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Kanpur News: डिजाइन बनाने वाली मशीन से लगा रहे हॉलमार्क

Tue, 13 Oct 2026 02:02 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 13 Oct 2026 02:02 AM IST
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Applying the hallmark using a machine designed for creating the mark.
कानपुर। धनतेरस के आसपास फर्जी हाॅलमार्क का खेल सामने आने से न सिर्फ ग्राहक बल्कि साफ-सुथरा कारोबार करने वाले सराफ भी हैरत में हैं। कुछ लोगों की वजह से शहर की सराफा बाजारों की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिह्न लगने की नौबत आ गई है। प्रमुख सराफा बाजार से ही पुलिस को मिली जानकारी के मुताबिक शहर में फर्जी हॉलमार्क लगाने वाली करीब 25-30 मशीनें काम कर रहीं हैं। पुलिस के अनुसार यह मशीनों का मुख्य कार्य गहनों में ग्राहकों की पसंद की डिजाइन बनाना है लेकिन कुछ छोटे सराफ इसका प्रयोग फर्जी हॉलमार्क के लिए कर रहे हैं।
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बता दें कि शनिवार को बिरहाना रोड पर चेन बेचने आई सुमन पुलिस के हाथ चढ़ी तो पूरे मामले का खुलासा हुआ। 10 फीसदी सोने की चेन पर 18 कैरेट का हॉलमार्क लगा मिला था। इसके बाद से ही सराफा कारोबार भी पुलिस के निशाने पर आ गया है। चौक और बिरहाना रोड के बड़े सराफा कारोबारियों से पुलिस को जो इनपुट मिला है उसके मुताबिक सहालगों और त्योहारों विशेष तौर पर धनतेरस और दीपावली पर इन मशीनों का दुरुपयोग बढ़ जाता है।
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एक नामचीन सराफ ने बताया कि यह मशीनें वैद्य होती हैं क्योंकि इनका काम सिर्फ गहनों को डिजाइन देना होता है। कंप्यूटराइज्ड इन मशीनों से ही कुछ सराफ अब हॉलमार्किंग भी करने लगे हैं।
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पुलिस सूत्रों के अनुसार, चुनिंदा सराफा कारोबारियों के अलावा चौक सराफा के अलावा नयागंज, किदवईनगर, गोविंदनगर, कल्याणपुर, लालबंगला, दबौली आदि की बाजारों में यह मशीनें बड़ी संख्या देखने को मिल जाएंगी। इन मशीनों का काम सिर्फ और सिर्फ गहनों की डिजाइन बनाना है पर हॉलमार्क लगा रहे हैं। पुलिस जल्द ही इन मशीनों का दुरुपयोग करने वाले सराफा कारोबारियों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है।

वर्जन
कुछ छोटे कारोबारी डिजाइन वाली मशीनों का दुरुपयोग हॉलमार्किंग के लिए कर रहे हैं। ऐसे लोगों और मशीनों का पता करने के लिए टीमें लगाई गई हैं। इसके लिए कुछ बड़े कारोबारियों की भी मदद ली जाएगी ताकि गलत काम करने वाले लोगों को पकड़ा जा सके। - अमित कुमार पांडे, एसीपी कोतवाली


ऐसे किया जाता है हॉल मार्किंग का खेल.....

- धोखेबाज सुनार या गिरोह बाजार में मिलने वाली छोटी लेज़र एचिंग मशीनों का उपयोग करके नकली सोने, तांबे या पीतल के गहनों पर बीआईएस का लोगो और 916 (22 कैरेट) या अन्य कैरेट के नकली निशान छापने काम करते हैं।

- कई बार गहने का मुख्य हिस्सा या चेन का ज्यादातर भाग सस्ती धातु का होता है लेकिन उसका हुक या क्लास्प असली सोने का और हॉलमार्क वाला लगा दिया जाता है ताकि जांच के दौरान पकड़ में न आए।
- किसी असली हॉलमार्क वाले गहने का सांचा तैयार करके उसी डिजाइन के नकली और कम शुद्धता वाले गहने बड़े पैमाने पर ढाल लिए जाते हैं।
- जब सरकार या हॉल मार्किंग सेंटरों पर फीस बढ़ती है तो कुछ अनधिकृत लोग अवैध रूप से बाहर ही ठप्पे और लेज़र प्रिंटिंग का काला कारोबार शुरू कर देते हैं।
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