंग पूरी तरह से स्वदेशी है। इसमें 100 फीसदी उपकरण स्वदेशी हैं। शारंग का नाम भगवान विष्णु के धनुष के नाम पर रखा गया है।
तोप की खासियत
वजन:- 8 टन
लंबाई:- 11 मीटर
चौड़ाई:- 2.45 मीटर
ऊंचाई:- 2.55 मीटर
कैलिबर:- 155 मिलीमीटर
कैरिज स्प्लिट ट्रेल
मारक क्षमता:- 36 किलोमीटर तक