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सिख विरोधी दंगा: 11 मुकदमों की विवेचना पूरी, पांच नामी वकीलों की नरसंहार में मिली भूमिका, ये सच आया सामने

Mon, 19 Jul 2021 09:09 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Mon, 19 Jul 2021 09:09 AM IST
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Anti-Sikh riots: 11 cases completed, five eminent lawyers got a role in the massacre
सिख दंगा (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
सिख विरोधी दंगों के मामले में एसआईटी ने 11 केसों की विवेचना पूरी कर ली है। चालीस से अधिक आरोपियों की इसमें शिनाख्त हुई। जिनका सत्यापन भी कर लिया गया है। इसमें शहर के पांच पुराने नामी वकील भी नामजद थे। उनकी भी भूमिका मिली है। एसआईटी के पास पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं। इन केसों में आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए मंजूरी लेने की प्रक्रिया एसआईटी ने शुरू कर दी है।
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एक से दो महीने के भीतर आरोपियों की धरपकड़ शुरू हो जाएगी। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के विरोध में कानपुर में सिख विरोधी दंगे हुए थे। जिसमें 127 लोग मारे गए थे। उस दौरान इन हत्याओं के मामले में पुलिस ने लचर कार्रवाई की थी। लिहाजा फरवरी 2019 में शासन ने इसकी जांच के लिए एसआईटी गठित की। कोतवाली में एसआईटी थाना भी बनाया गया।
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जिन 28 केसों में तब पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा चार्जशीट लगाई थी उनमें से एसआईटी ने 20 केसों की फाइल खोली। जिसमें से 11 केसों की विवेचना पूरी हो गई है। दो केसों में सबसे अधिक 13-13 आरोपी हैं। कुल मिलाकर इन सभी केसों में 40 से अधिक आरोपी हैं। पांच आरोपी ऐसे हैं जो उस समय के नामी वकील हुआ करते थे।
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तत्कालीन सरकार के नेता, मंत्रियों व विधायक से उनके संपर्क थे। उनके नाम व पते भी सत्यापित कर लिए गए हैं। इनकी भूमिका दंगों में पाई गई है। एसआईटी ने इन सभी के खिलाफ साक्ष्य जुटा लिए हैं। केवल गिरफ्तारी बाकी है। शासन से मंजूरी मिलने के बाद इन सभी के नाम सार्वजनिक किए जाएंगे और गिरफ्तारियां शुरू होंगी। 

आयोग की रिपोर्ट से मिली मदद 
जस्टिस रंगनाथ मिश्र आयोग ने दंगों की विस्तृत जांच की थी। कुछ समय पहले एसआईटी ने गृह मंत्रालय से अनुमति लेकर आयोग से रिपोर्ट ली। जिसमें कानपुर में हुए दंगों से संबंधित तमाम दस्तावेज मिले। जो शपथ पत्र मिले उसमें आरोपियों और गवाहों के नाम पते यहां तक कि जिनके पास फोन था उनके नंबर भी उसमें दर्ज थे। इस रिपोर्ट से आरोपियों तक पहुंचने में एसआईटी को काफी मदद मिली है। 
कुछ मर गए तो कुछ बहुत उम्रदराज हैं आरोपी 
सिख विरोधी दंगे के बाद 37 साल का वक्त बीच चुका है। यही वजह है कि जिन आरोपियों को एसआईटी ने चिह्नित किया है उसमें से कइयों की मौत हो चुकी है। आधा दर्जन से अधिक आरोपी 75 वर्ष से ऊपर के हो गए हैं। एक दो आरोपी कैंसर जैसी बीमारी से ग्रसित हैं। इसलिए एसआईटी इस तथ्य को शासन के सामने रखेगी। शासन निर्णय लेगा कि बीमार और उम्रदराज आरोपियों की गिरफ्तारी होगी या नहीं। 

आठ केसों की विवेचना पूरी हो गई है। शासन से अनुमति लेकर गिरफ्तारी की जाएगी। कुछ इसमें वकील भी शामिल हैं, जो आरोपी हैं।
बालेंदु भूषण सिंह, एसएसपी एसआईटी

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